Oxford University Press Apologizes For 23 Year Old Book Know Maratha Controversy 8260641
23 साल पुरानी किताब पर Oxford Press की माफी! शिवाजी महाराज को लेकर क्या है मराठा विवाद, जिसने मचाया था हंगामा?
यह विवाद 23 साल पहले पब्लिश ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस की एक किताब से जुड़ा है, जिसमें छत्रपति शिवाजी महाराज को लेकर इस्तेमाल की गई कुछ शब्दावली और संदर्भों पर मराठा संगठनों ने कड़ा विरोध जताया था. आरोप था कि किताब में शिवाजी महाराज की छवि को गलत, अपमानजनक और ऐतिहासिक तथ्यों से परे दिखाया गया है.
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस ने 2003 में प्रकाशित एक विवादित किताब को लेकर सार्वजनिक रूप से माफी मांगी. यह माफी बॉम्बे हाई कोर्ट की कोल्हापुर पीठ के निर्देश पर दी गई, जिसने मामले को ऐतिहासिक मोड़ दे दिया.
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किसे दी गई माफी और क्यों अहम है कदम
OUP ने यह माफी छत्रपति शिवाजी महाराज के 13वें वंशज उदयनराजे भोसले को दी. मराठा समाज के लिए यह सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि सम्मान और अस्मिता से जुड़ा मामला माना जा रहा है.
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कौन-सी किताब बनी विवाद की जड़
पूरा विवाद अमेरिकी इतिहासकार जेम्स लेन की किताब 'Shivaji: Hindu King in Islamic India' से जुड़ा है, जिसमें शिवाजी महाराज के जीवन और वंशावली पर की गई कुछ टिप्पणियों को आपत्तिजनक बताया गया.
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किताब पर क्या थे मुख्य आरोप
मराठा संगठनों का आरोप था कि किताब में शिवाजी महाराज को लेकर ऐसे संदर्भ और शब्दों का इस्तेमाल किया गया, जो न तो ऐतिहासिक रूप से प्रमाणित थे और न ही सम्मानजनक.
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OUP ने माफी में क्या स्वीकार किया
6 जनवरी को जारी माफी में OUP ने माना कि किताब के कुछ पन्नों पर दिए गए कथन ठीक से वेरिफाई नहीं किए गए थे और इससे लोगों को मानसिक पीड़ा पहुंची, जिसके लिए वह क्षमाप्रार्थी है.
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विवाद का हिंसक रूप और BORI हमला
2004 में इस विवाद ने हिंसक रूप ले लिया, जब पुणे के भंडारकर ओरिएंटल रिसर्च इंस्टीट्यूट पर हमला हुआ. प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि संस्थान ने विवादित शोध में सहयोग किया.
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महाराष्ट्र सरकार का सख्त फैसला
लगातार विरोध और कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने इस किताब पर प्रतिबंध लगा दिया, जिससे यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया.
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लेखक जेम्स लेन की सफाई और माफी
विवाद बढ़ने पर लेखक जेम्स लेन ने भी माफी मांगते हुए कहा कि उनका उद्देश्य कभी शिवाजी महाराज को बदनाम करना नहीं था और उन्हें इस बात का गहरा दुख है कि किताब से लोगों की भावनाएं आहत हुईं.
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