
Satyam Kumar
सत्यम, बिहार से हैं. उन्होंने LS College, मुजफ्फरपुर, बिहार से जर्नलिज्म की पढ़ाई की है. जामिया मिल्लिया इस्लामिया से MA In Media Governance में मास्टर्स किया है. मास्टर्स के साथ ... और पढ़ें
सन् 1947 का भारत-पाकिस्तान विभाजन केवल सीमाओं का बंटवारा नहीं था, बल्कि यह साझा संस्कृति, परिवारों और फलते-फूलते व्यापारिक साम्राज्यों का भी विच्छेद था. उस दौर में कई ऐसी कंपनियां थीं जिनका जन्म अविभाजित भारत की मिट्टी में हुआ, लेकिन सरहदें खिंचते ही उनके रास्ते हमेशा के लिए जुदा हो गए. आज ये नाम दोनों देशों में अपनी पहचान बनाए हुए हैं, लेकिन इनके मालिकाना हक और मुनाफे का एक-दूसरे से कोई कानूनी संबंध नहीं रह गया है.
विभाजन और उद्योग जगत पर प्रभाव आजादी से पहले मुंबई, दिल्ली और लाहौर जैसे शहर व्यापार के प्रमुख केंद्र थे. विभाजन के बाद उद्यमियों के सामने बड़ी चुनौती थी, या तो वे अपनी जड़ें छोड़कर नए मुल्क जाएं या अपने कारोबार का बंटवारा करें. नतीजा यह हुआ कि कई ऐतिहासिक ब्रांड्स दो स्वायत्त इकाइयों में बंट गए. आज जिन्हें हम ‘भारतीय ब्रांड’ समझते हैं, उनकी जड़ें पाकिस्तान में भी उतनी ही गहरी हैं. आइये जानते हैं ऐसे 4 कंपनियों के नाम…
हमदर्द की शुरुआत 1906 में दिल्ली की गलियों से एक छोटे यूनानी क्लीनिक के तौर पर हुई थी. बंटवारे के समय संस्थापक के बड़े बेटे भारत में ही रहे, जबकि छोटे बेटे हकीम मोहम्मद सईद पाकिस्तान चले गए. वहां उन्होंने ‘हमदर्द पाकिस्तान’ की नींव रखी. आज इनका मशहूर शर्बत ‘रूह अफजा’ दोनों देशों के घर- घर की पसंद है, लेकिन दोनों इकाइयां स्वतंत्र चैरिटेबल ट्रस्ट के रूप में चलती हैं और उनका मुनाफा अपने- अपने देश के कल्याण कार्यों में खर्च होता है.
हबीब बैंक की कहानी सीधे तौर पर राजनीति से जुड़ी है. 1941 में मुंबई में शुरू हुए इस बैंक की स्थापना मोहम्मद अली जिन्ना के गुजारिश पर की गई थी. पाकिस्तान बनने के बाद इस बैंक ने अपना पूरा आधार कराची शिफ्ट कर लिया. आज यह पाकिस्तान का सबसे बड़ा निजी बैंक है, जिसका भारत से अब कोई वित्तीय लेना-देना नहीं है.
डालडा की शुरूआत हिंदुस्तान वनस्पति मैन्युफैक्चरिंग कंपनी ने किया था. 1937 में लॉन्च हुआ डालडा, एक समय वनस्पति तेल का पर्याय बन गया था. हालांकि, बंटवारे के बाद दोनों मुल्कों में इसकी लोकप्रियता बनी रही. साल 2000 के बाद जब यूनिलीवर ने इसे बेचा, तो भारत में इसे ‘बंज लिमिटेड’ ने खरीदा और पाकिस्तान में ‘वेस्टबरी ग्रुप’ ने. आज पाकिस्तान में यह डालडा फूड्स के नाम से जाना जाता है.
एलाइड बैंक का पहले नाम ऑस्ट्रेलेशिया बैंक हुआ करता था. इसकी शुरुआत 1942 में लाहौर में हुई थी. विभाजन के दौरान जब कई भारतीय बैंक पाकिस्तान से अपना कारोबार समेट रहे थे, तब इस बैंक ने वहां अपनी जड़ें जमा लीं. बाद में इसका नाम बदलकर एलाइड बैंक कर दिया गया, जो आज पाकिस्तान के बैंकिंग क्षेत्र का एक बड़ा नाम है.
क्या ये कंपनियां भारत के लिए पैसा कमाती हैं?
यह एक बड़ा भ्रम है कि ये कंपनियां भारत से संचालित होती हैं. हकीकत यह है कि बंटवारे के बाद ये पूरी तरह स्वतंत्र हो चुकी हैं. पाकिस्तान में चलने वाली ये कंपनियां वहां की कानूनी और आर्थिक व्यवस्था का हिस्सा हैं और उनका मुनाफा उसी देश की अर्थव्यवस्था में घूमता है.
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