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भारत का 'दोस्त' हो गया मालामाल! मिला सोने से भी बेशकीमती चीज का भंडार, जानिये क्या है इसका नाम

भारत के खास दोस्त के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा खनिज ढूंढ निकाला है, जो दुनिया में सबसे ज्यादा कीमती कहा जा रहा है. यह इतना अनमोल है कि इसकी कीमत सोने से भी कई गुणा ज्यादा बताई जा रही है.

By Arun Kumar | Updated: August 2, 2026 12:20 PM IST

सोने से भी महंगे मिनरल्स

तेजी से बदल रही दुनिया में अब रेअर अर्थ मिनरल्स सबसे उपयोगी माने जाने लगे हैं. दुनिया अब जमीन से मिलने वाले इन दुर्लभ तत्वों पर निर्भर होती दिख रही है. इसके चलते इनमें से कुछ खनिज तत्वों की कीमतें अब सोने से भी ज्यादा महंगी हो रही हैं. भारत के दोस्त रूस को इन तत्वों में एक ऐसा दुर्लभ पदार्थ मिल गया है, जो बहुत खास बताया जा रहा है. इस बेशकीमती चीज से वह अब और भी मालामाल हो जाएगा. (तस्वीर: AI से)

क्यों खास है रूस का खनिज 'ऐशक्रॉफ्टाइन'

रूस के वैज्ञानिकों ने दावा किया है उन्हें सोने से भी महंगा खनिज मिला है. रूस की न्यूज एजेंसी स्पुतनिक ने अपने देश के विज्ञान और हायर एजुकेशन मंत्रालय के प्रवक्ता से हुई बातचीत के आधार पर यह रिपोर्ट दी है. इस रिपोर्ट में बताया गया है कि रूसी वैज्ञानिकों को देश के कोला प्रायद्वीप पर खिबिनी मैसिफ की किरोव्स्की खादान से यह अत्यंत दुर्लभ अर्थ खनिज मिला है. कोला प्रायद्वीप से मिलने के चलते वैज्ञानिकों ने इसका नाम 'कोला ऐशक्रॉफ्टाइन' रखा है. (तस्वीर: AI से)

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विज्ञान के मुताबिक, जटिल है इस खनिज की संरचना

इस बेशकीमती मिनरल के बारे में बात करते हुए रूसी रिसर्चर्स ने बताया कि गुलाबी रंग का यह मिनरल सिर्फ एक पत्थर नहीं है बल्कि धरती की ऊपरी परत का एक केमिकल अर्काइव है. इसके एक ही क्रिस्टल में यट्रियम, सिलिकॉन, पोटैशियम, सोडियम समेत पूरी मेंडलीव टेबल मौजूद है. कोला ऐशक्रॉफ्टाइन की क्रिस्टल संरचना ऐसी है, जो विज्ञान की जानकारी में मौजूद सबसे जटिल मिनरल संरचनाओं में से एक है. इसमें मौजूद कैल्शियम, मैगनीज और फ्लोरीन का एक साथ मौजूद होना इसे विशेष बनाता है. (तस्वीर: AI से)

क्यों खास है कोला ऐशक्रॉफ्टाइन खनिज?

रूसी न्यूज एजेंसी स्पुतनिक ने इस रिपोर्ट में वैज्ञानिकों के हवाले से बताया है कि यह गुलाबी रंग का यह पारदर्शी खनिज आसानी से टूटने वाले बेहद दुर्लभ किस्म का सिलिकेट मिनरल है. इसके भंडार अभी तक ग्रीनलैंड, कनाडा और इटली में ही पाए गए हैं. वैज्ञानिक भाषा में इसे ऐशक्रॉफ्टिन-(Y) (Ashcroftine-(Y)) कहा जाता है, जिसकी गिनती दुनिया के दुर्लभ खनिजों में हैं. (तस्वीर: unsplash.com से)

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क्यों है सोने से भी महंगा?

दुनिया भर के बाजारों में सोने की कीतम ग्राम के आधार पर तय होती है, जबकि इस गुलाबी पत्थर जैसे खनिज की कीमत इसके साइज (मिलीमीटर) के आधार पर बताई जा रही है. वैसे रेअर अर्थ मिनरल्स की कीमतें भी मीट्रिक टन और किलोग्राम के आधार पर ही तय होती हैं लेकिन रूस की ओर से इस दुर्लभ मिनरल की कीमत प्रति मिलीमीटर के आधार पर 145 डॉलर बताई गई है, जो एक ग्राम सोने की कीमत से ज्यादा है. दुनिया में 1 ग्राम सोना करीब 130 डॉलर यानी (करीब 12,400 रुपये) है. इसकी तुलना में कोला ऐशक्रॉफ्टाइन 145 डॉलर मिलीमीटर के भाव के आधार पर (करीब 13,830 रुपये) का बैठता है. (तस्वीर: unsplash.com से)

क्यों इतने खास बन रहे हैं ये रेअर अर्थ मिनरल्स?

रेअर अर्थ मिनरल्स 17 रासायनिक तत्वों (केमिकल एलीमेंट्स) का एक समूह से बनते हैं, जिनमें 15 प्रकार के लैंथेनाइड्स जैसे लैंथेनम, सीरियम, नियोडाइमियम, स्कैंडियम और यत्रीयम जैसे तस्व होते हैं. ये पदार्थ आज के दौर में आधुनिक हाई टेक उपकरणों जैसे स्मार्टफोन, कम्प्यूटर, इलेक्ट्रिक वाहन, ग्रीन एनजर्जी समेत, मेडिकल उपकरणों और आधुनिक डिफेंस तकनीक जैसे मिसाइल सिस्टम और अन्य साधनों में उपयोग हो रहे हैं. (तस्वीर: AI से)

भारत भी कर रहा है ऐसे मिनरल्स की खोज

भारत भी ऐसे दुर्लभ मिनरल्स की खोज में जुट गया है. भारत सरकार ने इस साल के बजट में ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में खास रेयर अर्थ कॉरिडोर स्थापित करने की घोषणा की है. पीआईबी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इसका उद्देश्य रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट्स (REPM) की माइनिंग, प्रोसेसिंग, रिसर्च और मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना है. भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) ने देश में 482.6 मिलियन टन रेयर-अर्थ अयस्क संसाधनों की पहचान की है. (तस्वीर: PIB से)