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US-चीन की दादागिरी होगी खत्म, भारत ने रूस संग मिलकर बनाया तगड़ा प्लान, क्या पड़ेगा असर
भारत और रूस क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ पर जॉइंट प्रोजेक्ट की तैयारी में हैं. पुतिन की भारत यात्रा के बाद चीन और अमेरिका को बड़ा झटका लगा है. जानें आखिर पूरा प्लान क्या है?
भारत और रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दिल्ली आए थे. इस दौरान, दोनों के बीच क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ को लेकर चर्चा हुई थी, जिसका असर अब साफ दिखने लगा है.
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रेयर अर्थ मिनरल्स कहां इस्तेमाल होते?
आपको बता दें कि रेयर अर्थ और क्रिटिकल मिनरल्स ग्रीन एनर्जी, इलेक्ट्रिक व्हीकल, पवन ऊर्जा और आधुनिक टेक्नोलॉजी के लिए बेहद जरूरी हैं. इसी वजह से दोनों देश इस सहयोग को अहम मान रहे हैं.
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संयुक्त निवेश की तैयारी
इकोनॉमिक टाइम्स (ET) की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत और रूस इन मिनरल्स की खोज, प्रोसेसिंग और रिफाइनिंग टेक्नोलॉजी में मिलकर काम करने की तैयारी कर रहे हैं.
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कई मिलियन डॉलर का निवेश
गिरेडमेट इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर आंद्रे गोलिने के अनुसार, रूस में रेयर मेटल्स और रेयर अर्थ एलिमेंट्स के विकास में भारतीय और रूसी निवेश सैकड़ों मिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है.
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रूस के पास विशाल भंडार
रूस के पास दुनिया का करीब पांचवां सबसे बड़ा रेयर अर्थ एलिमेंट भंडार है. जिसमें 29 तरह के रेयर अर्थ मेटल्स शामिल हैं, जिनका कुल अनुमानित भंडार 658 मिलियन टन बताया जाता है.
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कहां-कहां हैं ये खजाने
रूस के कोला प्रायद्वीप, याकुतिया के टॉमटोर, क्रास्नोयार्स्क क्राय और इरकुत्स्क जैसे इलाकों में रेयर अर्थ एलिमेंट्स के बड़े भंडार मौजूद हैं.
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चीन-अमेरिका को बड़ा झटका
चीन के एकाधिकार और अमेरिका द्वारा भारत को मिनरल गठबंधन से बाहर रखने के बीच भारत-रूस की यह साझेदारी दोनों देशों के लिए बड़ा झटका मानी जा रही है. इससे वैश्विक समीकरण बदल सकता. (Photos: freepik, AI)
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