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फिर से खुलने वाला है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज? तेल संकट से भी मिल सकती है राहत, क्या इस डील से मिलेगा फायदा

अमेरिका और ईरान के बीच लंबे तनाव के बाद शांति समझौते की उम्मीद बढ़ गई है. बातचीत में परमाणु कार्यक्रम और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज सबसे बड़े मुद्दे बने हुए हैं. समझौता होने पर वैश्विक तेल व्यापार की तस्वीर बदल सकती है.

By Tanuja Joshi | Updated: May 25, 2026 8:46 AM IST

US-ईरान रिश्तों में दिखी नरमी

कई महीनों की तनातनी और संघर्ष के बाद अब अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत सकारात्मक दिशा में बढ़ती दिख रही है. दोनों देशों के नेताओं के हालिया बयान संकेत दे रहे हैं कि जल्द कोई बड़ा समझौता सामने आ सकता है.

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बना सबसे बड़ा मुद्दा

दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज इस बातचीत का केंद्र बना हुआ है. इसी रास्ते से वैश्विक तेल और गैस सप्लाई का बड़ा हिस्सा गुजरता है, इसलिए इसका खुलना बेहद अहम माना जा रहा है.

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परमाणु कार्यक्रम पर जारी खींचतान

ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका लंबे समय से चिंता जताता रहा है. बातचीत में ये सबसे संवेदनशील विषय बना हुआ है और इसी पर दोनों देशों के बीच सबसे ज्यादा मतभेद बताए जा रहे हैं.

60 दिन के संघर्ष विराम की चर्चा

रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रस्तावित समझौते में 60 दिनों के अस्थायी संघर्ष विराम की बात शामिल हो सकती है. इसका मकसद तनाव कम करना और आगे की स्थायी बातचीत के लिए माहौल तैयार करना बताया जा रहा है.

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तेल बाजार पर पड़ सकता है बड़ा असर

होर्मुज दोबारा पूरी तरह खुलता है तो अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में राहत देखने को मिल सकती है. विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता आने की संभावना बढ़ेगी.

युद्ध के बाद बंद हुआ था अहम रास्ता

फरवरी में अमेरिका और इजरायल के सैन्य अभियान के बाद यह समुद्री मार्ग प्रभावित हुआ था. इसके बाद क्षेत्र में तनाव बढ़ गया और तेल सप्लाई चेन पर भी असर देखने को मिला.

ओमान की भूमिका पर नजर

ईरान का कहना है कि होर्मुज को लेकर किसी भी फैसले में ओमान और आसपास के देशों की सहमति जरूरी होगी. इसलिए आने वाले दिनों में क्षेत्रीय देशों की भूमिका काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है.

पूरी दुनिया की निगाहें समझौते पर

ये संभावित डील सिर्फ अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं है. इसका असर वैश्विक राजनीति, ऊर्जा बाजार, मिडिल ईस्ट की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ सकता है.