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Women's Day Special: महिलाओं के हक के लिए खूब लड़ीं ये 10 महिलाएं, जानिए किसने क्या किया
Women's Day Special: औरतों की ज़िंदगी आदमियों से अलग है. पुरुषों को जो थाली में परेसा हुआ मिला, उसके लिए महिला ने हमेशा संघर्ष किया. घर से लेकर दफ्तर तक हर जगह उसे कमतर आंका गया. घर, समाज में सम्मान तो अलग बात है, प्राइवेट दफ्तरों में नौकरी में मिलने वाली सैलरी में भी पुरुषों का स्केल हाई ही रहता है. खुद को पढ़े लिखे मानने वाले पुरुष आज भी ये झेल नहीं पाते कैसे कोई महिला उनसे बेहतर काम कर सकती है. जिसे जहां मौका मिले महिला का शोषण कर ही रहा है. जो ज़िंदगी आज औरतों के पास है, उसके लिए सैकड़ों लड़ाइयां लड़ी गईं. ये कहानी उन्हीं लड़ाइयों को लड़ने वाली औरतों की.
आज जो ज़िंदगी हम औरतें जी पा रही हैं, उसके लिए विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं ने हमारे हक, सम्मान और समानता के लिए लड़ाईयां लड़ी. आज women's day के मौके पर उन्हीं में से कुछ औरतों और उनके बलिदान को जानते हैं.
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सावित्रीबाई फुले
सावित्रीबाई फुले भारत की पहली महिला शिक्षिका थी. सावित्रीबाई ने 1848 में पुणे में लड़कियों के लिए पहला स्कूल खोला था. उन्होंने छुआछूत, बाल विवाह और विधवाओं की दयनीय स्थिति के खिलाफ लड़ाईयां लड़ी. दलित और महिलाओं की शिक्षा के लिए उनका योगदान क्रांतिकारी है.
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इरोम शर्मिला
मणिपुर की 'आयरन लेडी' इरोम ने सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम के खिलाफ 16 साल तक अनशन किया. उन्होंने राज्य हिंसा और महिलाओं पर अत्याचार के खिलाफ अहिंसक संघर्ष किया, जो मानवाधिकारों के हित में किए गए काम की मिसाल है.
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रानी लक्ष्मीबाई
झांसी की रानी ने 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में ब्रिटिश सेना के खिलाफ वीरतापूर्वक युद्ध लड़ा. महिलाओं की बहादुरी और स्वतंत्रता की लड़ाई का प्रतीक बनीं, जिन्होंने कहा था - मैं अपनी झांसी नहीं दूंगी.
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सरोजिनी नायडू
'भारत कोकिला' सरोजिनी नायडू स्वतंत्रता सेनानी, कवयित्री और महिला अधिकारों की प्रबल समर्थक थीं. वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की पहली महिला अध्यक्ष बनीं और महिलाओं के मताधिकार व सशक्तिकरण के लिए लड़ीं.
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कमला नेहरू
जवाहरलाल नेहरू की पत्नी कमला नेहरू ने महिलाओं के अधिकारों और स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई. उन्होंने महिलाओं को संगठित किया और सामाजिक सुधारों के लिए काम किया, खासकर स्वास्थ्य और शिक्षा में.
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अरुणा आसफ अली
'भारत की क्रांतिकारी भाभी' अरुणा ने 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में झंडा फहराया. उन्होंने महिलाओं को स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने के लिए प्रेरित किया और भूमिगत गतिविधियों में सक्रिय रहीं.
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ताराबाई शिंदे
19वीं सदी की लेखिका ताराबाई ने 'स्त्री-पुरुष तुलना' नामक किताब लिखकर पितृसत्ता और महिलाओं के उत्पीड़न पर सवाल उठाए. वे भारत की पहली नारीवादी लेखिकाओं में से एक मानी जाती हैं.
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किरण बेदी
भारत की पहली महिला IPS अधिकारी किरण बेदी ने महिलाओं के खिलाफ हिंसा, जेल सुधार और सामाजिक न्याय के लिए काम किया. वे तिहाड़ जेल में सुधार लाईं जो कि महिलाओं के सशक्तिकरण की मिसाल है.
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मलाला यूसुफजई
पाकिस्तान की मलाला ने लड़कियों की शिक्षा के अधिकार के लिए तालिबान के खिलाफ आवाज उठाई. 15 साल की उम्र में उन पर हमला हुआ, लेकिन वे बच गईं और नोबेल शांति पुरस्कार जीतने वाली सबसे युवा शख्सियत बनीं. आज वे मलाला फंड के जरिए दुनिया भर में लड़कियों की शिक्षा के लिए काम कर रही हैं.
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मदर टेरेसा
मदर टेरेसा ने गरीब, बीमार और असहाय महिलाओं के लिए जीवन समर्पित किया. उन्होंने कोलकाता में मिशनरीज़ ऑफ चैरिटी शुरू की, जो आज दुनिया भर में महिलाओं और बच्चों की मदद करती है. उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार मिला.
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