एकांतिक वार्तालाप के दौरान प्रेमानंद महाराज से एक भक्त ने पूछा कि, भगवान तो अंतर्यामी हैं, फिर हमें उनको अपनी कामनाएं उन्हें बतानी चाहिए या नहीं?
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प्रेमानंद महाराज प्रवचन...
जवाब में प्रेमानंद महाराज ने कहा कि यदि आपको अंतर्यामी में विश्वास है तो कामना या मांग की बात आनी ही नहीं चाहिए. वो अंतर्यामी हैं, उन्हें पहले से सब पता है तो न मुझे मांगना है न ही कामना करनी है.
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आगे प्रेमानंद महाराज ने कहा कि, यदि आपको अंतर्यामी पर उच्च कोटि का विश्वास नहीं है तो फिर मांगना भी चाहिए. हम किससे मांगेंगे? अगर हमें मांगना ही है तो सिर्फ भगवान से मांगें किसी और से नहीं.
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प्रेमानंद महाराज ने कहा कि अगर सच्चे मन से मांगा जाए तो भगवान हमारी मांग पूरी कर देंगे. जो भगवान से धन या वैभव प्राप्ति के लिए भजन करता है, उसकी कामना भी भगवान पूरी कर देते हैं.
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प्रेमानंद महाराज प्रवचन...
प्रेमानंद महाराज ने बताया कि भक्त चार प्रकार के होते हैं. पहला- आर्त्र भक्त- जो संकट निवृत्ति के लिए भगवान का भजन करता है. दूसरा- अर्थात्री भक्त- भगवान से धन प्राप्ति के लिए भजन करता है.
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प्रेमानंद महाराज प्रवचन...
तीसरा होता है, जिज्ञासु भक्त जो भगवान से भगवान को जानना चाहता है. चौथा, ज्ञानी भक्त- जो खुद भगवत स्वरूप हो गया है. प्रेमानंद महाराज ने अगर हम धन भी चाहें तो केवल भगवान से चाहें.
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प्रेमानंद महाराज प्रवचन...
प्रेमानंद महाराज ने कहा कि भगवान तृप्त क देंगे. या तो ऐसा ज्ञान दे देंगे कि अर्थ की तरफ चाह नहीं रह जाएगी. या फिर ऐसा विधान बना देंगे कि जो चाह है अर्थ कि वो शांत हो जाएगी. लेकिन, अगर दृढ़ विश्वास है कि भगवान अंतर्यामी हैं तो मांगने की जरूरत नहीं है.
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