सऊदी अरब के राष्ट्रगान को 'आश अल-मलिक' के नाम से जाना जाता है. इसे 1984 में आधिकारिक तौर पर अपनाया गया था. इसके बोल इब्राहिम खफाजी द्वारा लिखे गए हैं.
People are also watching
2/9
अल्लाह की महानता
सऊदी अरब के राष्ट्रगान की शुरुआत अल्लाह की महानता और शक्ति की प्रशंसा से होती है. इसमें ईश्वर पर विश्वास और आस्था को सबसे ऊपर रखा गया है.
3/9
धार्मिक पहचान
राष्ट्रगान में इस्लाम को देश की आत्मा बताया गया है. यह साफ करता है कि सऊदी अरब की पहचान इस्लाम और उसके मूल्यों से जुड़ी हुई है.
4/9
झंडे पर गर्व
गान में सऊदी अरब के झंडे का जिक्र है. यह झंडा देश की शान, एकता और सम्मान का प्रतीक माना गया है.
5/9
वफादारी और समर्पण
राष्ट्रगान देश के प्रति वफादारी और समर्पण की भावना को दर्शाता है. इसमें नागरिकों को अपनी मातृभूमि से प्रेम करने की प्रेरणा मिलती है.
6/9
शांति का संदेश
इस गान में शांति, सम्मान और गरिमा की बात कही गई है. यह बताता है कि देश शांति के रास्ते पर चलना चाहता है.
7/9
गर्व की भावना
राष्ट्रगान में सऊदी अरब के गौरवशाली अतीत और उसकी प्रतिष्ठा को याद किया गया है, जिससे लोगों में गर्व की भावना पैदा होती है.
8/9
एकता और मजबूती
राष्ट्रगान में देश की एकता और मजबूती पर जोर दिया गया है. यह संदेश देता है कि सभी नागरिक मिलकर देश को मजबूत बनाते हैं.
9/9
आशा और विश्वास
अंत में राष्ट्रगान उज्ज्वल भविष्य की उम्मीद और विश्वास को दर्शाता है. यह देश की तरक्की और सुरक्षा की कामना करता है. (All Photos: pinterest)
By clicking “Accept All Cookies”, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts Cookies Policy.