ज्वालामुखी राख को हल्के में न लें
ज्यादातर लोग ज्वालामुखी की राख को साधारण धुएं या हल्की धूल समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि यह बेहद बारीक, नुकीले और खनिजों से बने कणों का घना मिश्रण होती है. विस्फोट के बाद यह राख 10–15 किलोमीटर की ऊंचाई तक पहुंच जाती है, ठीक वहीं जहां ज्यादा तर यात्री विमान उड़ते हैं.