Isro Cms 03 Heavy Satellite Mission India Navy Power Will Boost 8152590
ISRO के मिशन उड़ा दी चीन की नींद! पहली बार होने जा रहा ये काम, नौसेना को मिलेगी नई ताकत
भारत के Indian Space Research Organisation (ISRO) द्वारा 2 नवंबर को एक मिशन लॉन्च किया जाएगा. इससे नौसेना की समुद्री निगरानी क्षमता को नई ऊंचाई पर ले जाया जाएगा. आइए जानते हैं इसके बारे में...
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) अब एक नए मिशन पर काम कर रहा है. 2 नवंबर को भारत के इतिहास की सबसे भारी सैटेलाइट CMS-03 (GSAT-7R) लॉन्च की जाएगी, जिसका वजन लगभग 4400 किलोग्राम है.
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क्या है ISRO के इस मिशन का मकसद?
इस सैटेलाइट का मुख्य उद्देश्य भारतीय नौसेना की कम्युनिकेशन क्षमता और समुद्री निगरानी को मजबूत बनाना है. इसके जरिए समुद्र में चीन और पाकिस्तान जैसे देशों की गतिविधियों पर पैनी नजर रखी जाएगी.
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वही रॉकेट जो चंद्रयान-3 को लेकर गया था
CMS-03 को LVM-3 रॉकेट के जरिए लॉन्च किया जाएगा. यह वही शक्तिशाली रॉकेट है जिसने चंद्रयान-3 को सफलतापूर्वक चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचाया था. यह रॉकेट अब भारत की भारी लॉन्च क्षमता को एक नया मुकाम देने जा रहा है.
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सतीश धवन स्पेस सेंटर से होगा लॉन्च
लॉन्च की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं. इसरो ने रॉकेट को 26 अक्टूबर को सतीश धवन स्पेस सेंटर (SDSC), श्रीहरिकोटा के लॉन्च पैड पर पहुंचा दिया था. अब सिर्फ गिनती के घंटे बचे हैं जब यह रॉकेट अंतरिक्ष की ओर उड़ान भरेगा.
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CMS-03 की तकनीकी खासियत
ISRO के मुताबिक, यह सैटेलाइट एक मल्टी-बैंड कम्युनिकेशन सैटेलाइट है. यह जियो-सिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (GTO) में स्थापित होगी और भारतीय उपमहाद्वीप के साथ-साथ पूरे समुद्री इलाके में नेटवर्क कवरेज देगी.
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GSAT-7R नाम से भी जानी जाती है ये सैटेलाइट
CMS-03 को तकनीकी तौर पर GSAT-7R कहा जाता है. यह सैटेलाइट भारत की उस शृंखला का हिस्सा है जो नौसेना के लिए सुरक्षित कम्युनिकेशन और डेटा लिंक प्रदान करती है. इससे जहाज, एयरबेस और कमांड सेंटर एक-दूसरे से रियल-टाइम में जुड़े रहेंगे.
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चीन-पाकिस्तान की निगरानी में बड़ी मदद
CMS-03 की सबसे बड़ी ताकत इसकी मैरिटाइम सर्विलांस क्षमता है. यह सैटेलाइट हिंद महासागर, अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में दुश्मन की हर गतिविधि पर नजर रखेगी. इससे भारतीय नौसेना को रणनीतिक बढ़त मिलेगी.
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साइक्लोन से टल सकती थी लॉन्च डेट
पहले साइक्लोन की वजह से लॉन्च डेट पर संशय बना हुआ था, लेकिन अब मौसम विभाग ने बताया कि साइक्लोन का रास्ता बदल गया है. इसलिए 2 नवंबर की तय तारीख पर लॉन्च होना लगभग तय है - जो देश के लिए बड़ी राहत की खबर है.
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आत्मनिर्भर भारत अभियान में मिलेगी मदद
CMS-03 मिशन भारत के आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया की दिशा में एक मजबूत कदम है. इससे भारतीय सेना को विदेशी उपग्रह सेवाओं पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा और सुरक्षा डेटा देश के भीतर ही सुरक्षित रहेगा.
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भारत की स्पेस पावर को मिलेगी नई पहचान
CMS-03 की सफल लॉन्चिंग के बाद भारत न केवल एशिया की सबसे बड़ी स्पेस ताकतों में शामिल होगा, बल्कि यह दुनिया को यह संदेश भी देगा कि भारत अब अंतरिक्ष तकनीक में किसी से पीछे नहीं है. (Photos: freepik, AI)
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