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एथेनॉल-CNG या EV नहीं... आखिर किस फ्यूल से चलने वाली कार का इस्तेमाल करते हैं नितिन गडकरी? जवाब पक्का नहीं जानते होंगे आप

Nitin Gadkari hydrogen Car: नितिन गडकरी ने हाल ही में भारत का पहला हाइड्रोजन बेस्ड एडवांस्ड फ्यूल सेल इलेक्ट्रिक व्हीकल Toyota Mirai को लॉन्च किया था. कंपनी का दावा है कि इस कार में सिर्फ 5 मिनट में फ्यूल भरा जा सकता है.

By Anjali Karmakar | Updated: August 2, 2026 10:56 PM IST

गडकरी की स्पेशल कार

केंद्र सरकार ने 1 अप्रैल 2026 से देशभर में E-20 पेट्रोल रोलआउट कर दिया है. देश के 48 पेट्रोल पंपों पर E-85 पेट्रोल भी शुरू हो गया है. इसके तहत पेट्रोल में 20 पर्सेंट एथेनॉल मिलाया जाता है. दिसंबर 2026 तक E-20 को 500 पंपों तक पहुंचाने का लक्ष्य है. केंद्रीय सड़क परिवहन और राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी E-20 को प्रमोट करते रहते हैं. इसे कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच इसे फ्यूचर फ्यूल माना जा रहा है. भले ही गडकरी E-20 की वकालत करते हों, लेकिन क्या आप जानते हैं कि वो ऐसी कार का इस्तेमाल करते हैं, जो न तो एथेनॉल से चलती है, न पेट्रोल या डीजल से. उनकी कार CNG बेस्ड भी नहीं है.

हाइड्रोजन कार की सवारी करते हैं गडकरी

असल में नितिन गडकरी हाइड्रोजन कार की सवारी करते हैं. ये कार ग्रीन हाइड्रोजन से चलती है. टोयोटा कंपनी की इस कार का नाम 'मिराई' (Toyota Mirai). ये एक जापानी शब्द है, जिसका मतलब है भविष्य. तभी तो हाइड्रोजन फ्यूल को अब फ्यूचर फ्यूल माना जा रहा है. भारत बड़ी मात्रा में पेट्रोल-डीजल इंपोर्ट करता है, ये फ्यूल महंगे तो हैं ही. इनसे प्रदूषण भी बहुत होता है. दूसरी ओर, ग्रीन हाइड्रोजन काफी सस्ती गैस है.

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एक बार टैंक फुल पर 600 किमी चलती है ये कार

टोयोटा मिराई, भारत का पहला फ्यूल सेल इलेक्ट्रिक व्हीकल (FCEV) है. कार निर्माता कंपनी के मुताबिक, मिराई एक फुल टैंक पर 600 किमी तक का सफर तय कर सकती है. इसके जरिए प्रति किलोमीटर सिर्फ 2 रुपये का खर्च आएगा. ये कार एक पायलट प्रोजेक्ट है. इसको ग्रीन हाइड्रोजन को बढ़ावा देने की दिशा में एक कदम के रूप में देखा जा रहा है. गडकरी ने बताया कि ग्रीन हाइड्रोजन को लेकर सरकार एक बड़ा मिशन शुरू कर रही है.

कैसे काम करती है ये कार?

इस कार के टैंक में हाई-प्रेशर हाइड्रोजन गैस स्टोर होती है. फ्यूल सेल में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के केमिकल रिएक्शन से बिजली बनती है. यही बिजली इलेक्ट्रिक मोटर को चलाती है. इस प्रक्रिया में केवल पानी निकलता है, धुआं या CO₂ नहीं निकलता.

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जींद से सोनीपत के बीच चल रही हाइड्रोजन ट्रेन

हाल ही में सरकार ने हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन भी शुरू की है. 17 जुलाई को हरियाणा के जींद से सोनीपत तक इस हाइड्रोजन ट्रेन की शुरुआत हुई. जींद से सोनीपत के बीच ये ट्रेन 14 स्टेशन कवर करती है. ये स्टेशन हैं- जींद, जींद सिटी, पांडु पिंडारा, ललित खेड़ा, भंभेवा, ईशापुर खेड़ी, बुटाना, खंडराई, गोहाना, राभड़ा, लाठ, मोहाना, बड़वासनी और सोनीपत. हाइड्रोजन ट्रेन में 10 कोच हैं. हर कोच में 32 सीटें हैं. एक कोच में 300 लोग सफर कर सकेंगे. इस ट्रेन की बोगियां DEMU की तर्ज पर तैयार की गई हैं. किराया 5 से लेकर 15 रुपये है.

E-20 पेट्रोल से कम हो सकती है कार की माइलेज?

केंद्र सरकार ने 1 अप्रैल 2026 से देशभर में E-20 पेट्रोल रोलआउट कर दिया है. देश के 48 पेट्रोल पंपों पर E-85 पेट्रोल भी शुरू हो गया है. दिसंबर 2026 तक इसे 500 पंपों तक पहुंचाने का लक्ष्य है. इस बीच सरकार ने पहली बार माना कि E-20 पेट्रोल (20% एथेनॉल ब्लेंडिंग) का इस्तेमाल करने से गाड़ियों को नुकसान पहुंच सकता है. केंद्रीय सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने राज्यसभा में लिखित जवाब में ये जानकारी दी है. उन्होंने बताया कि E20 पेट्रोल का इस्तेमाल करने पर गाड़ी की कैटेगरी और उसकी उम्र के आधार पर फ्यूल इकॉनमी (माइलेज) 2 से 6% तक कम हो सकती है.

फ्यूल इकोनॉमी पर क्या बोले गडकरी?

न्यूज एजेंसी PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय मंत्री ने बताया कि इंडियन ऑयल, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम, सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्यूफैक्चरर्स (सियाम) व ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने 2 व्हीलर-फोर व्हीलर गाड़ियों पर E-20 फ्यूल की स्टडी की थी. गडकरी ने कहा कि व्हीकल का माइलेज सिर्फ फ्यूल पर निर्भर नहीं करता, बल्कि ड्राइविंग स्टाइल, सड़क की स्थिति, रखरखाव और अन्य कारकों से भी प्रभावित होता है. इसका इस्तेमाल दुनिया में एक सदी से ज्यादा समय से हो रहा है. उन्होंने माना कि मौजूदा पेट्रोल-एथेनॉल ब्लेंडिंग (E20) से गाड़ियों के माइलेज पर 6% तक असर पड़ सकता है.