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भारत के इस राज्य में बंजर जमीन के नीचे मिली अरबों की वो चीजें, जिसके लिए खाक छान रहा अमेरिका, सदमे में आ जाएगा चीन

पश्चिमी राजस्थान का बालोतरा जिले में 750 वर्ग किलोमीटर की बंजर जमीन के नीचे रेयर अर्थ एलिमेंट्स मिला है. ये भारत को रक्षा और हाई-टेक तकनीक के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बना देगा.

By Anjali Karmakar | Updated: May 26, 2026 5:34 PM IST

भारत के हाथ लगा रेयर अर्थ एलिमेंट्स

स्मार्टफोन, लैपटॉप, मैग्नेट इलेक्ट्रिक व्हीकल (EVs) और क्लीन एनर्जी (पवन टर्बाइन और सोलर पैनल) जैसे कई आधुनिक डिवाइस बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाला दुर्लभ खनिज यानी Rare Earth Elements पर अब भारत की भी हिस्सेदारी होगी. भारत REE के इंपोर्ट पर निर्भरता कम करने के लिए अपनी घरेलू संभावनाओं को तलाश रहा है. रेयर अर्थ एलिमेंट्स को लेकर भारत का रेगिस्तानी इलाके में जैकपॉट लगा है. यहां बंजर जमीन के नीचे रेयर अर्थ एलिमेंट्स का भंडार मिला है. इनकी कीमत अरबों में बताई जा रही है.

कहां मिला रेयर अर्थ एलिमेंट्स?

पश्चिमी राजस्थान का बालोतरा जिला अब सिर्फ रिफाइनरी के लिए ही नहीं, बल्कि देश की सामरिक, आर्थिक और ऊर्जा सुरक्षा के सबसे बड़े केंद्र के रूप में दुनिया के नक्शे पर चमकने जा रहा है. The Earth.com की रिपोर्ट के मुताबिक, बालोतरा के सिवाना रिंग कॉम्प्लेक्स में ये एलिमेंट्स मिला. रॉकेट से लेकर न्यूक्लियर पावर प्लांट्स तक में इस्तेमाल होने वाला यह बेशकीमती कच्चा माल अब भारत को अपनी ही धरती से मिलेगा.

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कॉम्प्लेक्स के तीन प्रमुख ब्लॉक्स में मिला रेयर अर्थ एलिमेंट्स

केंद्रीय खान मंत्रालय की टेक्निकल कम कॉस्ट कमिटीज की ज्वॉइंट मीटिंग में इस डिस्कवरी की पुष्टि की गई है. रिपोर्ट के मुताबिक, इस कॉम्प्लेक्स के तीन प्रमुख ब्लॉक्स में रेयर अर्थ एलिमेंट्स, हैवी रेयर अर्थ एलिमेंट्स और क्रिटिकल रेयर मेटल्स पाए गए हैं. तीन बड़ी कंपनियों को तकनीकी मूल्यांकन का काम भी सौंप दिया है.

कितने एरिया में फैला है सिवाना रिंग कॉम्प्लेक्स?

सिवाना रिंग कॉम्प्लेक्स मूल रूप से एक प्राचीन ज्वालामुखी कुंड है. ये करीब 750 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है. ये IIT के साथ पार्टनरशिप में काम करती है. इस क्षेत्र के वैज्ञानिक सर्वे में चौंकाने वाले नतीजे सामने आए हैं. इस इलाके में मुख्य रूप से नियोबियम, जिरकोनियम और हाफनियम जैसे बेहद दुर्लभ एलिमेंट्स मिले हैं.

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किन-किन कामों में होगा रेयर अर्थ एलिमेंट्स का इस्तेमाल?

इन रेयर अर्थ एलिमेंट्स का इस्तेमाल एयरोस्पेस इंजन के लिए सुपरअलॉय मेटेरियल बनाने और मेडिकल इक्यूपमेंट, डिवाइसेज के सुपरकंडक्टिंग मैग्नेट में होता है. न्यूक्लियर रिएक्टर, मिसाइल टेक्नीक, इलेक्ट्रिक कार, रोबोटिक्स, माइक्रो-इलेक्ट्रॉनिक्स, केमिकल प्रोसेसिंग, हाई-एंड बैटरियों और डिफेंस सिस्टम में इसका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाता है.

कैसे निकाला जाएगा ये रेयर अर्थ एलिमेंट्स?

सिवाना रिंग कॉम्प्लेक्स और सिवाना ग्रेनाइट क्षेत्र में मौजूद इन रेयर अर्थ एलिमेंट्स को निकालने के लिए राज्य स्तर पर एक नोडल अधिकारी अप्वॉइंट किया जाएगा. खान विभाग और संबंधित जिला कलक्टर केंद्र सरकार के अधिकारियों के साथ को-ऑर्डिनेशन करेंगे.

रेयर अर्थ एलिमेंट्स के मामले में कहां है भारत?

रेयर अर्थ एलिमेंट्स के मामले में भारत दुनिया में पांचवें नंबर पर है. भारत के पास करीब 69 लाख मीट्रिक टन REE है. बावजूद इसके कुल REE प्रोडक्शन में भारत की हिस्सेदारी 1% से भी कम है. REE को लेकर भारत सरकार चीन पर निर्भरता कम करने निजी कंपनियों के साथ मिलकर इसके प्रोडक्शन को बढ़ावा देना चाहती है. बेशक इसके शुरूआती दौर में कई चुनौतियां हैं, लेकिन लॉन्ग टर्म में इससे सफलता मिलेगी. सेंटर फॉर स्ट्रैटजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज के मुताबिक भारत में आंध्र प्रदेश, केरल जैसे तटीय राज्यों में REE पाया जाता है. हालांकि, यहां सिर्फ 69 लाख टन का ही REE रिजर्व है.

रेयर अर्थ एलिमेंट्स में अमेरिका और चीन का कितना शेयर?

REE का भंडार तो पूरी दुनिया में मौजूद है. लेकिन, इन्हें जमीन से निकालना और रिफाइन करना बहुत मुश्किल है. चीन REE रिफाइन के मामले में नंबर 1 है. यहां सबसे ज्यादा 440 लाख मीट्रिक टन REE का स्टॉक है. यह दुनिया का 49% है. चीन सालाना 2.7 लाख मीट्रिक टन REE प्रोडक्शन करता है. रेयर अर्थ एलिमेंट में चीन के बाद वियतनाम का नंबर आता है. यहां 220 लाख मीट्रिक टन RRE रिजर्व है. वहीं, अमेरिका के पास लगभग 19 लाख टन (1.9 रेयर अर्थ रिजर्व है. कैलिफोर्निया का Mountain Pass Mine रेयर अर्थ एलिमेंट का सबसे बड़ा सोर्स है.