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लोकसभा में राहुल गांधी से माफी की मांग, मगर 65 साल पहले पंडित नेहरू ने किस बात के लिए मांगी थी माफी

लोकसभा में सदन की कार्यवाही के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से सत्तापक्ष ने माफी की मांग की. मगर जानते हैं संसद 65 साल पहले ऐसा क्या हुआ था, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने सदन में माफी मांगी थी.

By Ikramuddin | Updated: July 29, 2026 7:12 PM IST

लोकसभा में राहुल गांधी से मांफी की मांग

लोकसभा में आज बुधवार को मानसून सत्र में एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा हुई. चर्चा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी भाग लिया. मगर राहुल गांधी ने अपने भाषण में ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किया जिस पर सत्तापक्ष ने सख्त आपत्ति जताई. राहुल गांधी के बयान के खिलाफ लोकसभा में एनडीए सांसदों ने खूब नारेबाजी की और नेता प्रतिपक्ष से अपने 'विवादित' बयान के लिए माफी मांगने को कहा. सदन में राहुल गांधी से माफी की मांग से इतर दिमाग में सवाल भी जरूर आया होगा कि आखिर सबसे पहले लोकसभा में किसने माफी मांगी होगी. यानी आजाद भारत के संसद में सबसे पहले किस नेता ने सदन में माफी मांगी थी.

जब पंडित नेहरू ने सदन में मांगी माफी

सवाल ऐसा है जो दिमाग में कभी ना कभी जरूर आया होगा. आज इस सवाल का जवाब शायद ही किसी को मालूम होगा. मगर आपको बता दें कि लोकसभा में खुद से सबसे पहले माफी मांगने वाले नेता कोई और नहीं बल्कि देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू थे. रिकॉर्ड्स से बता चलता है कि दिवंगत नेता किसी बात पर खुद की ही पार्टी के सांसद पर गुस्सा हो गए थे. उन्होंने तब सांसद को खूब डांट दिया. मगर बाद में खुद पंडित नेहरू को इसके लिए बुरा लगा और उन्होंने उस नेता से माफी मांगी.

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क्या था पूरा मामला

ये एक बेहद चर्चित घटना करीब 65 साल पहले की है. साल 1961 में संसद का सत्र चल रहा था. इसी बीच पंडित नेहरू का सामना मध्य प्रदेश के सागर से कांग्रेस सांसद ज्वाला प्रसाद ज्योतिष हुआ. पंडित नेहरू ने कांग्रेस नेता को देखते हुए उन्हें बुरी तरह फटकार लगा दी. मगर नेहरू ने अपनी ही पार्टी के सांसद को संसद में क्यों फटकार लगाई? चलिए आज इसे पूरे मामले को आसान भाषा में समझते हैं. दरअसल जबलपुर के ऊषा भार्गव कांड के चलते इसकी आग सागर तक पहुंच गई और दंगे भड़क उठे.

दंगों से नाराज थे पंडित नेहरू

ऊषा भार्गव कांड जो जबलपुर में हुआ था तब उसके चलते सागर में भी दंगे भड़क गए थे. दंगों से नेहरू खूब नाराज थे. बाद में उनका सामना जब सागर के सांसद से हुआ तब पंडित नेहरू ज्योतिष पर बुरी तरह भड़क गए. तब तत्कालीन पीएम गुस्से में कह दिया, 'तुम्हारे होते हुए दंगे हो गए. तुम खुद क्यों नहीं पर गए?' नेहरू की इस बात से तब कांग्रेस सांसद को बहुत आघात पहुंचा. उन्होंने पद से इस्तीफा देकर दंगों पर जांच कराने की मांग की. इसके बाद इंदिरा गांधी की अध्यक्षता में जांच कमिटी का गठन हुआ इसने अपनी रिपोर्ट पीएम को सौंपी.

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जांच में निर्दोष निकले सांसद

जांच में पता चला कि सागर हुए दंगों को रोकने में सांसद ज्वाला प्रसाद ज्योतिष की बड़ी भूमिका थी. बाद में पंडित नेहरू को जब इसकी जानकारी हुई तब उन्हें बहुत बुरा लगा और उन्होंने खुद भरी संसद में ज्योतिष से माफी मांगी. बताया गया जब पंडित नेहरू ने सदन में माफी मांगी तब सांसद ज्योतिष अपने आंसू नहीं रोक पाए. वो फूट-फूटकर सदन में रोने लगे. संसदीय कार्यवाही के रिकॉर्ड में इस घटना का उल्लेख मिलता है और इसे संसदीय शिष्टाचार का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जाता है.

संसदीय परंपरा क्या कहती है?

भारतीय संसद में तीखी बहस और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन सदन की मर्यादा बनाए रखना सभी सदस्यों की जिम्मेदारी मानी जाती है. यही कारण है कि जब भी किसी टिप्पणी पर विवाद होता है, तो या तो उसे रिकॉर्ड से हटाया जाता है या संबंधित सदस्य स्पष्टीकरण या खेद व्यक्त करते हैं.