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हिरोशिमा-नागासाकी से बड़ा धमाका... जब जापान में नहीं बचा था किसी का भी नामोनिशान

Japan Volcano: जापान में हुए इस विस्फोट को होलोसीन (हमारे मौजूदा भूवैज्ञानिक युग) का अब तक का सबसे बड़ा ज्ञात धमाका माना जाता है.

By Vineet Sharan | Updated: April 8, 2026 12:53 PM IST

7,300 साल पहले भी आई थी जापान में तबाही

Japan Volcano: छह, अगस्त 1945 को हिरोशिमा और तीन दिन बाद नागासाकी में हुए विस्फोट ने जापान को तबाह कर दिया था. ऐसी ही एक तबाही जापान में 7,300 साल पहले भी आई थी और तब उसने 'जोमोन' लोगों को पूरी तरह बर्बाद कर दिया था. ये लोग लगभग 14,000 ईसा पूर्व से 300 ईसा पूर्व के बीच उस क्षेत्र में निवास करते थे, जिसे आज हम जापान के नाम से जानते हैं. नए शोध में चेतावनी दी गई है कि भविष्य ऐसे खतरे फिर आ सकते हैं.

क्या हुआ था 7,300 साल पहले

साइंस अलर्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जापान के क्यूशू द्वीप के पास किकई काल्डेरा ज्वालामुखी है. हजारों साल पहले इसी ज्वालामुखी में विस्फोट हुआ था, जिसमें जोमोन लोगों को नामोनिशान तक मिट गया था. इस विस्फोट को 'अकाहोया विस्फोट' के नाम से जाना जाता है.

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कितना भयानक है ये ज्वालामुखी

यह ज्वालामुखी इतना भयानक है कि अपने 'अकाहोया विस्फोट' के दौरान लगभग 160 घन किलोमीटर के बराबर घनी चट्टानें बाहर फेंकी थीं. धमाके ने 4,500 वर्ग किलोमीटर के विशाल क्षेत्र (लंदन से भी कई गुना बड़ा इलाका) में मलबा फैल गया था.

क्या है नए शोध मे चेतावनी

एक नए अध्ययन में, शोधकर्ताओं ने खुलासा किया है कि इस ज्वालामुखी का विशाल मैग्मा चैंबर अब धीरे-धीरे फिर से भर रहा है. शोधकर्ताओं के मुताबिक, इससे इस ज्वालामुखी और इसी तरह के अन्य ज्वालामुखियों के विस्फोट चक्रों को समझने में मदद मिल सकती है. इस तरह, भविष्य के विस्फोटों की पहले से और अधिक सटीक भविष्यवाणी की जा सकती है.

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फट भी सकता है ये ज्वालामुखी

पिछले शोधों में किकाई काल्डेरा के नीचे नई ज्वालामुखी गतिविधियों के प्रमाण मिले हैं. ये प्रमाण एक 'लावा डोम' (लावा का गुंबद) बनने की ओर इशारा करते हैं, और इस बात की चिंता भी पैदा करते हैं कि यह ज्वालामुखी फिर से कभी भी फट सकता है.

क्या बोले शोधकर्ता

जापान की कोबे यूनिवर्सिटी के भूभौतिकीविद् और सह-लेखक सीमा नोबुकाज़ु कहते हैं, हमें यह समझना होगा कि इतनी बड़ी मात्रा में मैग्मा कैसे जमा हो पाता है, ताकि हम यह समझ सकें कि विशाल काल्डेरा विस्फोट कैसे होते हैं. यह अध्ययन 'कम्युनिकेशंस अर्थ एंड एनवायरनमेंट' में प्रकाशित हुआ था. (photo credit AI, for representation only)