बिरायानी एक ऐसी स्वाद से भरा पकवान है, जिसे लोग बड़े शौक से खाते हैं. हर किसी त्योहार से लेकर किसी खुशी के वक्त लोग सबसे पहले बिरयानी की पार्टी मांगते हैं. यही वजह है कि देश व दुनिया में बिरयानी बड़ी मात्रा में खाई जाती है.
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बिरयानी का इतिहास
जिस तरह बिरयानी को बड़े सुकून के साथ पकाया जाता है सही चावल, सही मात्रा में मसाले और मीट का इस्तेमाल किया जाता है, वैसा ही कुछ स्वाद और कहानियों से भरा इसका इतिहास है. इसके इतिहास में कई ऐसी बातें हैं, जो बड़े से बड़े बिरयानी लवर्स नहीं जानते.
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क्या है बिरयानी नाम का मतलब
बिरयानी शब्द फारसी शब्द बिरयानी से लिया गया है, जिसका मतलब पकाने से पहले तला हुआ होता है. इसके अलावा एक और शब्द इससे मिलता है, जो फारसी की है- बिरिंज है, जिसका मतलब चावल होता है.
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वक्त के साथ बजला बिरयानी का स्वाद
बिरयानी जैसी आज बनाई जाती है, पहले के समय में वैसे नहीं बनाई जाती थी. आज के वक्त में जहां चावल के साथ तरह-तरह के मसालें और तेल और मांस का इस्तेमाल होता था. पहले के समय सिर्फ चावल को घी में तलकर मांस के साथ धीमी आंच पर पकाया जाता था और खाया जाता था.
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फारस से निकली मुगलों का स्वाद फिर बनी बिरयानी
इतिहासकार मानते हैं कि बिरयानी फारसी पुलाव से विकसित हुई है. जब मुगल बिरयानी अपनी रसोई में लाए तो इसमें भारतीय शाही रसोइयों ने कई मसालों का इस्तेमाल किया और एक अलग स्वाद देने की कोशिश की, जिसके बाद बिरयानी का जन्म हुआ.
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ये कहानी सबसे ज्यादा मशहूर
बिरयानी को लेकर एक कहानी सबसे ज्यादा मशहूर होती है, जो शाहजहां की बेगम मुमताज महल से जुड़ी हुई है. माना जाता है कि मुमताज महल सेना के कैंप में गई थीं. वहां उन्होंने सैनिकों को कुपोषित पाया. उन्होंने शाही रसोइयों से मांस और चावल का इस्तेमाल करके एक पौष्टिक, ऊर्जा से भरपूर डिश बनाने के लिए कहा. चावल, मांस और मसालों के मेल से इस दौरान बिरयानी की शुरुआत हुई. (Image: Pexels)
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