इथियोपिया - 80 से ज्यादा जातीय समूहों वाला देश
इथियोपिया की सामाजिक बनावट बेहद विविधता से भरी है. यहां 80 से अधिक जातियां अलग-अलग भाषा, संस्कृति और परंपरा के साथ रहती हैं. यहां की 60% आबादी ईसाई है, जो इथियोपियन ऑर्थोडॉक्स चर्च से जुड़ी है.
By Gargi Santosh | Updated: November 25, 2025 9:06 PM IST
इथियोपिया की सामाजिक बनावट बेहद विविधता से भरी है. यहां 80 से अधिक जातियां अलग-अलग भाषा, संस्कृति और परंपरा के साथ रहती हैं. यहां की 60% आबादी ईसाई है, जो इथियोपियन ऑर्थोडॉक्स चर्च से जुड़ी है.
इथियोपिया आज भी गीज कैलेंडर का उपयोग करता है, जिसकी गणना ग्रेगोरियन कैलेंडर से बिल्कुल अलग होती है. यहां 12 महीनों में हर महीना सिर्फ 30 दिन का होता है और जो दिन बच जाते हैं, उन्हें 13वें छोटे महीने पागुमेन में रखा जाता है. इसी वजह से यहां 13 महीने पूरे साल का हिस्सा माने जाते हैं.
गीज कैलेंडर पूरी तरह सौर आधारित है और हर 4 साल में लीप ईयर आता है. जिस साल लीप ईयर होता है, उस साल इथियोपिया में 13वां महीना 5 दिन के बजाय 6 दिन का हो जाता है. इसलिए इथियोपियन गर्व से कहते हैं - We have 13 months of sunshine.
पूरी दुनिया जहां ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार 2025 में जी रही है, वहीं इथियोपिया अभी 2018 में है. क्योंकि उनका कैलेंडर दुनिया के कैलेंडर से करीब 7–8 साल पीछे चलता है. यहां नया साल सितंबर में शुरू होता है, जिसे मेस्केरेम कहते हैं और यह अक्सर 11 या 12 सितंबर को आता है.
इथियोपिया का समय भी दुनिया से अलग है. वहां दिन की शुरुआत घड़ी के 12 पर होती है, यानी सूर्योदय को 12 बजे सुबह माना जाता है. वहां समय की गिनती रात 12 बजे से नहीं बल्कि सूरज के निकलने के क्षण से शुरू होती है. इसे इथियोपियन टाइम कहा जाता है, जो बाहरी दुनिया को बेहद अलग और रोचक लगता है.
क्योंकि इथियोपिया कभी उपनिवेश नहीं बना, इसलिए यहां की भाषा, गीज लिपि, चर्च म्यूजिक, खान–पान और परंपराओं पर पश्चिमी देशों का असर लगभग नहीं के बराबर है. देश ने अपनी प्राचीन परंपराओं और पुराने ईसाई चर्च द्वारा अपनाए गए कैलेंडर को आज भी उसी रूप में संभालकर रखा है.
इथियोपिया की संस्कृति भले ही अनोखी और समृद्ध हो, लेकिन विकास के मामले में यह काफी पिछड़ा है. यहां के ग्रामीण इलाकों में लगभग 70% लोग आज भी मिट्टी के घरों में बिजली–पानी के बिना रहते हैं. इंटरनेट की पहुंच सिर्फ 25% तक है.
इथियोपिया के ललिबेला क्षेत्र में बने चट्टानी चर्च आज भी उसी तरह पूजा के लिए इस्तेमाल होते हैं जैसे 11वीं सदी में हुआ करते थे. चर्चों की घंटियों, प्रार्थनाओं और पूजा विधियों में कोई बदलाव नहीं आया है. ऐसा लगता है जैसे समय यहां थम गया हो और यही इथियोपिया की सबसे बड़ी सांस्कृतिक खूबसूरती है. (Photos: freepik)