अहमदाबाद. गुजरात विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीति तेजी से करवट ले रही है. बीजेपी के सामने सत्ता बचाने की चुनौती है तो कांग्रेस किसी भी हालत में सत्ता में वापस लौटने का मन बना चुकी है. कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने गुजरात पर नजरें जमा रखी हैं और भरोसा किया है तीन चेहरों पर. इन तीनों में से सबसे पहला नाम है अल्पेश ठाकोर का, जो एक दिन पहले ही कांग्रेसी बने हैं. 

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अल्पेश राज्य के बड़े ओबीसी नेता माने जाते हैं. वह युवा हैं और समुदाय के मुद्दों पर एक्टिव रहते हैं. लेकिन यहां यह भी जान लीजिए कि जिस अल्पेश के कंधे पर राहुल गांधी ने हाथ रखा है, वह एक वक्त जिला पंचायत चुनाव में करारी हार झेल चुके हैं. इस स्थिति में राजनीतिक एक्सपर्ट विश्लेषण कर रहे हैं कि क्या अल्पेश जैसे नेताओं के बूते कांग्रेस राज्य में 22 साल के वनवास को खत्म कर पाएगी.

घर वापसी जैसी है अल्पेश की कांग्रेस में एंट्री
अल्पेश 2009 से 2012 तक कांग्रेस में रह चुके हैं. अल्पेश के पिता खोड़ाजी ठाकोर कांग्रेस के दिग्गज नेता हैं. खोड़ाजी अभी अहमदाबाद के ग्रामीण जिला अध्यक्ष हैं. अल्पेश ने कांग्रेस के टिकट पर ही पिछला जिला पंचायत चुनाव लड़ा था, लेकिन हार गए थे. 3 साल पहले भी वह कांग्रेस का फटका डालकर प्रचार कर रहे थे.

5 साल में की तरक्की
पिछले 5 साल में गुजरात की राजनीति तेजी से बदली है. हार्दिक पटेल और पाटीदार आंदोलन की इसमें अहम भूमिका है. इसी दौरान अल्पेश ठाकोर का ग्रॉफ भी ऊपर उठा है. अल्पेश ने अपना कद बढ़ाने के लिए समाजिक आंदोलन का रास्ता अपनाया. उन्होंने अवैध शराब के खिलाफ मुहिम छेड़ी और राज्य में ओबीसी की 146 जातियों को एकजुट भी किया. अल्पेश के साथ ये जातियां उनके नशे के खिलाफ अभियान से ही आई थीं. कांग्रेस में एंट्री से पहले अल्पेश ने बीजेपी से भी टक्कर ली थी. साल 2016 में अल्पेश ने एक रैली में कहा था कि अगली सीएम बीजेपी से नहीं होगा, बल्कि हमारा होगा. 

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अल्पेश के पिता भी कभी बीजेपी में थे
अल्पेश की राजनीतिक पृष्ठभूमि रही है. उनके पिता खोड़ाजी ठाकोर, शंकर सिंह वाघेला के साथ बीजेपी के संग थे. वाघेला के कांग्रेस में चले जाने के बाद खोड़ाजी भी कांग्रेस में चले गए. अभी भी वह कांग्रेस में ही हैं. खोड़ाजी अहमदाबाद के एंडला गांव के हैं. वहीं, अल्पेश समाज सेवा के अलावा खेती और रियल एस्टेट का बिजनेस करते हैं. उनका गांव हार्दिक पटेल के चंदन नगरी गांव से कुछ किलोमीटर ही दूर है.

अल्पेश का संगठन मजबूत
5 साल पहले अल्पेश तब चर्चा में आए जब उन्होंने गुजरात क्षत्रिय-ठाकोर सेना बनाई थी. यह संगठन नशा मुक्ति के लिए राज्य भर में कार्य करता है. इस वक्त भी साढ़े 6 लाख लोग इस संगठन के साथ रजिस्टर्ड हैं. हाल में अल्पेश ने एकता मंच का भी गठन किया. इसके तहत, ओबीसी, एससी, एसटी समुदाय के लोगों को उन्होंने साथ जोड़ा. राज्य भर में 22 से 24 प्रतिशत ठाकोर समुदाय के लोग हैं.