यूनेस्को से मिली खास पहचान
जेजू द्वीप को UNESCO ने बायोस्फीयर रिजर्व, ग्लोबल जियोपार्क और वर्ल्ड हेरिटेज साइट का दर्जा दिया है. यहां की लावा ट्यूब और प्राकृतिक संरचनाएं इसे दुनियाभर में अनोखा बनाती हैं.
By Tanuja Joshi | Updated: February 26, 2026 7:46 PM IST
जेजू द्वीप को UNESCO ने बायोस्फीयर रिजर्व, ग्लोबल जियोपार्क और वर्ल्ड हेरिटेज साइट का दर्जा दिया है. यहां की लावा ट्यूब और प्राकृतिक संरचनाएं इसे दुनियाभर में अनोखा बनाती हैं.
द्वीप के केंद्र में स्थित Hallasan National Park का माउंट हाल्ला समुद्र तल से करीब 1,950 मीटर ऊंचा है. ये दक्षिण कोरिया की सबसे ऊंची चोटी है और यहां कई दुर्लभ वनस्पतियां पाई जाती हैं.
जेजू द्वीप पर कई लुप्तप्राय प्रजातियां मिलती हैं, जिनमें तेंदुआ बिल्ली और हरे समुद्री कछुए शामिल हैं. यहां का अनोखा इकोसिस्टम ग्लोबल वार्मिंग के दौर में संरक्षण के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है.
जेजू की ‘हेन्यो’ यानी समुद्री महिलाएं बिना ऑक्सीजन सिलेंडर के समुद्र में गोता लगाकर सीफूड इकट्ठा करती हैं. सदियों पुरानी यह परंपरा आज खत्म होने के कगार पर है क्योंकि नई पीढ़ी इसमें रुचि नहीं ले रही.
जेजू में भारतीयों को सीमित समय के लिए वीजा फ्री एंट्री मिलती है, लेकिन यह केवल पर्यटन के लिए है. एंट्री की अंतिम मंजूरी इमिग्रेशन अधिकारी देते हैं, और वीजा फ्री का मतलब गारंटीड एंट्री नहीं है.
वीजा फ्री स्कीम के तहत जेजू से साउथ कोरिया की मुख्य भूमि पर जाना अवैध है. ऐसा करने पर जुर्माना, हिरासत या भविष्य में यात्रा प्रतिबंध लगाया जा सकता है.
सियोल स्थित भारतीय दूतावास ने यात्रियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि यात्रा से पहले नियमों को अच्छी तरह समझें. इमिग्रेशन के फैसले को बदला नहीं जा सकता, इसलिए दस्तावेज और टिकट पूरी तरह सही रखें.