Will Earth Day Become 25 Hours Long Scientists Warn About Earth Rotation Slowing Moon Effect And Climate Change 8252206
क्या 24 नहीं, 25 घंटे का होगा एक दिन? धरती की चाल में हो रहे बदलाव को लेकर वैज्ञानिकों की नई चेतावनी
क्या आपने कभी सोचा है कि भविष्य में दिन और रात की लंबाई बदल सकती है? यह बात किसी साइंस फिक्शन कहानी जैसी लगती है, लेकिन वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि धरती की घूमने की रफ्तार धीरे-धीरे बदल रही है, जिससे भविष्य में दिन लंबे हो सकते हैं.
धरती अपनी धुरी पर घूमती है, लेकिन उसकी रफ्तार हमेशा एक जैसी नहीं रहती. यह गति बेहद धीरे बदलती है. हम इसे रोजमर्रा की जिंदगी में महसूस नहीं करते, लेकिन लंबे समय में यह बदलाव दिन की लंबाई बढ़ा सकता है.
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24 घंटे का दिन पूरी तरह तय नहीं
हम जिस 24 घंटे के दिन को सामान्य मानते हैं, वह एक औसत गणना है. इसे सौर दिवस कहा जाता है, जो सूरज की स्थिति पर आधारित होता है. हालांकि, पृथ्वी की गति बदलने से यह समय भी थोड़ा बदलता रहता है, जिसका असर दिखने लगा है.
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पृथ्वी की रफ्तार क्यों घट रही है?
वैज्ञानिकों के अनुसार पृथ्वी की घूमने की रफ्तार हर सदी में कुछ मिलीसेकंड कम हो रही है. यह बदलाव छोटा होता है, लेकिन हजारों और लाखों साल में यही फर्क दिन की लंबाई बढ़ा देता है.
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चांद से क्या है तअल्लुखक
चांद के ग्रेविटी से समुद्र में ज्वार-भाटा बनते हैं. ये पूरी तरह धरती की दिशा में नहीं होते और घर्षण पैदा करते हैं. इससे धरती की घूमने की रफ्तार धीरे-धीरे कम होती जाती है.
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चांद भी हो रहा दूर
इस प्रक्रिया के कारण चांद हर साल लगभग 3.8 सेंटीमीटर धरती से दूर जा रहा है. जैसे-जैसे यह दूरी बढ़ती है, धरती की घूर्णन ऊर्जा घटती है और दिन की अवधि धीरे-धीरे बढ़ती जाती है.
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जलवायु परिवर्तन भी डाल रहा असर
ग्रीनलैंड और अंटार्कटिका की बर्फ पिघलने से धरती पर वजन का वितरण बदल रहा है. जब भार इधर-उधर होता है, तो इसका असर धरती की घूमने की गति और धुरी पर पड़ता है.
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धरती के अंदर भी चल रही हलचल
इसके अलावा धरती का अंदरूनी हिस्सा पूरी तरह शांत नहीं है. भूकंप, मेंटल की हलचल और आंतरिक संरचना में बदलाव भी पृथ्वी की गति को प्रभावित करते हैं. इनका असर धीरे-धीरे दिन की लंबाई पर दिखाई देता है.
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आखिर कब होगा 25 घंटे का दिन?
वैज्ञानिकों का अनुमान है कि 24 से 25 घंटे का दिन बनने में लगभग 20 करोड़ साल लग सकते हैं. यानी यह बदलाव हमारी या आने वाली कई पीढ़ियों के जिंदगी में नहीं, बल्कि बहुत दूर भविष्य में संभव होगा.(Image: AI)
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