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दुनिया को सोए हुए ज्वालामुखियों से खतरा! जानें कितनी है इनकी संख्या, इथियोपिया के ज्वालामुखी ने 12,000 साल बाद मचाई तबाही

Volcano Bust: उत्तर-पूर्वी इथियोपिया में 12,000 सालों बाद हायली गुब्बी ज्वालामुखी सक्रिय हुआ. यह विस्फोट न केवल स्थानीय क्षेत्र के लिए खतरा है, बल्कि यमन, ओमान, भारत और पाकिस्तान तक राख फैलाने की क्षमता रखता है.

By Gaurav Barar | Updated: November 26, 2025 11:21 AM IST

इथियोपिया में 12,000 सालों बाद फटा ज्वालामुखी 

उत्तर-पूर्वी इथियोपिया में लंबे समय से निष्क्रिय रहे हायली गुब्बी ज्वालामुखी में लगभग 12,000 सालों बाद अचानक विस्फोट हुआ. यह ज्वालामुखी राजधानी अबाबा से लगभग 800 किलोमीटर दूर, इरिट्रिया की सीमा के पास अफार इलाके में स्थित है. रविवार को अचानक सक्रिय होने पर कई घंटे तक राख, धूल और मलबा वायुमंडल में लगभग 14 किलोमीटर तक फैल गया. इसकी राख यमन, ओमान, भारत और पाकिस्तान तक पहुंची. 

भौगोलिक स्थिति बनाती है इसे और खतरनाक 

हायली गुब्बी की भौगोलिक स्थिति इसे और खतरनाक बनाती है. यह रिफ्ट वैली पर स्थित है, जहां दो टेक्टोनिक प्लेटें आपस में टकराती हैं. स्मिथसोनियन इंस्टीट्यूशन के ग्लोबल वोल्केनिज़्म प्रोग्राम के अनुसार, होलोसीन के दौरान हायली गुब्बी में कोई विस्फोट नहीं हुआ था. इसलिए इसे निष्क्रिय माना जाता था और लोग इसके अचानक सक्रिय होने की कल्पना भी नहीं कर सकते थे.

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निष्क्रिय ज्वालामुखी क्या है?

एक निष्क्रिय ज्वालामुखी वह होता है जो अभी विस्फोट नहीं कर रहा है, लेकिन पूरी तरह शांत भी नहीं माना जाता. इसका मतलब है कि भविष्य में यह फिर से सक्रिय हो सकता है. ऐसे ज्वालामुखियों में हाल के वर्षों में कोई विस्फोट नहीं हुआ होता, लेकिन अंदरूनी मैग्मा सिस्टम अभी भी सक्रिय होता है. 

दुनिया में कितने निष्क्रिय ज्वालामुखी?

अक्सर छोटे भूकंप, गैस का निकलना और तापमान में बदलाव इसके संकेत होते हैं. दुनिया में कई प्रसिद्ध निष्क्रिय ज्वालामुखी हैं, जैसे माउंट फूजी (जापान), माउंट किलिमंजारो (तंजानिया), येलोस्टोन काल्डेरा (यूएसए). ये भले ही लंबे समय से शांत हैं, लेकिन अचानक सक्रिय हो सकते हैं और आसपास के क्षेत्रों के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं. हालांकि निष्क्रिय ज्वालामुखियों की कोई पक्की संख्या नहीं है, क्योंकि उन्हें अक्सर एक्टिव ज्वालामुखियों के साथ ग्रुप में रखा जाता है, लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो इनकी संख्या लगभग 1,350 है.

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निष्क्रिय ज्वालामुखियों पर नजर क्यों जरूरी है?

निष्क्रिय ज्वालामुखी अचानक फट सकते हैं. उदाहरण के लिए, फिलीपींस में माउंट पिनाटुबो 500 सालों तक निष्क्रिय रहने के बाद 1991 में अचानक फटा और भारी तबाही मचाई. इन ज्वालामुखियों की मिट्टी उपजाऊ होती है और पर्यटक आकर्षण भी बनते हैं. वैज्ञानिक सीस्मिक सेंसर, गैस डिटेक्टर, सैटेलाइट इमेजरी और तापमान माप का उपयोग कर इन पर लगातार नजर रखते हैं.

सबसे खतरनाक निष्क्रिय ज्वालामुखी

माउना लोआ, हवाई- 13,681 फीट ऊंचा, 33 बार फटा, आखिरी बार 1984 में. माउंट किलिमंजारो, तंजानिया- 19,341 फीट, लगभग 3.6 मिलियन साल से शांत, लेकिन ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं. माउंट फूजी, जापान- 12,388 फीट, 1707 के बाद शांत, टोक्यो के पास होने से खतरनाक. माउंट सेंट हेलेन्स, यूएसए- 1980 में भयंकर विस्फोट, अब भी मॉनिटर किया जाता है. माउंट वेसुवियस, इटली- 4,203 फीट, पोम्पेई को तबाह किया, 1944 के बाद शांत. 

लिस्ट में ये नाम भी

माउंट एटना, सिसिली- 10,922 फीट, यूरोप का सबसे सक्रिय ज्वालामुखी. माउंट रेनियर, यूएसए- 14,410 फीट, बर्फ़ से ढका, ग्लेशियर विस्फोट खतरा. माउंट तारानाकी, न्यूजीलैंड- 8,263 फीट, सुंदर कोन शेप, अचानक विस्फोट खतरा. माउंट टैम्बोरा, इंडोनेशिया- 9,350 फीट, 1815 में ‘बिना गर्मी वाला साल’ लाया. माउंट पेली, कैरिबियन- 4,583 फीट, 1902 में विस्फोट, 30,000 लोगों की मौत. 

किसी भी समय हो सकते हैं सक्रिय

इन सभी ज्वालामुखियों ने इतिहास में बड़े नुकसान किए हैं और आज भी ये किसी भी समय सक्रिय हो सकते हैं. वैज्ञानिक लगातार मॉनिटरिंग कर के अलर्ट जारी करते हैं ताकि मानव जीवन को सुरक्षित रखा जा सके.