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भारत का वो आइलैंड, जहां भारतीयों के जाने पर भी बैन, यहां घुसने का मतलब है मौत

North Sentinel Island: भारत में अंडमान निकोबार समूह का एक द्वीप है, जिस पर जाना प्रतिबंधित है. वहां कोई नहीं जा सकता. कहा जाता है कि यहां जाने का मतलब है मौत.

By Gaurav Barar | Updated: September 12, 2024 1:06 PM IST

north sentinel island: भारत में एक आइलैंड बेहद खतरनाक है. यहां जाना जानलेवा हो सकता है. भारत सरकार ने इस द्वीप पर भारतीयों समेत किसी के भी जाने पर पाबंदी लगाई हुई है. दो-तीन साल पहले एक दो विदेशी चुपचाप वहां गए तो लौटकर जिंदा नहीं आ पाए, केवल वहां से उनका शव ही लौटा.

इस द्वीप का नाम सेंटिनल आइलैंड है. आधिकारिक तौर पर भारत सरकार ने यहां किसी के भी जाने पर पाबंदी लगाई हुई है. अंडमान-निकोबार का ये द्वीप बेहद खूबसूरत है. अभी तीन साल पहले ही भारत घूमने आया एक अमेरिकी नागरिक वहां गया तो आइलैंड के लोगों ने कथित रूप से उसकी हत्या कर दी.

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यहां सेंटिनेलिस जनजातीय समुदाय के आदिवासी रहते हैं, जिन्हें बिल्कुल पसंद नहीं कि कोई वहां आए. इस जनजाति को बहुत खतरनाक माना जाता है. यहां न सरकारी अफसर जाते हैं, न ही कोई उद्योगपति, न ही आर्मी और न ही पुलिस. 

आसमान से देखने पर यह द्वीप किसी भी आम द्वीप की तरह एकदम शांत दिखने वाला, हरा भरा और खूबसूरत नजर आता है. लेकिन सेंटिनेलिस जनजातीय समुदाय के कारण ना तो पर्यटक और ना ही मछुआरे वहां जाने की हिम्मत जुटा पाते हैं.

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सेंटिनेलिस जनजातीय समुदाय का आधुनिक युग से कोई लेना- देना नहीं है. वह ना तो किसी बाहरी व्यक्ति के साथ संपर्क रखते हैं और ना ही किसी को संपर्क रखने देते हैं. जब भी उनका सामना किसी बाहरी व्यक्ति से होता है तो वे हिंसक हो उठते हैं और घातक हमले करते हैं.

साल 2006 में कुछ लोग मछुआरे गलती से इस आइलैंड पर पहुंच गए थे. इससे पहले कि वे कुछ समझ पाते, उन्हें अपनी जान गवांनी पड़ी. इस जनजाति के लोग आग के तीर चलाने में माहिर माने जाते हैं, इसलिए अपनी सीमा क्षेत्र में कम ऊंचाई पर उड़ने वाले विमानों पर भी इन गोलों से हमले करते हैं.

बंगाल की खाड़ी में बसा ये द्वीप यूं तो भारत का ही हिस्सा है. ऐसा माना जाता है कि इस द्वीप पर रहने वाली जनजाति का अस्तित्व 60,000 वर्ष पुराना है. लेकिन वर्तमान में इस जनजाति की जनसंख्या कितनी है, यह अभी तक सामने नहीं आया है. एक अनुमान के अनुसार इस जनजाति से संबंधित लोगों की संख्या कुछ दर्जन से लेकर 100-200 तक हो सकती है.

साल 2004 में आई भयंकर सूनामी के बाद अंडमान द्वीप तबाह हो गए थे. यह द्वीप भी अंडमान द्वीपों की श्रृंखला का ही हिस्सा है, लेकिन सुनामी का इस जनजाति के जीवन पर क्या प्रभाव पड़ा, ये बात भी अभी तक कोई नहीं जान पाया है.

सुनामी के बाद जब भारतीय तटरक्षक दल ने वहां जाने का प्रयास किया तो इन लोगों ने हेलिकॉप्टरों पर आगे के तीर से हमले किए, जिसके बाद वहां पहुंचने के प्रयास रोक दिए गए.

आदिवासी जनजातियों के लिए ही काम करने वाली सर्वाइवल इंटरनेशनल नामक संस्था का कहना है कि नॉर्थ सेंटिनल द्वीप पर रहने वाली जनजाति, इस ग्रह की सबसे कमजोर जनजाति है. उनके भीतर रोग प्रतिरोधक क्षमता लगभग ना के बराबर है. मामूली सी बीमारी की वजह से भी उनकी मौत हो सकती है.