Add India.com as a Preferred Source Add India.com as a Preferred Source
Advertisement

अगस्त-सितंबर में कितनी होगी बारिश? क्या एल नीनो का बढ़ेगा असर, IMD का ये अलर्ट जानना जरूरी

देशभर में जुलाई महीने में औसतन 283.3 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई. अब अगस्त और सितंबर को लेकर मौसम विभाग ने नया अलर्ट जारी कर दिया है. चलिए आपको बताते हैं इन दो महीनों में कितनी बारिश होने वाली है.

By Tanuja Joshi | Updated: August 1, 2026 8:44 AM IST

अगस्त और सितंबर में कितनी होगी बारिश?

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अगले 2 महीनों के मौसम को लेकर नई जानकारी जारी कर दी है. विभाग का कहना है कि अगस्त और सितंबर में देश के ज्यादातर हिस्सों में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है. इसके साथ ही दिन और रात दोनों समय का तापमान सामान्य से ज्यादा रह सकता है. इसका मतलब ये है कि लोगों को उमस और गर्मी का ज्यादा सामना करना पड़ सकता है. हालांकि, पूरे देश में एक जैसी स्थिति नहीं होगी. कुछ इलाकों में सामान्य या उससे ज्यादा बारिश हो सकती है, लेकिन कुल मिलाकर मानसून की रफ्तार पहले की तुलना में धीमी रहने का अनुमान है. मौसम विभाग लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और आने वाले दिनों में नए अपडेट भी जारी करेगा ताकि किसान, आम लोग और प्रशासन पहले से तैयारी कर सकें.

जुलाई में कैसे बदले मौसम के हालात

जून के आखिर तक ऐसा लग रहा था कि इस बार मानसून काफी कमजोर रहेगा, लेकिन जुलाई में मौसम ने बड़ा बदलाव दिखाया. कई राज्यों में लगातार बने कम दबाव के क्षेत्रों की वजह से अच्छी बारिश हुई और देशभर में वर्षा की कमी काफी हद तक कम हो गई. मध्य भारत के कई हिस्सों में जोरदार बारिश दर्ज की गई, जिससे जलाशयों का स्तर बढ़ा और खेती को राहत मिली. हालांकि दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर के कुछ क्षेत्रों में अपेक्षित बारिश नहीं हो सकी. जुलाई की अच्छी बारिश ने सूखे जैसी चिंता को कुछ समय के लिए कम जरूर किया, लेकिन मौसम विभाग का कहना है कि इससे पूरे मानसून सीजन की तस्वीर पूरी तरह नहीं बदलती क्योंकि आगे के दो महीने अभी भी चुनौतीपूर्ण रह सकते हैं.

Advertisement

एल नीनो क्यों बना चिंता की वजह

एल नीनो एक ऐसी मौसमीय स्थिति है जिसका असर दुनिया के कई देशों की बारिश और तापमान पर पड़ता है. जब प्रशांत महासागर का पानी सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाता है, तब इसका प्रभाव वैश्विक मौसम पर दिखाई देता है. भारत में अक्सर एल नीनो के दौरान मानसून कमजोर पड़ने की आशंका रहती है. इस बार भी मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि एल नीनो धीरे-धीरे और मजबूत हो रहा है. इसी वजह से अगस्त और सितंबर में बारिश कम रहने का अनुमान लगाया गया है. अगर एल नीनो का असर और बढ़ता है तो कई इलाकों में बारिश की कमी लंबे समय तक बनी रह सकती है. इसका असर खेती, जल भंडारण और बिजली उत्पादन जैसे कई क्षेत्रों पर भी पड़ सकता है.

किन इलाकों में मिल सकती है कुछ राहत

हालांकि पूरे देश के लिए कम बारिश का अनुमान लगाया गया है, लेकिन कुछ क्षेत्रों में स्थिति अलग हो सकती है. मौसम विभाग के अनुसार उत्तर-पश्चिम भारत, मध्य भारत और पूर्वी भारत के कुछ हिस्सों में सामान्य या उससे अधिक बारिश होने की संभावना बनी हुई है. अगस्त के शुरुआती दो सप्ताह अपेक्षाकृत बेहतर रह सकते हैं. इस दौरान कई राज्यों में सामान्य मानसूनी गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं. इसके बाद बारिश की रफ्तार धीरे-धीरे कम होने की आशंका है. इसलिए जिन राज्यों में शुरुआती दिनों में अच्छी बारिश मिलेगी, वहां खेती और जल भंडारण के लिहाज से यह समय महत्वपूर्ण माना जा रहा है. स्थानीय मौसम अपडेट पर नजर रखना भी जरूरी रहेगा.

