क्या आप जानते हैं एक समय में भारत से समुद्र के रास्ते 8 हजार लीटर गंगाजल को चांदी के कलशों में भरकर लंदन पहुंचाया गया था, ये सिलसिला लगातार कुछ सालों तक चला. चलिए जानते हैं इसके पीछे की पूरी कहानी.
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राजस्थान के एक राजा
आज हम बात करेंगे राजस्थान के एक राजा की, जिन्होंने अपने समय में दुनिया के सबसे बड़े चांदी के कलश बनवाए थे. वर्तमान में ये कलश राजस्थान के सिटी पैलेस में रखे गए हैं.
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किसने बनवाए थे ये कलश
जयपुर के महाराजा सवाई माधोसिंह द्वितीय धर्मपरायण सिंह ने ये कलश बनवाए थे. ये कलश इतने भारी थे कि इन्हें देखकर हर कोई हैरान रह जाता था.
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कलश को कहां किया गया था इस्तेमाल
दुनिया से सबसे बड़े चांदी के कलश का नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हैं. ये गंगाजल ले जाने के लिए बनवाए गए थे. महाराजा सवाई माधोसिंह जहां भी जाते थे गंगा जल लेकर जाते थे.
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ये है गंगाजल के लंदन पहुंचने की कहानी
ब्रिटेन के होने वाले किंग ने जब जयपुर के महाराजा सवाई माधोसिंह द्वितीय को अपने राजतिलक समारोह में आमंत्रित किया तो महाराजा के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया. उस दौर में हिंदू लोग समुद्र पार कर दूसरे मुल्क में जाना अशुभ मानते थे. क्योंकि निमंत्रण ब्रिटेन के राजा का था, ऐसे में सीधे मना भी नहीं किया जा सकता था.
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8 हजार लीटर गंगाजल लेकर राजा पहुंचे लंदन
सभी मंत्रियों और गुरुओं से विचार-विमर्श करने के बाद एक उपाय निकाला गया. जिसमें ये तय हुआ कि एक ऐसा जहाज खोजा जाए, जिसमें कभी भी किसी भी तरह का मांस नहीं पकाया गया हो. साथ ही ये भी तय हुआ कि इस पूरे सफर के दौरान महाराजा गंगाजल का ही सेवन करेंगे और इसी से नहाएंगे. इसके बाद ओलंपिया नाम का एक जहाज लाखों के किराये पर लिया गया और उसमें चांदी के विशाल कलशों में 8 हजार लीटर गंगाजल भरा गया. इसके अलावा महाराज के साथ कई पुरोहित और सेवक भी मौजूद थे.
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अंग्रेजों से हाथ मिलाने के बाद गंगाजल से हाथ धोते थे
लंदन पहुंचने के बाद महाराजा सवाई माधोसिंह द्वितीय का जोरदार स्वागत हुआ और उन्हें महल में ठहराया गया. इस दौरान जब भी कोई अंग्रेज उनसे हाथ मिलाता था तो महाराजा गंगाजल से अपने हाथ धोते थे, इसके अलावा उनका खाना भी गंगाजल में ही बनता था. इसके बाद ये एक परंपरा सी बन गई और लंदन जाने पर लोग अपने साथ गंगाजल ले जाने लगे.
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गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज
पानी के जहाज से चांदी के कलश में गंगाजल ले जाने का जिक्र गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हैं. जयपुर के महाराजा सवाई माधोसिंह द्वितीय धर्मपरायण राधा गोविंद को भी ले जाते थे.
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