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भारत में 1950 के दशक में कितने रुपये लीटर था पेट्रोल, सोच से भी कम निकला डीजल का दाम

आज देश के अलग-अलग राज्यों में पेट्रोल के दाम 100 रुपये प्रति लीटर के आसपास है. कहीं-कहीं दाम इससे भी ज्यादा है. इसी तरह डीजल के दाम भी आसमान छू रहे हैं. मगर जानते हैं 1950 के दशक में भारत में पेट्रोल और डीजल कितने रुपये लीटर मिलता था. आज इस सवाल का जवाब सुनकर सचमुच आपका दिमाग चकरा जाएगा.

By Ikramuddin | Updated: August 5, 2026 4:27 PM IST

पेट्रोल-डीजल का दाम

भारत के अलग-अलग राज्यों में पेट्रोल और डीजल का दाम अभी 100 रुपये के आसपास है. कहीं-कहीं दाम 100 रुपये के पार भी पहुंच चुका है. मगर दिमाग में कभी सवाल आया है दशकों पहले भारत में पेट्रोल और डीजल का दाम क्या था. तब देश में तेल कितने रुपये लीटर मिलता होगा? सवाल दिमाग में जरूर आया होगा. मगर इस का जवाब आज आपकी उम्मीद से बहुत अलग मिलने वाला है. जानकर हैरानी होगी कि साल 1950 के आसपास भारत में पेट्रोल का दाम महज 30 से 40 पैसे के आसपास रहता था. यानी वाहन चालकों को एक लीटर पेट्रोल के बदले सिर्फ 40 पैसे तक चुकाने पड़ते थे.

1950 के दशक में डीजल का दाम

जानकर हैरानी होगी तब देश में डीजल का दाम भी खूब सस्ता था. यानी देश में तब डीजल 20 से 30 पैसे प्रति लीटर की दर से बेचा जाता था. अलग-अलग रिपोर्ट में बताया गया कि साल 1947 के आसपास देश में पेट्रोल का दाम 27 पैसे प्रति लीटर के करीब था. इसी तरह पेट्रोल का दाम भी 15 से 20 प्रति लीटर के आसपास था. मतलब साफ है कि 1950 के दशक में भी भारत में ईंधन बेहद सस्ता था. क्योंकि उस समय सरकार प्राइस कंट्रोल सिस्टम यानी नियंत्रित मूल्य प्रणाली के तहत दाम तय करती थी. इन ऐतिहासिक आंकड़ों का जिक्र सरकारी दस्तावेजों, संसद में दिए गए जवाबों और पेट्रोलियम क्षेत्र से जुड़े रिकॉर्ड में मिलता है.

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तब इतना सस्ता कैसा था पेट्रोल

1950 के दशक में भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें सरकार तय करती थी. इसे बाद में Administered Pricing Mechanism (APM) के नाम से जाना गया. दरअसल उस समय अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के दाम का सीधा असर आम लोगों तक नहीं पहुंचता था. टैक्स भी आज के मुकाबले काफी कम था, इसलिए पेट्रोल और डीजल की कीमतें बेहद कम बनी रहीं.

समय के साथ कैसे बढ़े दाम?

सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक 1989 में दिल्ली में पेट्रोल 8.50 रुपये और डीजल 3.50 रुपये प्रति लीटर था. इसके बाद 1990 के दशक, 2000 और फिर 2010 के बाद कीमतों में तेजी से बदलाव देखने को मिला. जून 2010 से पेट्रोल और अक्टूबर 2014 से डीजल की कीमतें बाजार आधारित व्यवस्था के तहत तय होने लगीं.

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आज कैसे तय होती हैं कीमतें

आज सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां यानी OMCs अंतरराष्ट्रीय बाजार में तैयार पेट्रोलियम उत्पादों की कीमत, कच्चे तेल के भाव, डॉलर-रुपया विनिमय दर, फ्रेट, रिफाइनिंग लागत और केंद्र व राज्य सरकारों के टैक्स को ध्यान में रखकर रोजाना कीमत तय करती हैं. इसलिए अब ईंधन के दाम बाजार के हिसाब से बदलते रहते हैं.

एक लीटर तेल में खर्च

एक लीटर पेट्रोल या डीजल की कीमत में केवल कच्चे तेल की लागत ही शामिल नहीं होती. इसमें रिफाइनिंग खर्च, परिवहन लागत, डीलर कमीशन, केंद्र सरकार की एक्साइज ड्यूटी और राज्य सरकार का वैट भी जुड़ता है. यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल सस्ता होने पर भी खुदरा कीमतों में हमेशा उसी अनुपात में कमी नहीं आती.

कैसे देखें पेट्रोल-डीजल के आधिकारिक दाम

अगर आप पेट्रोल और डीजल के पुराने या मौजूदा दाम की आधिकारिक जानकारी देखना चाहते हैं, तो पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) की वेबसाइट सबसे भरोसेमंद सोर्स मानी जाती है. यहां अलग-अलग समय के खुदरा ईंधन मूल्य, कच्चे तेल की कीमत और पेट्रोलियम क्षेत्र से जुड़े कई ऐतिहासिक आंकड़े उपलब्ध हैं. वहीं सरकार समय-समय पर संसद और प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) के माध्यम से भी ईंधन कीमतों से जुड़ी जानकारी जारी करती है.