Advertisement

बढ़ती गर्मी लोगों को कैसे करेगी प्रभावित

अगर अगस्त और सितंबर में तापमान सामान्य से ऊपर रहता है तो इसका असर केवल मौसम तक सीमित नहीं रहेगा. लगातार गर्मी और उमस से लोगों की दैनिक जिंदगी प्रभावित हो सकती है. बुजुर्गों, बच्चों और पहले से बीमार लोगों को विशेष सावधानी बरतनी होगी. अधिक तापमान की वजह से बिजली की मांग बढ़ सकती है क्योंकि लोग कूलर और एयर कंडीशनर का ज्यादा इस्तेमाल करेंगे. इसके अलावा खेतों में काम करने वाले किसानों और निर्माण कार्य से जुड़े श्रमिकों को भी कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है. मौसम विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि गर्मी वाले दिनों में पर्याप्त पानी पीना, धूप से बचना और मौसम विभाग की चेतावनियों पर ध्यान देना जरूरी होगा.

खेती पर क्या पड़ सकता है असर

भारत की खेती का बड़ा हिस्सा मानसून पर निर्भर करता है. अगर बारिश सामान्य से कम होती है तो धान, दाल, सोयाबीन, मक्का और दूसरी खरीफ फसलों पर असर पड़ सकता है. जिन क्षेत्रों में सिंचाई की व्यवस्था सीमित है, वहां किसानों को ज्यादा परेशानी हो सकती है. हालांकि जिन इलाकों में जुलाई में अच्छी बारिश हुई है, वहां शुरुआती राहत मिल सकती है. कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि किसानों को मौसम के अनुसार सिंचाई और फसल प्रबंधन की योजना बनानी चाहिए. अगर बारिश में लंबे समय तक कमी बनी रहती है तो उत्पादन पर असर पड़ सकता है. इसलिए आने वाले हफ्तों में मौसम विभाग के पूर्वानुमान किसानों के लिए काफी महत्वपूर्ण रहेंगे.

जुलाई में मौसम ने क्यों बढ़ाई चिंता

जुलाई में अच्छी बारिश के बावजूद मौसम कई वजहों से चर्चा में रहा. कई राज्यों में आंधी, बिजली गिरने और बाढ़ जैसी घटनाओं ने लोगों की जान ली. कुछ इलाकों में भारी बारिश हुई तो कई जगह बारिश की कमी बनी रही. यही कारण रहा कि पूरे देश का औसत तापमान भी सामान्य से अधिक दर्ज किया गया. दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर के कई हिस्सों में कम बारिश के कारण गर्मी का असर ज्यादा महसूस किया गया. इससे यह साफ हुआ कि केवल कुल बारिश का आंकड़ा ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि यह भी महत्वपूर्ण है कि बारिश किस क्षेत्र में और कितनी समान रूप से हुई. यही असंतुलन आगे भी चुनौती बना रह सकता है.

आगे मौसम पर किस बात की रहेगी नजर

अगस्त और सितंबर के दौरान मौसम वैज्ञानिकों की सबसे बड़ी नजर एल नीनो की स्थिति और बंगाल की खाड़ी में बनने वाले कम दबाव के क्षेत्रों पर रहेगी. यदि ऐसे सिस्टम बार-बार बनते हैं तो कुछ हद तक बारिश की कमी पूरी हो सकती है. लेकिन यदि एल नीनो लगातार मजबूत होता गया तो मानसून कमजोर पड़ सकता है. आम लोगों, किसानों और राज्य सरकारों के लिए यह समय सतर्क रहने का है. मौसम विभाग समय-समय पर नए पूर्वानुमान जारी करेगा. ऐसे में स्थानीय मौसम बुलेटिन और प्रशासन की सलाह का पालन करना जरूरी रहेगा ताकि मौसम से जुड़ी किसी भी चुनौती का समय रहते सामना किया जा सके.