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संसद में गूंजे 'वास्तेगुना-हुइंया' और 'कुचु-पुचु'... जानिए Gen-Z के इन शब्दों का क्या है मतलब, नेताओं ने क्यों बोली ये भाषा

संसद में Gen-Z के कुछ स्लैंग गूंज रहे हैं. चलिए इस खबर में आपको बताते हैं Vasteguna Huiya, Kuchu Puchu, Delulu, FOMO, MIA और Clocked It का मतलब.

By Gargi Santosh | Updated: July 31, 2026 9:36 PM IST

संसद में गूंजे Gen-Z के शब्द

इस बार के मानसून सत्र में कानून से ज्यादा चर्चा Gen-Z की भाषा को लेकर हो रही है. एंटी-पेपर लीक बिल पर बहस के दौरान कई सांसदों ने MIA, FOMO, Delulu, Vasteguna Huiya, Kuchu-Puchu और Clocked It जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया. लोकसभा में युवाओं की भाषा सुनकर हर कोई हैरान रह गया. चलिए आपको इनके मतलब बताते हैं. (Photo from IANS)

इन वायरल शब्दों का मतलब क्या है?

MIA का मतलब है Missing in Action, यानी लंबे समय से गायब होना. FOMO का होती है किसी चीज से छूट जाने का डर. Delulu उस व्यक्ति के लिए बोला जाता है, जो अपनी कल्पनाओं की दुनिया में रहता है. Clocked It का मतलब किसी छिपी हुई बात को पहचान लेना है. वहीं Vasteguna Huiya और Kuchu-Puchu का कोई तय मतलब नहीं है. लेकिन ये सोशल मीडिया पर वायरल होकर Gen-Z की भाषा का हिस्सा बन गए हैं. (Photo from Magnific)

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सोशल मीडिया से संसद तक कैसे पहुंचे ये शब्द?

इन शब्दों को लोकप्रिय बनाने में सोशल मीडिया और खासकर युवाओं के ऑनलाइन कैंपेन की बड़ी भूमिका रही. Cockroach Janata Party (CJP) ने सोशल मीडिया मूवमेंट ने Gen-Z की भाषा, मीम्स और नारों को तेजी से वायरल किया. पेपर लीक विरोध प्रदर्शन के दौरान यही स्लैंग पोस्टर, वीडियो और नारों में खूब इस्तेमाल हुए और बाद में नेताओं की जुबान तक पहुंच गए. (Photo from IANS)

2029 चुनाव से पहले Gen-Z क्यों है सबसे अहम?

दैनिक भास्कर ने एक रिपोर्ट के हवाले से बताया कि भारत में 1997 से 2012 के बीच जन्मे करीब 38 करोड़ Gen-Z हैं. हर चौथा संभावित वोटर इसी पीढ़ी से जुड़ा है. भले ही युवा वोटरों का प्रतिशत धीरे-धीरे घट रहा हो, लेकिन उनकी संख्या अब भी इतनी बड़ी है कि कोई भी राजनीतिक दल उन्हें नजरअंदाज नहीं कर सकता. यही वजह है कि नेताओं की भाषा और प्रचार के तरीके भी बदल रहे हैं. (Photo from Magnific)

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Gen-Z को नेताओं का यह अंदाज कितना पसंद आया?

कई युवा मानते हैं कि नेताओं ने Delulu जैसे स्लैंग का सही संदर्भ में इस्तेमाल नहीं किया. उनका कहना है कि इन शब्दों का मतलब सोशल मीडिया पर अलग होता है, जबकि संसद में इन्हें राजनीतिक तंज के रूप में पेश किया गया. इससे युवाओं को लगता है कि उनकी भाषा को पूरी तरह समझे बिना इस्तेमाल किया जा रहा है. (Photo from IANS)

युवाओं की नेताओं से क्या उम्मीद है?

Gen-Z का कहना है कि नेता उनकी भाषा की नकल करने के बजाय उनकी असली समस्याओं पर ध्यान दें. युवाओं के लिए बेहतर शिक्षा, रोजगार और अवसर पैदा करना ज्यादा जरूरी है. उनका मानना है कि अगर सरकार और राजनीतिक दल उनके मुद्दों पर काम करेंगे, तो केवल स्लैंग बोलने से कहीं ज्यादा मजबूत जुड़ाव बन पाएगा. (Photo from Magnific)