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भारत के लिए आई गुड न्यूज, इस क्षेत्र में हुआ में अरबों डॉलर का इजाफा; आंकड़े देख हो जाएंगे खुश

RBI के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 682.35 अरब डॉलर पहुंच गया. जानिए यह बढ़ोतरी किन कारणों से हुई, अर्थव्यवस्था पर इसका असर और भारत के लिए यह क्यों जरूरी है.

By Gargi Santosh | Updated: August 1, 2026 10:12 PM IST

भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में बड़ा इजाफा

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के ताजा आंकड़े बताते हैं कि 24 जुलाई 2026 को खत्म हुए हफ्ते में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 6.12 अरब डॉलर बढ़कर 682.35 अरब डॉलर पहुंच गया. इससे पहले वाले सप्ताह में भी इसमें 1.08 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई थी. लगातार बढ़ते इस भंडार को भारत की अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है.

विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों ने दिखाई मजबूती

इस बढ़ोतरी के पीछे की वजह Foreign Currency Assets (FCA) रही, जो विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा होती हैं. रिपोर्टिंग सप्ताह के दौरान FCA 4.87 अरब डॉलर बढ़कर 555.93 अरब डॉलर पहुंच गई. इसमें डॉलर के अलावा यूरो, पाउंड और जापानी येन जैसी विदेशी मुद्राओं की वैल्यू में बदलाव का भी असर शामिल होता है.

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ईरान-अमेरिका जंग के वक्त आया उतार-चढ़ाव

इससे पहले 27 फरवरी 2026 को देश का विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) 728.49 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा था. इसके बाद मध्य-पूर्व में बढ़े भू-राजनीतिक तनाव और रुपये में ज्यादा उतार-चढ़ाव को रोकने के लिए RBI ने विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर की बिक्री की, जिससे रिजर्व पर कुछ दबाव देखने को मिला.

RBI और सरकार के कदमों का दिखा असर

विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत बनाने के लिए RBI और केंद्र सरकार ने हाल ही में कई बड़े फैसले लिए. इनमें FCNR(B) डिपॉजिट स्कीम के नियमों में राहत भी शामिल है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन कदमों की वजह से अब तक करीब 32 अरब डॉलर का विदेशी निवेश और फंड भारत में आया है, जिससे रिजर्व को अतिरिक्त मजबूती मिली है.

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IMF से जुड़े रिजर्व में हल्की गिरावट

हालांकि, इस दौरान IMF के स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स (SDR) में 53 मिलियन डॉलर की कमी दर्ज की गई और यह 18.62 अरब डॉलर पर आ गया. वहीं, IMF में भारत की Reserve Position भी 11 मिलियन डॉलर घटकर 4.75 अरब डॉलर रह गई. हालांकि, इन छोटी गिरावटों का कुल विदेशी मुद्रा भंडार पर बड़ा असर नहीं पड़ा.

क्यों जरूरी है बढ़ता विदेशी मुद्रा भंडार

बता दें भारत का विदेशी मुद्रा भंडार दुनिया के सबसे बड़े रिजर्व में शामिल है. यह किसी भी वैश्विक आर्थिक संकट, आयात भुगतान, रुपये की स्थिरता बनाए रखने और विदेशी निवेशकों का भरोसा मजबूत करने में बड़ा रोल निभाता है. मौजूदा बढ़ोतरी से यह संकेत मिलता है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की बाहरी आर्थिक स्थिति मजबूत बनी हुई है. (Photos from Magnific, AI)