कैसे बदला समय का पहिया?
आज इसकी कल्पना करना भी मुश्किल है, लेकिन भारत में एक समय कई घड़ियां चलती थीं. एक सिंगल नेशनल टाइम होने से पहले हर शहर सूरज के हिसाब से अपना लोकल टाइम फॉलो करते थे. इसलिए जब बॉम्बे में दोपहर होती थी तो कलकत्ता में पहले से ही कुछ मिनट आगे का समय हो सकता था.