Add India.com as a Preferred Source Add India.com as a Preferred Source
Advertisement

न डीजल-CNG का झंझट, न प्रदूषण का डर! दिल्ली को मिल गई हाइड्रोजन बसें, अब और ग्रीन होगा अपना इंडिया

पर्यावरण की सुरक्षा और पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता कम करने की दिशा में सरकार गंभीर है और इस कड़ी में दिल्ली को ईको-फ्रेंडली हाइड्रोजन बसें मिल गई हैं. जल्दी ही यह शहर में नई क्रांति ला देंगी...

By Arun Kumar | Updated: May 21, 2026 4:18 PM IST

कच्चे तेल के विकल्प ढूंढ चुकी है दुनिया

ईरान युद्ध के चलते दुनिया भर में छाए कच्चे तेल के संकट से पूरी दुनिया हिल गई है. दुनिया के सभी बड़े देश ऐसे खतरों के प्रति पहले से जागरूक थे और उन्होंने अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए कच्चे तेल या जीवाश्म ईंधन के विकल्प तलाशना बहुत पहले से ही शुरू कर दिए थे. इसके लिए दूसरे देशों पर भी निर्भर रहना पड़ता है और यह पर्यावरण के नजरिए से महंगा सौदा है, जो प्रदूषण का अहम कारक बनकर उसे नुकसान पहुंचाता है.

EV और हाइड्रोजन ईंधन का बढ़ने लगा है प्रयोग

इंजीनियरिंग की दुनिया में जुटे हुए एक्सपर्ट्स ने पहले से ही पर्यावरण को लेकर ईको-फ्रेंडली विकल्प तलाशना शुरू कर दिया था, जो जीवाश्म ईंधन पर से निर्भरता खत्म करे. इसी का नतीजा है कि दुनिया भर में अब EV व्हीकल्स का प्रभाव बढ़ रहा है. इसके अलावा अब हाइड्रोजन को भी नए ईंधन के तौर पर पुश किया जा रहा है. दुनिया के कई देशों में हाइड्रोजन बसें इस्तेमाल में आ चुकी हैं.

Advertisement

भारत में भी होने लगा है हाइड्रोजन वाहनों का इस्तेमाल

भारत भी इससे अछूता नहीं है. राजधानी दिल्ली को भी इस दिशा में मौका मिल गया है और इसी महीने उसे दो हाइड्रोजन बसें मिली हैं, जो यात्रियों को लेकर आएंगी और जाएंगी. फिलहाल इन बसों को मेट्रो फीडर बसों के तौर पर चलाया जा रहा है और ये बसें अभी सेंट्रल विस्ता में के आसपास ही चलेंगी.दिल्ली को अभी हाइड्रोजन ईंधन से चलने वाली दो ही बसे मिली हैं, जो सेंट्रल सेक्रेटेरिएट के आसपास चलेंगी. अगर यह ट्रायल सफल होता है तो फिर सुनियोजित क्रम में शहर भर में और देश भर इन बसों को डीजल और सीएनजी बसों से बदला जाएगा.

लद्दाख में पहले से चल रही हैं हाइड्रोजन बसें

इससे पहले नेशनल ग्रीन हाईड्रोजन मिशन के तहत हाईड्रोजन बसों को सबसे पहले लद्दाख में चलाया गया. यहां इन बसों का संचालन नेशनल थर्मल पावर कॉर्पोरेशन (NTPC) करता है. ये बसें सिर्फ 25kg हाईड्रोजन गैस में 300 किलोमीटर तक चलती हैं.

Advertisement

कैसे काम करती है हाइड्रोजन तकनीक

बता दें ये बसें हाइड्रोजन गैस फ्यूल सेल टेक्नोलॉजी पर आधारित हैं. इन बसों में फ्यूल टैंक को बस की छत पर सेट किया गया है, जहां रखे हाई प्रेशर टैंकों में हाइड्रोजन भरी जाती है और एक खास पाइप के जरिए इस गैस को फ्यूल सेल स्टेक तक लाया जा सकता है. यहां से सेल स्टेक बाहर के वातावरण से ऑक्सीजन लेकर केमिकल रिएक्शन करते हैं, जिससे बिजली बनती है और यह बिजली बस की इलेक्ट्रिक मोटर को चलाती है.

100% प्रदूषण मुक्त हैं ये बसें

इस फ्यूल की सबसे खास बात यह है कि यह रिएक्शन से बिजली तो बनाता है लेकिन इससे किसी भी प्रकार की धुआं या जहरीली गैस नहीं निलकती है. इससे जो एमीशन (उत्सर्जन) होता भी है वह पानी से बनी भाप का होता है, जो पर्यावरण के लिए अनुकूल है.

20 से ज्यादा देशों में चलती हैं हाइड्रोजन बसें

बता दें इस टेक्नोलॉजी पर आधारित वाहनों में भारत ने तो अभी शुरुआत की ही है. दुनिया के करीब 20 देशों में हाइड्रोजन से चलने वाली बसे और अन्य वाहन प्रयोग में लाए जा चुके हैं. हाइड्रोजन बसों के प्रयोग में चीन सबसे आगे है. दुनिया में अभी इस्तेमाल हो रहीं कुल हाइड्रोजन बसों का 80 फीसदी इस्तेमाल यहीं होता है. इसके अलावा साउथ कोरिया, जापान, जर्मनी, ब्रिटेन, स्पेन, नीदरलैंड्स और अमेरिका समेत दुनिया के कई देशों में इस ईंधन की बसें चल रही हैं.