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भारत की सबसे बड़ी टेंशन खत्म! अब होर्मुज से टैंकर भर-भरके तेल आएगा, मुश्किल में काम आया ये देश

Iran-Oman Agreement: ईरान और ओमान के बीच होर्मुज को लेकर समझौते की बातचीत अंतिम चरण में है. जानिए इससे भारत, तेल सप्लाई और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर क्या असर पड़ेगा.

By Gargi Santosh | Updated: August 4, 2026 10:56 PM IST

होर्मुज पर सुलझने लगी दुनिया की सबसे बड़ी लड़ाई

अमेरिका-ईरान युद्ध के चलते सबसे ज्यादा चर्चा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को लेकर हो रही है. आपको बता दें दुनिया का करीब 20% तेल और गैस का कारोबार इसी समुद्री रास्ते से होता है. लंबे समय से इसे लेकर अमेरिका और ईरान के बीच टकराव बना हुआ है. अब इस विवाद को सुलझाने में ओमान बड़ा रोल निभाता नजर आ रहा है.

ईरान-ओमान के बीच जल्द बनेगी सहमति

ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने बताया कि होर्मुज को लेकर ईरान और ओमान के बीच बातचीत अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी है. समाचार एजेंसी IRNA के मुताबिक, दोनों देशों के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी है और जल्द ही किसी समझौते पर सहमति बन सकती है. अगर ऐसा होता है, तो खाड़ी क्षेत्र के साथ-साथ एशिया के कई देशों को बड़ी राहत मिलेगी.

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क्या प्लान कर रहा ओमान?

ईरान और ओमान 'ट्रैफिक सेपरेशन स्कीम' के तहत जहाजों के लिए नया समुद्री मार्ग तय करने पर काम कर रहे हैं. इस व्यवस्था का मकसद दोनों देशों के संप्रभु अधिकारों, ईरान की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी के हितों के बीच बैलेंस बनाना है. ईरानी विदेश मंत्रालय ने साफ किया कि यह बातचीत होर्मुज को बंद या खोलने के बारे में नहीं, बल्कि सुरक्षित और व्यवस्थित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए है.

ईरान का अमेरिका से तनाव अब भी बरकरार

भले ही होर्मुज को लेकर बातचीत आगे बढ़ रही हो, लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. ईरान के कार्यवाहक रक्षा मंत्री सैयद माजिद एब्न अल-रेजा ने कहा कि उनका देश अमेरिका की हर धमकी को गंभीरता से लेता है और हर स्थिति का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है. उन्होंने कहा कि ईरान किसी भी खतरे को नजरअंदाज नहीं करेगा, बल्कि अपनी सैन्य तैयारी और प्रतिरोधक क्षमता को लगातार मजबूत करता रहेगा.

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ट्रंप के फैसले के बाद बढ़ी उम्मीद

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) द्वारा ईरान पर नए हमले फिलहाल टालने के फैसले के बाद क्षेत्र में तनाव कुछ कम हुआ है. इसके बाद ईरान-ओमान वार्ता में भी तेजी आई है. माना जा रहा है कि अगर दोनों देशों के बीच समझौता हो जाता है, तो होर्मुज को लेकर लंबे समय से चली आ रही अनिश्चितता काफी हद तक खत्म हो सकती है.

ईरान की मांग पर ओमान ने क्या कहा?

ईरान पहले चाहता था कि होर्मुज का प्रबंधन ओमान के साथ मिलकर किया जाए और वहां से गुजरने वाले जहाजों से सेवा शुल्क लिया जाए. उस समय ओमान इस प्रस्ताव के खिलाफ था और अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग में मुफ्त आवाजाही का समर्थन कर रहा था. अब ओमान के नए प्रस्ताव में भी सेवा शुल्क का विकल्प रखा गया है, लेकिन इसे पूरी तरह स्वैच्छिक (Voluntary) बताया गया है, यानी किसी जहाज पर इसे अनिवार्य नहीं किया जाएगा.

भारत को कैसे मिलेगा फायदा

अगर ओमान के प्रस्ताव पर सहमति बन जाती है, तो होर्मुज पर दोनों देश मिलकर व्यवस्था संभालेंगे. भारत के ओमान के साथ लंबे समय से मजबूत और भरोसेमंद रिश्ते हैं. ऐसे में भारतीय तेल और गैस के टैंकरों की आवाजाही पहले के मुकाबले ज्यादा सुरक्षित और आसान हो सकती है. इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और तेल सप्लाई बाधित होने का खतरा भी कम होगा.

तेल सप्लाई आसान हुई, तो राहत मिलेगी

भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल का आयात करता है और उसका बड़ा भाग होर्मुज से होकर आता है. अगर इस समुद्री मार्ग पर स्थायी और सुरक्षित व्यवस्था लागू हो जाती है, तो तेल सप्लाई सामान्य रहने की उम्मीद बढ़ेगी. इससे सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि एशिया के कई देशों को राहत मिलेगी और वैश्विक ऊर्जा बाजार में भी स्थिरता आने की संभावना है. (Photos from IANS, AI)