Add India.com as a Preferred Source Add India.com as a Preferred Source
Advertisement

Volcano Ash: ज्वालामुखी की राख से हवाई जहाज को कितना बड़ा खतरा? जानें उड़ान के दौरान कौन-कौन सी खराबियां आ सकती हैं!

इथियोपिया में एक ज्वालामुखी के सक्रिय होने और आसमान में राख का विशाल गुबार फैलने के कारण कई एयरलाइंस की उड़ानें प्रभावित हुई हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर इस धुएं से प्लेन को क्या नुकसान पहुंच सकता है? आइए जानते हैं.

By Azhar Naim | Updated: November 25, 2025 10:34 PM IST

ज्वालामुखी राख को हल्के में न लें

ज्यादातर लोग ज्वालामुखी की राख को साधारण धुएं या हल्की धूल समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि यह बेहद बारीक, नुकीले और खनिजों से बने कणों का घना मिश्रण होती है. विस्फोट के बाद यह राख 10–15 किलोमीटर की ऊंचाई तक पहुंच जाती है, ठीक वहीं जहां ज्यादा तर यात्री विमान उड़ते हैं.

इंजन के लिए सबसे बड़ा खतरा

ज्वालामुखी की राख का सबसे खतरनाक असर सीधे इंजन पर पड़ता है. राख के कण इंजन में घुसकर उसकी गर्मी के संपर्क में आते ही पिघल जाते हैं और टर्बाइन ब्लेड्स पर चिपककर हवा का रास्ता बंद कर देते हैं. इस स्थिति में इंजन अचानक बंद हो सकता है, जो बड़े हादसे का शकल ले सकता है.

Advertisement

पायलट को भी होती है दिक्कत

कांच जैसे नुकीले राख के कण तेज रफ्तार से विमान के शीशों से टकराकर उन्हें रगड़ते और खरोंचते हैं. कुछ ही मिनटों में कॉकपिट की विंडो इतनी धुंधली हो जाती है कि बाहर का न तो आसमान दिखाई देता है और न ही रनवे साफ नजर आता है, जिससे पायलट की विजिबिलिटी लगभग शून्य हो सकती है.

सेंसर फेल होने का खतरा

आधुनिक विमान सेंसरों और सटीक डेटा पर चलते हैं, लेकिन ज्वालामुखी की राख इन सेंसरों को ब्लॉक कर सकती है. इससे स्पीड गलत दिख सकती है, ऊंचाई की जानकारी बिगड़ सकती है और तापमान की रीडिंग भी गड़बड़ा सकती है. गलत डेटा उड़ान को खतरनाक स्थिति में डाल सकता है.

Advertisement

विमान की बाहरी सतह पर भी गहरा असर

राख जब तेज रफ्तार में विमान के शरीर से टकराती है तो यह रेत के तूफान की तरह असर करती है. इससे एयरक्राफ्ट की बाहरी धातु, पेंट और सतह को नुकसान पहुंचता है. यदि राख एयर-कंडीशनिंग सिस्टम में चली जाए, तो यात्री केबिन में जले हुए धुएं जैसी गंध आने लगती है, जिससे घबराहट और असहजता बढ़ सकती है.

ATC से संपर्क टूटने का खतरा

ज्वालामुखी राख कई बार रेडियो सिग्नल को भी कमजोर कर देती है, जिससे पायलट का एयर ट्रैफिक कंट्रोल से संपर्क बाधित हो सकता है. संचार टूटने पर विमान को सुरक्षित मार्गदर्शन नहीं मिलता, जिससे उड़ान की जोखिम और भी बढ़ जाती है और इमरजेंसी स्थिति बन सकती है.

क्यों उड़ानें तुरंत रोकी या डायवर्ट की जाती हैं?

जैसे ही किसी क्षेत्र में ज्वालामुखी विस्फोट के बाद राख का बादल उठता है, एयरलाइनें तुरंत उस रूट की उड़ानें रोक देती हैं. सैटेलाइट, मौसम विभाग और एवीएशन एजेंसियां लगातार राख के मूवमेंट पर नजर रखती हैं. यात्रियों की सुरक्षा के लिए फ्लाइटें डायवर्ट, देरी या रद्द की जाती हैं ताकि किसी भी तरह की दुर्घटना की संभावना खत्म की जा सके. (Image: Pexels/ AI)