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जर्मनी में सस्ती तो भारत में क्यों महंगी है Mercedes, फीचर्स में भी इतना अंतर, क्या दिखती भी अलग-अलग हैं?

जर्मनी और भारत में मिलने वाली Mercedes-Benz दिखने में लगभग एक जैसी होती है, लेकिन कीमत, फीचर्स और सेटअप में बड़ा अंतर होता है. टैक्स, लोकल असेंबली, लंबा व्हीलबेस और भारतीय जरूरतों के हिसाब से किए गए बदलाव इसकी कीमत बढ़ा देते हैं.

By Tanuja Joshi | Updated: August 5, 2026 12:05 PM IST

जर्मनी और भारत की Mercedes में सबसे बड़ा अंतर क्या है?

दिखने में जर्मनी और भारत में बिकने वाली Mercedes-Benz लगभग एक जैसी लग सकती है, लेकिन दोनों के निर्माण का तरीका अलग होता है. जर्मनी में कार पूरी तरह तैयार (Completely Built Unit) होकर फैक्ट्री से निकलती है. वहीं भारत में कई मॉडल विदेश से पार्ट्स के रूप में लाए जाते हैं और पुणे के चाकण प्लांट में असेंबल किए जाते हैं. इसे CKD यानी Completely Knocked Down प्रक्रिया कहा जाता है. इससे कंपनी को पूरी कार आयात करने की तुलना में कम आयात शुल्क देना पड़ता है. हालांकि इंजीनियरिंग, सुरक्षा और गुणवत्ता के मानकों में कोई समझौता नहीं किया जाता. दोनों कारें Mercedes-Benz के वैश्विक गुणवत्ता मानकों के अनुसार ही तैयार होती हैं.

भारत में Mercedes इतनी महंगी क्यों हो जाती है?

भारत में Mercedes-Benz की कीमत केवल कार की लागत से तय नहीं होती. इसके साथ आयात शुल्क, GST, लग्जरी सेस, रजिस्ट्रेशन फीस और बीमा जैसी कई अतिरिक्त लागतें जुड़ जाती हैं, जिन मॉडलों के पार्ट्स विदेश से आते हैं, उन पर भी कस्टम ड्यूटी लगती है. यही वजह है कि जर्मनी में जिस कार की कीमत करीब 55 से 60 लाख रुपये के बराबर होती है, वही भारत में 80 लाख रुपये या उससे ज्यादा की एक्स-शोरूम कीमत पर बिकती है. ऑन-रोड कीमत तो कई शहरों में इससे भी ज्यादा हो जाती है. इसलिए दोनों देशों के बीच कीमत में बड़ा अंतर दिखाई देता है.

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भारतीय ग्राहकों के लिए अलग क्यों होती है Mercedes?

Mercedes-Benz भारतीय बाजार की जरूरतों को ध्यान में रखकर कई बदलाव करती है. भारत में बड़ी संख्या में लग्जरी कारें चालक के साथ इस्तेमाल होती हैं. इसलिए कंपनी खास तौर पर Long Wheelbase (LWB) मॉडल उपलब्ध कराती है, जिसमें पीछे बैठने वालों के लिए ज्यादा लेगरूम मिलता है. कई मॉडलों में पीछे की सीटों पर रिक्लाइनिंग सुविधा, अतिरिक्त कुशन, वायरलेस चार्जिंग और आराम बढ़ाने वाले फीचर्स दिए जाते हैं. इसका मकसद पीछे बैठे यात्रियों को ज्यादा प्रीमियम अनुभव देना होता है. यही वजह है कि भारतीय मॉडल कई मामलों में यूरोप के मॉडल से अलग दिखाई देते हैं.

जर्मनी की Mercedes ड्राइवर के लिए क्यों मानी जाती है बेहतर?

