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फट पड़ा भारत का इकलौता ज्वालामुखी! विस्फोट के साथ आसमान में उछलता दिखा खौलता लावा, 140 साल पहले हुआ था ऐसा

Indias Only Active Volcano: अंडमान-निकोबार का बैरन द्वीप एक बार फिर चर्चा में है. हाल ही में यहां से लावा और धुएं का गुबार आसमान की ओर उठता दिखा.

By Akarsh Shukla | Updated: September 23, 2025 10:21 PM IST

भारत का इकलौता सक्रिय ज्वालामुखी

अंडमान-निकोबार का बैरन द्वीप एक बार फिर चर्चा में है. हाल ही में यहां से लावा और धुएं का गुबार आसमान की ओर उठता दिखा. यह नजारा भले ही डराने वाला लगे, लेकिन इसकी भूगर्भीय कहानी बेहद दिलचस्प है.

इंसान या जानवर भी नहीं रहते यहां

बैरन द्वीप, हिंद महासागर में स्थित, भारत और दक्षिण एशिया का इकलौता सक्रिय ज्वालामुखी है. यह पोर्ट ब्लेयर से लगभग 135-140 किलोमीटर दूर है. यहां इंसान या जानवर नहीं रहते, सिर्फ राख और काली चट्टानें दिखाई देती हैं.

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140 साल तक रहा खामोश

यह ज्वालामुखी 1737 और 1852 में फटा था, लेकिन उसके बाद करीब 140 साल तक शांत रहा. 1991 का विस्फोट इतना बड़ा था कि वैज्ञानिकों और मीडिया ने इसे ऐतिहासिक बताया. इसके बाद 2017 और 2022 में भी धमाके दर्ज किए गए.

2024 से शुरू हुई थी हलचल

2024 के अंत तक इसमें हल्के विस्फोट देखे गए थे. अब सितंबर 2025 में दो मध्यम स्तर के विस्फोट हुए. इस बार धुआं ज्यादा और लावा कम निकला, जिससे संकेत मिलता है कि गतिविधि फिलहाल मध्यम स्तर पर है.

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कितना खतरनाक है यह ज्वालामुखी?

क्योंकि यह द्वीप निर्जन है, इसलिए इंसानी आबादी पर सीधा असर नहीं पड़ता. लेकिन समुद्री जीवन और पक्षियों की प्रजातियां इससे प्रभावित होती हैं. 1991 के विस्फोट ने पक्षियों की 16 में से 6 प्रजातियों को खत्म कर दिया था.

समुद्र और भूकंप का क्या है रिश्ता?

2005 का विस्फोट 2004 के हिंद महासागर भूकंप से जुड़ा था. यह बताता है कि ज्वालामुखी और भूकंप आपस में गहरे जुड़े होते हैं. वैज्ञानिक अब हर गतिविधि पर बारीकी से नजर रख रहे हैं.

आसमान तक उठा धुआं

पिछले बड़े विस्फोट में धुआं 2.1 किलोमीटर तक ऊपर उठ गया था. इस बार का धुआं भी साफ दिखा, लेकिन इसे मध्यम श्रेणी का माना गया. वोल्केनिक एक्सप्लोसिविटी इंडेक्स (VEI) पर यह VEI-2 स्तर का दर्ज हुआ.

क्यों फटते हैं ज्वालामुखी?

पृथ्वी के नीचे पिघली हुई चट्टान यानी मैग्मा जमा होता है. जब दबाव बढ़ता है तो यह सतह को तोड़कर बाहर निकलता है. यही प्रक्रिया विस्फोट को जन्म देती है. इसे हम धरती के "उबलते कुकर" जैसा समझ सकते हैं.

क्या भारत के लिए खतरा है?

सीधे तौर पर यह विस्फोट भारत की जनसंख्या पर असर नहीं डालता. लेकिन अगर यह बहुत बड़ा हुआ, तो समुद्री जहाजों, उड़ानों और समुद्री जीवन के लिए खतरा बन सकता है. वैज्ञानिक इसलिए लगातार इसकी मॉनिटरिंग करते हैं.

पर्यटन पर असर

बैरन द्वीप को आम नागरिकों के लिए खोलना मना है. हालांकि वैज्ञानिक और रिसर्च टीम यहां जाती हैं. पोर्ट ब्लेयर के लोकल लोग अक्सर बताते हैं कि कैसे रात के अंधेरे में भी ज्वालामुखी का लाल-सा चमकता लावा समुद्र से साफ दिखाई देता है.