इथेनॉल से जलेगा अब घर का चूल्हा?
केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान इथेनॉल आधारित स्टोव टेक्निक (Ethanol-Based Stove Technology) को लॉन्च किया है. (Image: AI)
By Rishabh Kumar | Updated: May 29, 2026 6:28 PM IST
केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान इथेनॉल आधारित स्टोव टेक्निक (Ethanol-Based Stove Technology) को लॉन्च किया है. (Image: AI)
इस नई तकनीक लेकर दावा किया जा रहा है कि इसमें 7 प्रतिशत इथेनॉल मिलकर स्टोव जैसी लपटें पैदा की जा सकती हैं जो कि LPG से सस्ती है और पूरी तरह से स्वदेशी है. अब लोगों के मन में ये सवाल कर रहे हैं कि क्या पानी की मदद से आग पैदा की जा सकती है. आइए जानते हैं इसके बारे में यहां...
इथेनॉल एक ऐसा तरल ईंधन है जो आसानी से जल सकता है. जब इसकी भाप हवा में मौजूद ऑक्सीजन के संपर्क में आती है, तब लौ बनती है. पानी खुद नहीं जलता, इसलिए मिश्रण का अनुपात काफी अहम होता है.
वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार, पानी की मात्रा ज्यादा होने पर इथेनॉल की भाप कम बनती है. ऐसे में लौ को लगातार जलाए रखना कठिन हो जाता है. यही वजह है कि कम अल्कोहल वाले तरल पदार्थ आसानी से आग नहीं पकड़ते.
आमतौर पर इथेनॉल स्टोव में 70 से 90 प्रतिशत तक इथेनॉल इस्तेमाल किया जाता है. इससे स्थिर और नीली लौ मिलती है. ज्यादा पानी होने पर ईंधन गर्म होने में समय लगता है और जलने की क्षमता कम हो जाती है. विशेष तकनीक वाले स्टोव, जैसे प्री-हीटिंग या प्रेशराइज्ड बर्नर सिस्टम, ईंधन को बेहतर तरीके से भाप में बदल सकते हैं. ऐसे सिस्टम के साथ कम इथेनॉल वाले मिश्रण से भी लौ पैदा करना संभव हो सकता है.
भारत में गन्ने और कृषि अवशेषों से इथेनॉल उत्पादन लगातार बढ़ रहा है. अगर इसका घरेलू उपयोग बढ़ता है, तो एलपीजी आयात पर निर्भरता कम हो सकती है और रसोई ईंधन की लागत घटाने में मदद मिल सकती है. इथेनॉल की लौ दिन के उजाले में कम दिखाई देती है, जिससे सुरक्षा की चिंता बढ़ सकती है. साथ ही सही ईंधन मिश्रण और बेहतर स्टोव तकनीक जरूरी है, वरना खाना पकाने में दिक्कत और प्रदर्शन में कमी आ सकती है. (All Inage: Canva)