समुद्र के नीचे मिले 73 रहस्यमयी ज्वालामुखी गड्ढे, नई खोज ने दुनिया को चौंकाया
Deep Sea Discovery: वैज्ञानिकों ने समुद्र की गहराइयों में 73 ऐसे विशाल ज्वालामुखी गड्ढे खोजे हैं, जिनके बारे में पहले किसी को पता ही नहीं था.
वैज्ञानिकों ने समुद्र की गहराई में की खोज. (Photo/Meta AI)
- समुद्र की गहराई में छिपे रहस्य ने चौंकाया
- 73 विशाल ज्वालामुखी गड्ढों का खुलासा
- एआई की मदद से की गई खोज
- प्राकृतिक आपदाओं को समझने में मिल सकती बड़ी मदद
समुद्र में अक्सर हमें रंग-बिरंगी मछलियां और कुछ रहस्यमयी जीव दिखाई देते हैं. मगर इसकी गहराई में और भी कई शक्तिशाली प्राकृतिक ताकतें छिपी हुई हो सकती हैं. ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि हाल ही में फ्रांस की पेरिस-सैकले यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों की एक टीम ने एआई की मदद से समुद्र की सतह के नीचे 73 नए ज्वालामुखी कैल्डेरा खोजे हैं. इस संबंध में sciencealert.com में एक रिपोर्ट छपी है. इसके अनुसार, कैल्डेरा एक बहुत बड़ा गोलाकार गड्ढा होता है, जो तब बनता है जब किसी ज्वालामुखी के अंदर मौजूद मैग्मा बाहर निकल जाता है और उसके ऊपर की जमीन धंस जाती है. इनमें से कुछ कैल्डेरा लाखों साल पुराने और निष्क्रिय हो सकते हैं, लेकिन कुछ ऐसे भी हो सकते हैं जो भविष्य में फिर से सक्रिय होकर विस्फोट कर दें.
समुद्र की गहराई में छिपा रहस्य
वैज्ञानिकों का कहना है कि अब तक समुद्र के नीचे ऐसे बहुत कम कैल्डेरा की जानकारी थी, इसलिए यह खोज धरती की अंदरूनी गतिविधियों को समझने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है. वैज्ञानिकों ने इस खोज के लिए एक खास एआई एल्गोरिदम का इस्तेमाल किया, जिसे पहले मंगल ग्रह पर उल्कापिंडों से बने गड्ढों की पहचान करने के लिए तैयार किया गया था. इस तकनीक को समुद्र की तलहटी के नक्शों पर लागू किया गया. शुरुआत में एआई ने लगभग 87 हजार से ज्यादा संभावित जगहों की पहचान की, लेकिन जांच के बाद अधिकांश जगहें सही नहीं निकलीं. कई चरणों की जांच और विशेषज्ञों द्वारा निरीक्षण के बाद 78 संभावित कैल्डेरा चुने गए. इनमें से 5 पहले से वैज्ञानिकों को ज्ञात थे, जबकि 73 बिल्कुल नए निकले. अगर आगे की जांच में इनकी पुष्टि हो जाती है, तो दुनिया में ज्ञात समुद्री कैल्डेरा की संख्या तीन गुना से भी अधिक हो जाएगी. इससे वैज्ञानिकों को समुद्र के नीचे मौजूद ज्वालामुखियों की सही तस्वीर समझने में काफी मदद मिलेगी.
वैज्ञानिको ने खोजे कई ज्वालामुखी काल्डेरा
इस खोज ने एक और दिलचस्प बात सामने रखी है. वैज्ञानिकों को लगा था कि ज्यादातर समुद्री कैल्डेरा वहां मिलेंगे, जहां पृथ्वी की टेक्टोनिक प्लेटें आपस में टकराती या अलग होती हैं. लेकिन नई खोज में सबसे ज्यादा, यानी 61 कैल्डेरा ऐसे इलाकों में मिले जो प्लेटों की सीमाओं से दूर हैं. इसके अलावा 9 कैल्डेरा ज्वालामुखीय चाप वाले क्षेत्रों में और 8 मध्य महासागरीय पर्वत श्रृंखलाओं के पास पाए गए. वैज्ञानिकों ने इनमें से 7 कैल्डेरा को भविष्य के अध्ययन के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना है, क्योंकि उनकी गहराई, आकार और स्थान यह संकेत देते हैं कि वे भविष्य में प्राकृतिक आपदाओं को समझने में अहम भूमिका निभा सकते हैं. हालांकि शोध में यह नहीं बताया गया है कि इनमें से कौन-सा ज्वालामुखी अभी सक्रिय है और कौन नहीं, लेकिन हाल के कई अध्ययनों से यह पता चला है कि कुछ लंबे समय से शांत पड़े ज्वालामुखियों के नीचे फिर से मैग्मा जमा हो सकता है और वे भविष्य में सक्रिय हो सकते हैं.
दिखा चुका है खतरनाक रूप
साल 2022 में टोंगा के पास समुद्र के नीचे हुए हंगा टोंगा-हंगा हापाई ज्वालामुखी विस्फोट ने पूरी दुनिया को यह दिखा दिया था कि समुद्र के नीचे होने वाले विस्फोट कितने खतरनाक हो सकते हैं. उस विस्फोट से सुनामी आई, तेज दबाव तरंगें अंतरिक्ष तक पहुंच गईं और हजारों किलोमीटर दूर तक नुकसान दर्ज किया गया. यही कारण है कि वैज्ञानिक अब समुद्र के नीचे मौजूद ऐसे सभी संभावित ज्वालामुखियों की पहचान करना चाहते हैं, ताकि भविष्य में किसी बड़े खतरे का पहले से अनुमान लगाया जा सके.
भविष्य के लिए कदम
शोधकर्ताओं का कहना है कि उनका उद्देश्य अभी दुनिया के सभी समुद्री कैल्डेरा की पूरी सूची तैयार करना नहीं है, बल्कि एक ऐसा भरोसेमंद तरीका विकसित करना है, जिससे भविष्य में बेहतर तकनीक और अधिक सटीक समुद्री नक्शों की मदद से और भी नई खोजें की जा सकें. यह अध्ययन भविष्य में समुद्री ज्वालामुखियों से जुड़े खतरों का आकलन करने और दुनिया को प्राकृतिक आपदाओं के प्रति पहले से अधिक तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.
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