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येलोस्टोन ज्वालामुखी के महाविस्फोट का रहस्य और खुला, जानकर वैज्ञानिक भी चौंक गए

करीब 6.40 लाख पहले येलोस्टोन ज्वालामुखी में महाविस्फोट हुआ था. मगर ऐसा क्यों हुआ था इसका रहस्य अभी भी पूरी तरह से सुलझ नहीं पाया है. मगर नए रिसर्च में वैज्ञानिकों ने एक बड़ा राज खोला है.

By Nandan Singh | Updated: July 3, 2026 2:02 PM IST

येलोस्टोन ज्वालामुखी पर नया शोध

वैज्ञानिकों ने अमेरिका के मशहूर येलोस्टोन ज्वालामुखी के करीब 6.40 लाख साल पुराने महाविस्फोट को लेकर नई स्टडी पेश की है. इस रिसर्च में यह समझने की कोशिश की गई है कि आखिर इतनी बड़ी ज्वालामुखीय घटना के पीछे असली ऊर्जा और वजह क्या थी. येलोस्टोन आज भी दुनिया के सबसे सक्रिय और खतरनाक ज्वालामुखीय सिस्टम में से एक माना जाता है, जिस पर वैज्ञानिक लगातार नजर रखते हैं.

क्या थी पुरानी थ्योरी

लंबे समय से वैज्ञानिक मानते आए हैं कि येलोस्टोन के नीचे पृथ्वी के बहुत गहरे हिस्से से एक बेहद गर्म चट्टानों का स्तंभ ऊपर उठता है, जिसे मेंटल प्लूम कहा जाता है. इसी को ज्वालामुखी गतिविधि का मुख्य कारण माना जाता था. इस थ्योरी के अनुसार, यह गर्म पदार्थ नीचे से ऊपर आकर मैग्मा बनाता है और फिर बड़े विस्फोटों को जन्म देता है.

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क्या है नई स्टडी

Science.org में छपी खबर के अनुसार, हाल ही में प्रकाशित रिसर्च में वैज्ञानिकों ने कहा है कि सिर्फ मेंटल प्लूम ही येलोस्टोन की पूरी कहानी नहीं समझाता. उनके अनुसार, पृथ्वी की ऊपरी परत यानी क्रस्ट और उत्तरी अमेरिका महाद्वीप में लाखों सालों से चल रही टेक्टोनिक गतिविधियां भी इसमें बड़ी भूमिका निभाती हैं. यानी अब ध्यान सिर्फ गहराई से आने वाली गर्मी पर नहीं, बल्कि ऊपर की परतों की हलचल पर भी दिया जा रहा है.

3D मॉडल से हुआ खुलासा

इस स्टडी में वैज्ञानिकों ने एक बेहद विस्तृत 3D जियो-डायनामिक मॉडल तैयार किया, जिसमें लाखों साल पुराने भूगर्भीय बदलावों को शामिल किया गया. इसमें टेक्टोनिक प्लेटों की गति, पृथ्वी की परतों की मोटाई, तापमान और दबाव जैसे कई कारकों को एक साथ जोड़ा गया. इस मॉडल से यह समझने में मदद मिली कि येलोस्टोन के नीचे मैग्मा कैसे बनता और आगे बढ़ता है.

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क्या है अहम वजह

रिसर्च के अनुसार, उत्तरी अमेरिका की टेक्टोनिक प्लेट लगातार बहुत धीमी गति से खिसक रही है. कुछ हिस्सों में भारी और हल्के चट्टानों के कारण तनाव पैदा होता है, जो क्रस्ट को खींचता है. साथ ही, नीचे दबती हुई पुरानी टेक्टोनिक प्लेट भी जमीन की संरचना को प्रभावित करती है. इन दोनों प्रक्रियाओं के कारण येलोस्टोन के नीचे दबाव और तनाव बढ़ता है.

कैसे बनता है मैग्मा का रास्ता

वैज्ञानिकों ने बताया कि इन्हीं टेक्टोनिक दबावों के कारण पृथ्वी की परतों में धीरे-धीरे दरारें और रास्ते बनते हैं. इन्हीं रास्तों से मैग्मा ऊपर की ओर बढ़ता है और येलोस्टोन के ज्वालामुखी सिस्टम को सक्रिय रखता है. पहले यह समझ नहीं था कि मैग्मा एक निश्चित दिशा में ही क्यों बढ़ता है, लेकिन नई स्टडी ने इसका भी एक संभावित जवाब दिया है.

भविष्य में आसान हो सकती है समझ

इस रिसर्च से वैज्ञानिकों को येलोस्टोन के भविष्य को समझने में मदद मिल सकती है. अगर टेक्टोनिक गतिविधियों की भूमिका ज्यादा मानी जाती है, तो ज्वालामुखी के व्यवहार को समझने के मॉडल भी बदलने होंगे. इससे भूकंप, जमीन में बदलाव और जियोथर्मल गतिविधियों की बेहतर निगरानी संभव हो सकेगी.

खत्म नहीं हुआ रहस्य

हालांकि यह नई स्टडी काफी अहम मानी जा रही है, लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि येलोस्टोन के नीचे की संरचना अभी भी पूरी तरह समझी नहीं गई है. यह एक जटिल सिस्टम है और इसमें समय के साथ और भी नए खुलासे हो सकते हैं, जो इस ज्वालामुखी के रहस्य को और साफ करेंगे. (Photos: Meta AI)