
Satyam Kumar
सत्यम, बिहार से हैं. उन्होंने LS College, मुजफ्फरपुर, बिहार से जर्नलिज्म की पढ़ाई की है. जामिया मिल्लिया इस्लामिया से MA In Media Governance में मास्टर्स किया है. मास्टर्स के साथ ... और पढ़ें
Supreme court on Abetment of suicide: अक्सर कपल साथ जीने-मरने की कसम खाते हैं. घरवालों के इंकार के बाद या किसी परिस्थितियों के मद्देनजर हालात ऐसे बनते हैं कि दोनों एक साथ सुसाइड करने को तैयार हो जाते हैं. लेकिन ऐसे हालात में अगर एक की मौत और दूसरा जीवित रह जाए, तो जीवित बचे शख्स के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला चलेगा. सुप्रीम कोर्ट ने ऐसी ही परिस्थितियों से जुड़ी एक मामले की सुनवाई की. आइये जानते हैं कि सुसाइड पैक्ट को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने क्या फैसला सुनाया है…
सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई जस्टिस राजेश बिंदल और जस्टिस मनमोहन की डिवीजन बेंच कर रही थी. पीठ ने कहा कि उकसाने (Abetment) का मतलब केवल भौतिक रूप से जहर या हथियार देना नहीं है. एक साथ मरने का वादा करना भी साइकोलॉजिकल उत्प्रेरक यानि कैटेलिस्ट है, जो दूसरे व्यक्ति को आत्महत्या के लिए प्रेरित करता है. सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में कहा कि सुसाइड पैक्ट यानि साथ में आत्महत्या करने का समझौता में बचने वाले साथी को आत्महत्या के लिए उकसाने यानि IPC धारा 306 के तहत दोषी माना जा सकता है.
कोर्ट ने कहा कि सुसाइड पैक्ट में एक के संकल्प से दूसरे की प्रतिबद्धता मजबूत होती है. हो सकता है कि यदि एक पीछे हट जाए लेकिन दूसरा, शायद ऐसा न करे. इसलिए, साथ मरने का समझौता एक-दूसरे के लिए कैटेलिस्ट का काम करता है, जिससे आत्महत्या की घटना हुई. अदालत के अनुसार, IPC की धारा 107 के तहत उकसाना केवल शारीरिक कृत्य तक सीमित नहीं है. कोई भी मनोवैज्ञानिक आश्वासन या उकसावा, जो जानबूझकर किया गया हो और सीधे तौर पर अपराध से जुड़ा हो, वह अबेटमेंट (उकसाना) माना जाएगा.
सुनवाई के दौरान, अभिनेत्री की मां ने बलात्कार और गला घोंटकर हत्या का आरोप लगाया था, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया. फॉरेंसिक और मेडिकल रिपोर्ट (AIIMS और CFSL) ने पुष्टि की कि मौत की वजह कीटनाशक जहर (Organophosphate) ही था, जिसे सिद्धार्थ ने खरीदा था. सुप्रीम कोर्ट ने जोर देकर कहा कि राज्य का मौलिक हित जीवन को सुरक्षित रखना है. जीवन अंत करने में किसी भी प्रकार की सहायता या प्रोत्साहन देना राज्य के खिलाफ अपराध है. सुसाइड पैक्ट होने मात्र से कानूनी जिम्मेदारी कम नहीं हो जाती. सुप्रीम कोर्ट ने दोषी सिद्धार्थ रेड्डी को चार सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का आदेश दिया है.
घटना साल 2002 की है, जब मशहूर साउथ अभिनेत्री प्रत्यूषा और उनके प्रेमी सिद्धार्थ रेड्डी ने शादी का विरोध होने पर साथ में जहर खाकर जान देने की कोशिश की थी. सुसाइ़ड पैक्ट के बाद आत्महत्या के प्रयास में अभिनेत्री प्रत्यूषा की मौत हो गई लेकिन सिद्धार्थ रेड्डी बच गए. ट्रायल अदालत और हाईकोर्ट ने सिद्धार्थ को आत्महत्या के लिए उकसाने का दोषी पाया था, जिसे अब सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा है.
IPC की धारा 306 आत्महत्या के लिए उकसाने के लिए सजा का प्रावधान करती है, जबकि धारा 107 ‘उकसाने’ को डिफाइन करती है. कोर्ट ने माना कि सुसाइड पैक्ट में शामिल होना धारा 107 की तीनों स्थितियों (उकसाना, साजिश और सहायता) के अंतर्गत आता है. जाते-जाते बता दें कि इस फैसले के बाद अब सुसाइड पैक्ट में जीवित बचने वाले व्यक्ति के लिए सजा से बचना मुश्किल होगा. यह फैसला भविष्य में ऐसे प्रेम प्रसंगों और सुसाइड पैक्ट से जुड़े मामलों के लिए एक नजीर बनेगा.
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