यूरोप में अधिकांश लोग अपनी कार खुद चलाते हैं. इसी वजह से वहां मिलने वाली Mercedes-Benz में ड्राइवर की सुविधा पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है. सीटों का डिजाइन, सस्पेंशन सेटअप और ड्राइविंग अनुभव को हाईवे पर तेज स्पीड के हिसाब से तैयार किया जाता है. कई मॉडल में एडवांस ड्राइविंग असिस्टेंस सिस्टम, मसाज सीट, बेहतर स्टीयरिंग कंट्रोल और व्यक्तिगत कस्टमाइजेशन के विकल्प भी मिलते हैं. जर्मन बाजार में ग्राहक अपनी जरूरत के अनुसार फीचर्स जोड़ या हटाकर कार खरीद सकते हैं. ये सुविधा भारतीय बाजार में सीमित होती है.

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सड़कें बदलते ही क्यों बदल जाता है सस्पेंशन?

भारत और जर्मनी की सड़कें काफी अलग हैं. जर्मनी की हाईवे सड़कें बेहद स्मूद और हाई-स्पीड ड्राइविंग के लिए जानी जाती हैं. वहीं भारत में गड्ढे, स्पीड ब्रेकर और खराब सड़कें आम बात हैं. इसी वजह से भारतीय Mercedes मॉडल में थोड़ा ज्यादा ग्राउंड क्लीयरेंस और सॉफ्ट सस्पेंशन दिया जाता है. इससे खराब रास्तों पर भी सफर आरामदायक रहता है. दूसरी तरफ जर्मन मॉडल में कम ग्राउंड क्लीयरेंस और सख्त सस्पेंशन रखा जाता है ताकि तेज रफ्तार में बेहतर कंट्रोल मिल सके.

फीचर्स में भी क्यों दिखाई देता है बड़ा अंतर?

भारत और जर्मनी में मौसम और इस्तेमाल का तरीका अलग होने की वजह से फीचर्स भी अलग मिलते हैं. जर्मनी में हीटेड स्टीयरिंग व्हील, सीट हीटर और ठंड के मौसम के लिए विशेष सुविधाएं लोकप्रिय हैं. वहीं, भारत में ज्यादा शक्तिशाली एयर कंडीशनिंग, रियर सनब्लाइंड, पीछे बैठने वालों के लिए अतिरिक्त आराम और गर्मी से राहत देने वाले फीचर्स पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है. कंपनी भारतीय ग्राहकों के लिए पहले से तय ट्रिम लेवल देती है, जबकि जर्मनी में ग्राहक अपनी पसंद के अनुसार कार को कस्टमाइज कर सकते हैं.

ADAS और सेफ्टी सिस्टम में क्या बदलाव किए जाते हैं?

Mercedes-Benz दोनों देशों में सुरक्षा मानकों से समझौता नहीं करती, लेकिन ड्राइविंग परिस्थितियों के अनुसार ADAS सिस्टम की सेटिंग अलग हो सकती है. जर्मनी में लेन मार्किंग और ट्रैफिक नियम काफी व्यवस्थित हैं, इसलिए वहां एडवांस ऑटोमेटेड ड्राइविंग सिस्टम बेहतर तरीके से काम करते हैं. भारत में ट्रैफिक की स्थिति अलग होती है, जहां अचानक सामने आने वाले वाहन, जानवर या बिना निशान वाली सड़कें आम हैं. इसलिए यहां कैमरा और रडार सिस्टम को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार ट्यून किया जाता है ताकि अनावश्यक ब्रेकिंग या गलत अलर्ट से बचा जा सके.

क्या भारत में बनी Mercedes गुणवत्ता में कम होती है?

ये एक आम धारणा है कि भारत में असेंबल की गई लग्जरी कारें गुणवत्ता में कम होती हैं, जबकि वास्तविकता इससे अलग है. Mercedes-Benz भारत में बनने वाले मॉडलों के लिए वही ग्लोबल इंजीनियरिंग, सेफ्टी टेस्ट और गुणवत्ता मानक अपनाती है जो जर्मनी में लागू होते हैं. अंतर केवल असेंबली प्रक्रिया, स्थानीय जरूरतों और टैक्स संरचना का होता है. इसलिए भारत में बनी Mercedes भी उतनी ही सुरक्षित और भरोसेमंद होती है. कंपनी का मकसद हर बाजार की जरूरत के अनुसार कार को बेहतर बनाना होता है, न कि गुणवत्ता में कोई कमी करना.