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Ramayan facts: न पेट्रोल, न गैस! फिर पुष्पक विमान, किस ईंधन से चलता था? कल्पना से परे मिला जवाब

Ramayan facts: आज जब पूरी दुनिया में गैस, पैट्रोल, तेल के लिए आपाधापी मची है. ईंधन को पाने के लिए जंग छिड़ी है तो इसी बीच हमें याद आता पौराणिक काल का वो पुष्पक विमान जो आज भी लोगों के लिए सवाल बना हुआ है. बड़े-बड़े वैज्ञानिकों माथा चकरा गया है ये सोच कर कि आखिर बिना ईंधन पुष्पक विमान चलता कैसे था?

By Neha Awasthi | Updated: April 21, 2026 5:37 PM IST

न पेट्रोल, न गैस! फिर पुष्पक विमान किस ईंधन से चलता था?

क्या पुष्पक विमान किसी आधुनिक तकनीक से लैस था? जानें रामायण काल के इस दिव्य विमान के संचालन का वह रहस्य, जो आज के विज्ञान की कल्पना से भी परे है.

आधुनिक विज्ञान को चुनौती

आज के विमान पेट्रोल या सीएनजी से उड़ते हैं, लेकिन त्रेतायुग का पुष्पक विमान किसी भौतिक ईंधन पर निर्भर नहीं था. तो फिर पुष्पक विमान को चलाने के पीछे कौन सी शक्ति और उर्जा काम करती थी ये सवाल आज भी कौतूहल का विषय बना हुआ है.

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मन की असीमित गति

पुष्पक विमान की सबसे बड़ी शक्ति इच्छा शक्ति थी. इसका संचालन रहस्यमयी और पूर्णतः दिव्य शक्तियों पर आधारित था. शास्त्रों के अनुसार, यह कामगामी था, जो चालक के मन की गति से उड़ता था. जैसा चालक सोचता, विमान वैसे ही मुड़ जाता.

मंत्रों की अदृश्य ऊर्जा

इस दिव्य विमान का नियंत्रण विशिष्ट मंत्रों द्वारा होता था. चालक की संकल्प शक्ति और मंत्रों के कंपन से उत्पन्न ऊर्जा इसे आकाश में तीव्र गति प्रदान करती थी, जो कल्पना से परे है.

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वायु और वाष्प की शक्ति

कहा तो ये भी जाता है कि ये विमान वायु के वेद और वाष्प के समायोजन से चलता था. आखिर इस अद्भूत टेक्नोलॉजी के बारे में सोचकर ही वैज्ञानिकों का माथा घूम जाता है.

स्वर्ण और रत्नों का ढांचा

यह केवल यंत्र नहीं, बल्कि कला का अद्भुत नमूना था. स्वर्ण से निर्मित इस विमान में नीलम और वैदूर्य जैसे रत्न जड़े थे, जो इसे सौर ऊर्जा सोखने में मदद करते थे.

पारे (Mercury) का रहस्य

प्राचीन 'विमान शास्त्र' के कुछ रहस्यों के अनुसार, पारे को गर्म करके उससे उत्पन्न चक्रवात जैसी ऊर्जा का भी संकेत मिलता है. यह तकनीक आज के आधुनिक जेट इंजनों से कहीं आगे थी.

असीमित बैठने की क्षमता

इसकी एक चमत्कारी विशेषता यह थी कि इसमें बैठने वालों की संख्या चाहे कितनी भी हो, हमेशा एक सीट खाली रहती थी. इसके आकार को बढ़ाया और घटाया जा सकता था. यह विमान की 'स्पेस-फोल्डिंग' क्षमता को दर्शाता है.

कुबेर से रावण तक का सफर

शिल्पी विश्वकर्मा द्वारा निर्मित यह विमान पहले कुबेर का था. रावण ने इसे अपनी शक्ति से छीना. अंत में, प्रभु श्री राम इसी पर सवार होकर लंका से अयोध्या वापस लौटे थे.

क्या यह एलियन तकनीक थी?

आज के शोधकर्ता पुष्पक विमान की विशेषताओं को देखकर हैरान हैं. क्या प्राचीन भारत में हमारे पास एंटी-ग्रेविटी तकनीक थी? यह रहस्य आज भी विज्ञान के लिए एक बड़ी पहेली बना हुआ है. अगर ये पहेली सुलझ जाती तो भारत को होमुर्ज की जरुरत होती और ना ही ईंधन के लिए किसी और देश की तरफ देखना पड़ता. डिस्क्लेमर: यहां दी गई सभी जानकारियां सामाजिक और धार्मिक आस्थाओं पर आधारित हैं. India.Com इसकी पुष्टि नहीं करता. इसके लिए किसी एक्सपर्ट की सलाह अवश्य लें. (Ai Generated Image)