श्रीलंका का राष्ट्रगान 'श्रीलंका माता' बेहद खास है, लेकिन इसके पीछे की कहानियां और विवाद इतने चौंकाने वाले हैं कि जानकर हैरानी होगी.
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किसने लिखा राष्ट्रगान
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रवींद्रनाथ टैगोर
माना जाता है कि आनंद समरकून रवींद्रनाथ टैगोर के शिष्य थे, कई लोग मानते हैं कि राष्ट्रगान की धुन और प्रेरणा उन्होंने टैगोर से ही मिली.
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'नमो नमो माता' नाम
शुरुआत में इसे 'नमो नमो माता' कहा जाता था, जिसका मतलब 'सलाम मां' निकलकर आता है. मगर बाद में 'श्रीलंका माता' किया गया.
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क्यों बदला गया नाम
'नमो नमो' से देश की बदकिस्मती से जुड़ा मानकर बदल गया, क्योंकि लगातार संकट आ रहे थे. ये बदलाव बिना रचयिता की सहमति के हुआ!
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रचयिता ही हुए दुखी
आनंद समरकून को इसे बदलने का इतना दुख हुआ कि 1962 में सिर्फ 51 साल की उम्र में सुसाइड कर लिया. राष्ट्रगान ने ही उन्हें मौत दे दी.
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क्या कहता है राष्ट्रगान
यह गान देश की प्राकृतिक सुंदरता, कृषि समृद्धि, लोगों की बुद्धिमत्ता, नैतिकता और एकजुटता की प्रशंसा करता है.
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राष्ट्रीयता पर जोर
सभी नागरिकों को एक ही मां (देश) के बच्चे बताकर राष्ट्रीय एकता पर जोर देता है.
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दुर्लभ राष्ट्रगान
यह दुनिया के उन दुर्लभ राष्ट्रगानों में से एक है जो पूरी तरह से धर्मनिरपेक्ष और समावेशी है.
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