Tibet Tectonic Plates Collides Asian Countries In Danger India Earthquake 8287477
एशिया देशों पर मंडरा रहा खतरा! तिब्बत के नीचे फड़फड़ाती प्लेट्स ने वैज्ञानिकों को किया हैरान
तिब्बत के पठार के नीचे धरती की परतें ठोस नहीं बल्कि बह रही हैं. सैटेलाइट डेटा से बड़ा खुलासा हुआ है, जो भारत समेत पूरे एशिया के लिए खतरनाक साबित हो सकता है.
दुनिया की छत कहे जाने वाले तिब्बत में धरती की परतों में कुछ ऐसा हो रहा है, जो अब तक मानी गई वैज्ञानिक धारणाओं को चुनौती दे रहा है.
People are also watching
2/10
सैटेलाइट डेटा से बड़ा खुलासा
वैज्ञानिकों ने यूरोपीय सैटेलाइट Copernicus Sentinel-1 से मिले हाई-रिजॉल्यूशन डेटा का विश्लेषण किया. जिससे पता चला कि तिब्बत के नीचे की टेक्टोनिक प्लेट्स ठोस नहीं बल्कि बहते हुए द्रव की तरह व्यवहार कर रही हैं.
3/10
तिब्बत का पठार बह रहा है
रिसर्च में सामने आया कि तिब्बत के पठार का पूर्वी हिस्सा हर साल करीब 25 मिलीमीटर की रफ्तार से पूर्व दिशा में खिसक रहा है, जबकि कुछ हिस्सों में यह गति 10 मिलीमीटर प्रति वर्ष तक सीमित है.
4/10
धरती की परतें खिंच और दब रही हैं
अलग-अलग गति से खिसकने का मतलब है कि धरती की विशाल प्लेट्स कहीं खिंच रही हैं और कहीं दबाव में हैं. जिससे पूरा क्षेत्र अंदर से धीरे-धीरे आकार बदल रहा है.
5/10
अब तक का सबसे बड़ा जियोडेटिक डेटा
शोधकर्ताओं के मुताबिक, यह अब तक का सबसे बड़ा और सटीक Geodetic Dataset है. जो यह साबित करता है कि महाद्वीप उतने सख्त नहीं हैं, जितना हमें किताबों में पढ़ाया गया था.
6/10
कुनलुन फॉल्ट की कमजोरी आई सामने
इस अध्ययन में सबसे चौंकाने वाली बात कुनलुन फॉल्ट को लेकर सामने आई, जो उम्मीद से कहीं ज्यादा कमजोर निकला और इसी वजह से तिब्बत का अंदरूनी हिस्सा पूर्व की ओर फैल पा रहा है.
7/10
भारत-यूरेशिया की टक्कर का असर
भारतीय और यूरेशियाई प्लेट्स की टक्कर से पैदा होने वाली भारी ऊर्जा इस कमजोर फॉल्ट के जरिए बाहर निकलती है. जिससे पठार अंदर से टूटता और फैलता जा रहा है.
8/10
पुरानी टेक्टोनिक थ्योरी पर उठे सवाल
अब तक माना जाता था कि तिब्बत मजबूत चट्टानी ब्लॉकों से बना है. लेकिन नई रिसर्च बताती है कि चट्टानें धीरे-धीरे फ्लो कर रही हैं, जिससे पुराने मॉडल अब अधूरे साबित हो रहे हैं.
9/10
एशिया के कई देशों को खतरा
तिब्बत का पठार भारत, नेपाल, भूटान, पाकिस्तान और चीन को प्रभावित करता है. वैज्ञानिकों ने पाया कि कहीं जमीन 5 मिमी धंस रही है तो कहीं 5 मिमी ऊपर उठ रही है, जो बड़े भूकंप का संकेत हो सकता है.
10/10
भविष्य में भूकंप समझने में मदद
44,000 से ज्यादा रडार इमेज और 14,000 GNSS मापों से तैयार यह डेटा भूकंप जोखिम मॉडल को बेहतर बनाएगा. जिससे आपदा प्रबंधन मजबूत होगा और लोगों की जान बचाने में मदद मिल सकेगी. (Photos: google, freepik)
By clicking “Accept All Cookies”, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts Cookies Policy.