By Tanuja Joshi | Updated: May 31, 2026 6:10 PM IST
कैस्पियन सागर किसी महासागर से नहीं जुड़ा है। यह एक बंद जलक्षेत्र है, जहां केवल आसपास के पांच देशों का प्रभाव चलता है. इसी वजह से अमेरिका जैसी बाहरी नौसैनिक ताकतों के लिए यहां सीधे ऑपरेशन करना आसान नहीं माना जाता.
ईरान की उत्तरी नौसेना का मुख्यालय बंदर अंजली में स्थित है. यहां से समुद्री गतिविधियों की निगरानी, प्रशिक्षण कार्यक्रम और सुरक्षा अभियानों को संचालित किया जाता है. ये ठिकाना लंबे समय से ईरान की उत्तरी रक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण केंद्र बना हुआ है.
संख्या में सीमित होने के बावजूद यह नौसेना आधुनिक जहाजों, मिसाइल लैस तेज नौकाओं और गश्ती पोतों से सुसज्जित है. इनका मुख्य उद्देश्य दुश्मन को चुनौती देना नहीं बल्कि समुद्री सुरक्षा और तटीय रक्षा को मजबूत बनाए रखना है.
पिछले कुछ वर्षों में रूस और ईरान ने कैस्पियन क्षेत्र में कई संयुक्त नौसैनिक अभ्यास किए हैं. इन अभ्यासों ने दोनों देशों के बीच सैन्य तालमेल बढ़ाया है और क्षेत्र में उनके रणनीतिक संबंधों को और मजबूत बनाया है.
दक्षिणी क्षेत्रों में बढ़ते खतरे के बीच कैस्पियन सागर का मार्ग ईरान के लिए महत्वपूर्ण साबित हुआ. इस रास्ते से व्यापारिक और तकनीकी सहयोग जारी रहने की वजह से ईरान को अपने संसाधनों और क्षमताओं को बनाए रखने में मदद मिली.
कैस्पियन सागर के किनारे रूस, ईरान, कजाकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और अजरबैजान स्थित हैं. इन देशों के बीच बने नियम इस क्षेत्र को खास बनाते हैं. बाहरी हस्तक्षेप पर सीमाएं होने से यहां की सुरक्षा व्यवस्था अलग तरह से काम करती है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी नौसेना को लेकर कई तीखे बयान दिए हैं. हालांकि, एक्सपर्ट्स का मानना है कि दक्षिणी बेड़े को नुकसान पहुंचने के बावजूद ईरान की उत्तरी नौसैनिक क्षमता अब भी सक्रिय है और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बनी हुई है.