Fight Between India And Pakistan Over The Division Of An Elephant Do You Know This Interesting Story 8013277
जब एक जानवर के बंटवारे के लिए भारत-पाकिस्तान में हो गई 'लड़ाई', क्या आप जानते हैं ये दिलचस्प किस्सा?
India Pakistan Partition: भारत-पाकिस्तान के विभाजन के समय एक तरफ राजनीति, जमीन और धन का बंटवारा चल रहा था, तो दूसरी तरफ कुछ ऐसे किस्से भी पैदा हुए, जो आज सुनने में मजाकिया लगते हैं, लेकिन उस वक्त बेहद गंभीर थे.
भारत-पाकिस्तान के विभाजन के समय एक तरफ राजनीति, जमीन और धन का बंटवारा चल रहा था, तो दूसरी तरफ कुछ ऐसे किस्से भी पैदा हुए, जो आज सुनने में मजाकिया लगते हैं, लेकिन उस वक्त बेहद गंभीर थे.
People are also watching
2/8
किसके हिस्से आएगा क्या?
सिरिल रेडक्लिफ ने भारत-पाकिस्तान के भू-भाग पर महज़ एक रेखा खींच दी. इससे एक नया सवाल उठा कि जानवर, गाड़ियां, फर्नीचर, पैसा किसे मिलेगा?
3/8
बंटवारे की टीम में कौन-कौन?
16 जून 1947 को पंजाब विभाजन समिति बनाई गई थी, जिसमें कांग्रेस की तरफ से सरदार पटेल और राजेंद्र प्रसाद थे, जबकि मुस्लिम लीग का प्रतिनिधित्व लियाकत अली खान और बाद में जिन्ना ने किया.
4/8
एक जानवर के लिए भिड़ गए भारत-PAK
इस किस्से का मुख्य किरदार था बंगाल वन विभाग का हाथी जॉयमोनी. उसकी कीमत एक स्टेशन वैगन (कार) के बराबर आंकी गई थी, यानी हाथी और गाड़ी का सवाल था.
5/8
हाथी के लिए खिंच गईं तलवारें
दोनों देशों को वह हाथी चाहिए था, क्योंकि वह वन विभाग के कर्मचारियों और स्थानीय लोगों के बीच बहुत लोकप्रिय था. विवाद इतना बढ़ गया कि अंग्रेजों को बीच में हस्तक्षेप करना पड़ा.
6/8
70 दिनों में सब कुछ बांटना था
विभाजन परिषद को सिर्फ 70 दिन दिए गए थे, जिसमें जानवर, गाड़ियां, अफसरों का सामान, सब कुछ बांटना था. ऐसे में हर छोटी चीज की भी चर्चा हुई.
7/8
आखिरकार क्या हुआ?
काफी बहस के बाद फैसला हुआ कि पश्चिम बंगाल को वाहन (कार) मिलेगी और पूर्वी बंगाल (अब बांग्लादेश) को हाथी जॉयमोनी मिलेगा. सभी की खुशी अधूरी थी, मगर फैसला लेना जरूरी था.
8/8
बंटवारे का दर्द
यह घटनाक्रम बताता है कि विभाजन न केवल जमीन और संपत्ति का था, बल्कि भावनाओं, संस्कृति और इंसानों के अलावा जानवरों की दुनिया पर भी गहरा असर पड़ा.
By clicking “Accept All Cookies”, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts Cookies Policy.