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समुद्र में 10,000 फीट नीचे मिला रहस्यमयी रास्ता, एलियन से है नाता? वैज्ञानिक भी हैरान

प्रशांत महासागर की गहराइयों में खोज कर रहे वैज्ञानिकों को एक ऐसी चीज मिली है जिसने इंटरनेट पर एलियन सभ्यता और प्राचीन सड़क की चर्चा छेड़ दी है.

By Gaurav Barar | Updated: February 15, 2026 9:24 AM IST

शोधकर्ताओं को मिला रहस्यमयी रास्ता

समुद्र की गहराइयों में छिपे राज अक्सर इंसान को हैरान कर देते हैं. हाल ही में एक गहरे समुद्री अभियान के दौरान शोधकर्ताओं को समुद्र की सतह से लगभग 10,000 फीट नीचे पीली ईंटों जैसी दिखने वाली एक सड़क मिली है. पहली नजर में यह किसी प्राचीन सभ्यता के रास्ते जैसा लगता है, लेकिन वैज्ञानिकों ने इसके पीछे की असल और रोमांचक वजह खोज निकाली है. (All AI Image)

कहां मिला यह 'पीला रास्ता'?

यह खोज प्रशांत महासागर में हवाई के उत्तर-पश्चिम में स्थित 'लिलीउओकलानी रिज' नामक एक डूबी हुई ज्वालामुखी पर्वतमाला के शिखर पर हुई है. ओशन एक्सप्लोरेशन ट्रस्ट के शोधकर्ताओं ने एक रिमोट से चलने वाले रोबोटिक वाहन के जरिए इसका हाई-रिज़ॉल्यूशन वीडियो रिकॉर्ड किया. 

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इन्हें देखकर कोई भी खा सकता है धोखा 

वीडियो में समुद्र तल की उबड़-खाबड़ जमीन के बीच एक सपाट, पीले रंग की सतह दिखाई दी, जो बिल्कुल ईंटों से बनी सड़क की तरह लग रही थी. ईंटों के बीच के खांचे इतने सटीक थे कि उन्हें देखकर कोई भी धोखा खा सकता था.

ईंटें नहीं, ये तो ज्वालामुखी का कमाल है!

वैज्ञानिकों ने जब इस सड़क का बारीकी से अध्ययन किया, तो पता चला कि ये कोई हाथ से बनी ईंटें नहीं हैं. यह असल में हाइलोक्लास्टाइट नाम की एक ज्वालामुखी चट्टान है.

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कैसे बनी यह चट्टान?

जब ज्वालामुखी फटने के बाद गर्म लावा समुद्र के ठंडे पानी के संपर्क में आता है, तो वह बहुत तेजी से ठंडा होकर छोटे-छोटे कांच जैसे टुकड़ों में टूट जाता है. समय के साथ ये टुकड़े आपस में जमकर एक सख्त परत बना लेते हैं.

सटीक आकार का राज

ईंटों जैसे चौकोर आकार के पीछे थर्मल स्ट्रेस यानी तापमान का दबाव है. बार-बार होने वाले ज्वालामुखी विस्फोटों के कारण जब चट्टान गर्म होती और फिर ठंडी होकर सिकुड़ती है, तो उसमें 90-डिग्री के कोण पर दरारें पड़ जाती हैं. यही दरारें इसे 'मानव निर्मित सड़क' जैसा लुक देती हैं.

समुद्री जीवन के लिए खास जगह

ये डूबे हुए ज्वालामुखी पर्वत समुद्री जीवों के लिए वरदान की तरह हैं. गहरे समुद्र के जानवर इन पथरीली ढलानों पर अपना घर बनाते हैं. यहां चलने वाली समुद्री धाराएं चट्टानों को साफ रखती हैं और जीवों के लिए भोजन लेकर आती हैं. शोधकर्ता इन चट्टानों के नमूने लेकर यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि इतनी गहराई में जीवन कैसे पनपता है. 

चौंका देगा ये फैक्ट

हैरान करने वाली बात यह है कि साल 2025 के एक अनुमान के मुताबिक, हमने 1958 से अब तक समुद्र के विशाल तल का मात्र 0.0006 से 0.001 प्रतिशत हिस्सा ही कैमरों के जरिए देखा है. इसका मतलब है कि धरती का सबसे बड़ा हिस्सा अभी भी हमारी नजरों से ओझल है.