प्रोटेस्ट करना कितना मुश्किल
कल्पना कीजिए अगर किसी देश में सरकार के खिलाफ आवाज उठाना ही खतरे से खाली न हो, तो वहां विरोध-प्रदर्शन करना कितना मुश्किल होगा. कुछ ऐसा ही हाल नॉर्थ कोरिया का है. वहां संविधान नागरिकों को सभा और प्रदर्शन की आजादी देने की बात करता है, मगर जमीन पर तस्वीर बिल्कुल अलग बताई जाती है. ह्यूमन राइट्स वॉच के अनुसार, देश में अभिव्यक्ति, सभा और संगठन की आजादी पर बेहद कड़े प्रतिबंध हैं. संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्टें भी लगातार गंभीर मानवाधिकार पाबंदियों की बात करती हैं. इसलिए कानूनी प्रावधान और वास्तविक स्थिति में बड़ा अंतर दिखाई देता है.