सोमनाथ पर गजनवी की नजर क्यों पड़ी? कितना सोना-धन लूट ले गया था ये मुगल शासक, जानें इतिहास के पन्नों का बड़ा सच

सोमनाथ मंदिर, जो द्वादश ज्योतिर्लिंगों में प्रथम है, केवल एक धार्मिक स्थल नहीं बल्कि भारत की आस्था, इतिहास और स्वाभिमान का प्रतीक रहा है. 1025 ईस्वी में महमूद गजनवी ने प्रभास पाटन स्थित इस समृद्ध मंदिर पर हमला कर लूट और विध्वंस किया, ज्योतिर्लिंग को खंडित किया और भारी मात्रा में धन-संपत्ति गजनी ले गया.

Published date india.com Updated: January 8, 2026 11:48 PM IST
सोमनाथ पर गजनवी की नजर क्यों पड़ी? कितना सोना-धन लूट ले गया था ये मुगल शासक, जानें इतिहास के पन्नों का बड़ा सच

Mahmud Ghazni Attack on Somnath Temple: सोमनाथ मंदिर सिर्फ पत्थरों से नहीं बना बल्कि इतिहास की चोटों, आस्था की जिद और राष्ट्र के स्वाभिमान से बना है. द्वादश ज्योतिर्लिंगों में पहला और शायद सबसे ज्यादा टूटा, सबसे ज्यादा लूटा लेकिन हर बार फिर से उठ खड़ा हुआ. सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 साल पूरे होने वाले हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से इस मौके को ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’के रूप में मनाया जा रहा है. गुजरात के गांधीनगर में स्थित डोलेश्वर महादेव मंदिर (Dholeshwar Mahadev Temple) में सोमनाथ स्वाभिमान पर्व (Somnath Swabhiman Parv) का आयोजन होने जा रहा है.

इतिहास के पन्नों को पलटा जाए तो पता चलता है कि सोमनाथ के स्वाभिमान को बचाए रखने के लिए कितनी लड़ाईयां लड़ी गईं. इसपर सबसे गहरी चोट पहुंचाई थी महमूद गजनवी. इतिहास गवाह है कि 1025 ईस्वी में जब गजनवी की सेनाएं प्रभास पाटन पहुंचीं, तब सोमनाथ सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि श्रद्धा का महासागर था, जहां शंखनाद गूंजता था, दीप जलते थे और शिवभक्तों की सांसों में विश्वास बसता था. गजनवी ने लूट और विध्वंस की मंशा से मंदिर को तोड़ा और ज्योतिर्लिंग को खंडित किया. इस दौरान उसने न केवल मंदिर को तोड़ा बल्कि यहां से अपार धन-संपत्ति लूटकर गजनी ले जाई गई.

विभिन्न क्षेत्रों को निशाना बनाया

महमूद गजनवी का नाम भारतीय इतिहास में बार-बार होने वाले आक्रमणों के कारण दर्ज है. गजनी साम्राज्य का यह शासक लगभग 971 से 1030 ईस्वी तक सत्ता में रहा और इसी दौरान उसने भारतीय उपमहाद्वीप की ओर कई सैन्य अभियान चलाए। ऐतिहासिक स्रोतों के अनुसार गजनवी ने भारत पर करीब 17 बार आक्रमण किए. उसका पहला बड़ा हमला वर्ष 1000 ईस्वी में हुआ, जब उसने हिंदू शासक जयपाल को पराजित किया. इसके बाद 1005, 1006, 1007, 1011 और 1013 ईस्वी सहित कई वर्षों में उसने उत्तर-पश्चिम भारत के विभिन्न क्षेत्रों को निशाना बनाया. इन अभियानों का मुख्य उद्देश्य लूट, सैन्य प्रभुत्व और अपनी सत्ता को मजबूत करना माना जाता है.

इन सभी आक्रमणों में सबसे ज्यादा चर्चित और निर्णायक हमला सोमनाथ मंदिर पर हुआ. साल 1024–25 ईस्वी के आसपास गजनवी ने गुजरात के काठियावाड़ क्षेत्र में स्थित सोमनाथ मंदिर पर चढ़ाई की. उस समय इस क्षेत्र पर भीमदेव का शासन बताया जाता है. इतिहासकारों के अनुसार, गजनवी एक बड़ी सेना के साथ प्रभास पाटन पहुंचा और मंदिर परिसर पर हमला किया. यह आक्रमण केवल सैन्य नहीं था, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से भी गहरा प्रभाव छोड़ने वाला माना जाता है. इस दौरान भारी तोड़फोड़ हुई और बड़ी संख्या में लोग मारे गए, ऐसा कई विवरणों में उल्लेख मिलता है.

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