Add India.com as a Preferred Source Add India.com as a Preferred Source
Advertisement

दुश्मन की बारूदी सुरंगों का अब होगा सफाया, भारतीय सेना को मिला गेम-चेंजर हथियार, टैंकों की रक्षा अब स्वदेशी!

यह सौदा रक्षा क्षेत्र में भारत की बढ़ती स्वावलंबन क्षमता का प्रतीक है, जो आधुनिक युद्ध की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार है.

By Farha Fatima | Updated: April 22, 2026 11:16 AM IST

भारतीय रक्षा क्षेत्र में मजबूती

भारतीय रक्षा क्षेत्र में एक नई मजबूती की दस्तक देते हुए बैंगलोर स्थित सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी बीईएमएल लिमिटेड को रक्षा मंत्रालय से करीब ₹590 करोड़ का बड़ा ऑर्डर मिला है.

युद्धक टैंक टी-72 और टी-90

BEML की आधिकारिक घोषणा के मुताबिक यह कॉन्ट्रेक्ट भारतीय सेना के मुख्य युद्धक टैंकों टी-72 और टी-90 के लिए अत्याधुनिक ट्रॉल असेंबली (माइन ट्रॉल सिस्टम) की आपूर्ति का है, जो युद्धक्षेत्र में दुश्मन द्वारा बिछाई गई बारूदी सुरंगों को तेजी से साफ करने में सक्षम है.

Advertisement

यह सौदा पूरी तरह स्वदेशी तकनीक पर आधारित

टाइम्स की खबर के मुताबिक यह सौदा पूरी तरह स्वदेशी तकनीक पर आधारित है. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की पुणे स्थित आरएंडडी इंजीनियर्स शाखा ने इन उन्नत माइन ट्रॉल्स को डिजाइन और विकसित किया है.

विदेशी आयात पर निर्भरता कम

बीईएमएल ने डीआरडीओ के साथ मिलकर इसे उत्पादन के स्तर पर लाया है, जिससे विदेशी आयात पर निर्भरता कम हो रही है और आत्मनिर्भर भारत का लक्ष्य मजबूत हो रहा है.

Advertisement

बख्तरबंद वाहनों के लिए सुरक्षित मार्ग तैयार करता है

CNBC-TV18 के मुताबिक, ट्रॉल असेंबली टैंकों के आगे लगाई जाती है. इसमें बहुस्तरीय माइन-क्लियरिंग मैकेनिज्म लगा होता है, जो सुरंगों को सक्रिय कर या हटाकर बख्तरबंद वाहनों के लिए सुरक्षित मार्ग तैयार करता है. इससे युद्ध में सेना की गतिशीलता बढ़ती है, टैंकों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है और आक्रामक अभियानों में निर्णायक बढ़त मिलती है.

रक्षा सचिव की मौजूदगी में सौदा हुआ

नई दिल्ली में आयोजित एक औपचारिक समारोह में रक्षा मंत्रालय और बीईएमएल के अधिकारियों ने इस अनुबंध पर हस्ताक्षर किए. रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की मौजूदगी में सौदा हुआ.

यह सौदा लगभग ₹975 करोड़ का

कुल मिलाकर यह सौदा लगभग ₹975 करोड़ का है, जिसमें बीईएमएल को ₹590 करोड़ का हिस्सा मिला है.बीईएमएल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक शांतनु रॉय ने कहा कि यह ऑर्डर कंपनी की क्षमता और गुणवत्ता पर सरकार के विश्वास को दर्शाता है. उन्होंने डीआरडीओ के साथ सहयोग को भारत के रक्षा अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र की ताकत बताया और ‘मेक इन इंडिया’ पहल के प्रति कंपनी की प्रतिबद्धता दोहराई.

बीईएमएल रक्षा मंत्रालय के अधीन कार्यरत

बीईएमएल रक्षा मंत्रालय के अधीन कार्यरत है और छह दशकों से अधिक अनुभव के साथ रक्षा, एयरोस्पेस, रेलवे, खनन तथा निर्माण क्षेत्रों में योगदान दे रही है. कंपनी की आधुनिक उत्पादन इकाइयां बेंगलुरु, मैसूर, केजीएफ और पलक्कड़ में स्थित हैं.

सेना की युद्धक तैयारियों को नई ऊंचाई देगा

यह विकास भारतीय सेना की युद्धक तैयारियों को नई ऊंचाई देगा. माइनफील्ड ब्रिचिंग क्षमता में सुधार से मैकेनाइज्ड फोर्सेज की लड़ाकू प्रभावशीलता बढ़ेगी. साथ ही, स्वदेशी उत्पादन से अर्थव्यवस्था को भी बल मिलेगा और रोजगार के अवसर सृजित होंगे.