
Satyam Kumar
सत्यम, बिहार से हैं. उन्होंने LS College, मुजफ्फरपुर, बिहार से जर्नलिज्म की पढ़ाई की है. जामिया मिल्लिया इस्लामिया से MA In Media Governance में मास्टर्स किया है. मास्टर्स के साथ ... और पढ़ें
History of automobile industry: कार रेसिंग पर ना जानें आपने कितनी ही गेम और मूवीज देखी होगी? मूवीज की बात करें तो Ford vs Ferrari, स्पीड और फास्ट एंड फ्यूरियस. वहीं, एनिमेशन मूवी में Cars कितनी पॉपुलर हुई. ये कार की दीवानगी है. रिवाइविंग की आवाज के प्रति लोगों का जुनून है. कभी लकड़ी के पहिए से शुरु हुई इसकी कहानी ने मानव सभ्यता के विकास की गति को सुपरफास्ट बना दिया. आज हम जिस लग्जरी और स्पीड का मजा लेते हैं, उसके पीछे संघर्ष की एक लंबी दास्तान है. आइये जानते हैं गाड़ी के बनने से लेकर ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री के फेमस होने की कहानी…
Automobile शब्द दो लैंग्वेज के मेल से बना है. पहला हिस्सा ग्रीक शब्द Autos और दूसरा लैटिन शब्द Mobilis से बना है, जिसका अर्थ होता है, ऐसी मशीन जो खुद अपनी ताकत से चले. 19वीं सदी के अंत में जब गाड़ियों ने घोड़ों की जगह लेनी शुरू की, तब से यह नाम दुनिया भर में मशहूर हो गया.
इंसानी तरक्की का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट पहिए का आविष्कार था. हिस्ट्री डॉट कॉम की एक रिपोर्ट मुताबिक, करीब 3500 ईसा पूर्व मेसोपोटामिया में लकड़ी के पहिए के इस्तेमाल ने सामान ढोना आसान बनाया. यही वह नींव थी, जिस पर भविष्य के रथ, बैलगाड़ियां और आखिरकार आज की हाई-स्पीड कारें खड़ी हुईं. शुरुआत में गाड़ियां भाप (Steam) से चलती थीं, जो काफी भारी और धीमी थीं. 1880 के दशक में जर्मनी में इंटरनल कंबशन इंजन (IC Engine) के आने से असली क्रांति हुई. पहिए के साथ जब पेट्रोल इंजन जुड़ा, तो वह बग्गी से मोटरकार में तब्दील हो गई.
वैसे तो 1886 में कार्ल बेंज ने पहली पेट्रोल से चलने वाली गाड़ी बनाई थी, लेकिन 1901 की मर्सिडीज (Mercedes) को दुनिया की पहली मॉडर्न मोटरकार माना जाता है. विल्हेम मेबैक द्वारा डिजाइन की गई इस कार की रफ्तार 53 मील प्रति घंटा थी, जो उस समय के लिए एक चमत्कार था.
कार का जन्म भले ही जर्मनी और फ्रांस में हुआ, लेकिन अमेरिका ने हेनरी फोर्ड की मास प्रोडक्शन तकनीक से इसे घर-घर पहुंचाया. दूसरे विश्व युद्ध के बाद यूरोप और जापान ने इस इंडस्ट्री में अपनी धाक जमाई. 1980 तक जापान दुनिया का लीडिंग ऑटोमेकर बन गया, जिसने क्वालिटी और माइलेज की डेफिनेशन को बदल दी.
हेनरी फोर्ड की Model T ने कारों को मिडिल क्लास की पहुंच में ला दिया. इसके बाद जनरल मोटर्स और क्रिसलर जैसी कंपनियों ने बिग थ्री बनकर मार्केट पर कब्जा किया. धीरे-धीरे ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री सिर्फ ट्रांसपोर्ट का साधन नहीं, बल्कि किसी भी देश की GDP और इंडस्ट्रियल ग्रोथ का सबसे बड़ा पैमाना बन गई.
दुनिया की पहली कार रेस 1895 में अमेरिका में हुई थी, जिसे फ्रैंक और चार्ल्स ड्यूरिया ने जीता था. इस जीत ने न केवल उनकी कंपनी की साख बढ़ाई, बल्कि कारों के बीच परफॉर्मेंस और स्पीड की उस होड़ को जन्म दिया जो आज फॉर्मूला वन (F1) के रूप में हमारे सामने है.
भारत की सड़कों पर पहली कार साल 1897 में चली थी, जिसे मिस्टर फोस्टर (Mr. Foster) नाम के अंग्रेज अधिकारी ने कलकत्ता में चलाया था. इसके ठीक बाद 1898 में जमशेदजी टाटा भारत के पहले ऐसे व्यक्ति बने जिन्होंने खुद की कार खरीदी थी.
भारत में कारों का कमर्शियल उत्पादन 1942 में शुरू हुआ. बी.एम. बिड़ला ने हिंदुस्तान मोटर्स (Hindustan Motors) की स्थापना हुगली, कोलकाता में की थी. इसके बाद प्रीमियर ऑटोमोबाइल्स ने मुंबई में अपनी यूनिट लगाई, जिससे भारत के मध्यम वर्ग के लिए एंबेसडर और फिएट जैसे आइकॉन्स का रास्ता खुला.
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