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भारत का इकलौता ज्वालामुखी... जिसमें आज भी धधक रही आग, हर किसी को नहीं है जाने की इजाजत

भारत का इकलौता एक्टिव ज्वालामुखी बैरन आइलैंड आज भी एक्टिव है. जानिए यह कहां स्थित है, क्या पर्यटक यहां जा सकते हैं और कैसे पहुंच सकते हैं.

By Gargi Santosh | Updated: June 14, 2026 7:55 PM IST

भारत का इकलौता ज्वालामुखी, आज भी एक्टिव

अगर आपको लगता है कि भारत में सिर्फ पहाड़, समुद्र और जंगल हैं तो ऐसा नहीं है. दरअसल, अंडमान सागर के बीच एक जगह है, जहां आज भी ज्वालामुखी एक्टिव है.

कहां पर है ये ज्वालामुखी?

यह ज्वालामुखी अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में स्थित है और श्री विजय पुरम (पूर्व नाम पोर्ट ब्लेयर) से करीब 135 किलोमीटर दूर है. यहां कोई नहीं रहता है.

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1787 से जिंदा है ये ज्वालामुखी

इस ज्वालामुखी में पहली बार 1787 में एक्टिव हुआ था. लंबे समय तक शांत रहने के बाद, फिर यह 1991 में सक्रिय हुआ और उसके बाद से समय-समय पर इसमें विस्फोट और धुआं निकलने की घटनाएं सामने आती रही हैं.

क्या यहां पर पर्यटक आ सकते हैं?

बता दें पर्यटक यहां जा तो सकते हैं, लेकिन द्वीप पर उतरने की अनुमति नहीं है. सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए सरकार ने यहां उतरने पर पूरी तरह रोक लगा रखी है.

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यहां तक कैसे पहुंचना है

यहां पहुंचने के लिए पहले अंडमान आना पड़ता है. दिल्ली, चेन्नई, कोलकाता और बेंगलुरु से श्री विजय पुरम तक फ्लाइट उपलब्ध रहती हैं. वहां से क्रूज या प्राइवेट चार्टर बोट के जरिए ज्वालामुखी के आसपास तक जाया जा सकता है.

पानी के नीचे दिखती है दूसरी दुनिया

बैरन आइलैंड के आसपास का समुद्री इलाका समृद्ध माना जाता है. यहां रंग-बिरंगे कोरल, बड़ी समुद्री मछलियां, रीफ शार्क, ईगल रे और कई दुर्लभ समुद्री जीव देखने को मिल सकते हैं. हालांकि, तेज धाराओं के कारण यहां डाइविंग अनुभवी लोगों के लिए बेहतर मानी जाती है.

नाम बैरन, लेकिन प्रकृति से भरपूर

ज्वालामुखी के आसपास हरियाली के छोटे हिस्से भी दिखाई देते हैं और समुद्री जीवन काफी समृद्ध है. यहां जंगली बकरियों के होने की जानकारी भी सामने आ चुकी है.

घूमने का सही समय कौन-सा है?

अगर बैरन आइलैंड देखने का प्लान बना रहे हैं, तो नवंबर से अप्रैल के बीच का समय सबसे अच्छा माना जाता है. इस दौरान समुद्र अपेक्षाकृत शांत रहता है और विजिबिलिटी बेहतर मिलती है. मानसून के दौरान यहां यात्रा करना मुश्किल हो सकता है. क्योंकि ज्वालामुखी कभी भी एक्टिव हो सकता है. (Photo from Magnific, AI)