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MP-MLA को किससे मांगनी पड़ती है छुट्टी? जानिए किसके हाथ में होता है विधायक और सांसद का लीव
MP MLA Leave Process: विधायक और सांसद छुट्टी कैसे लेते हैं, इस बारे में बहुत कम लोगों को ही जानकारी होती है. आखिर उनकी लीव मंजूरी किसके हाथ में होती है, आइये इस बारे में विस्तार से जानते हैं.
MP MLA Leave Process: सांसद और विधायक सरकारी कर्मचारियों की तरह नहीं होते कि किसी अफसर से छुट्टी मांगें. उन्हें सदन की बैठकों से अनुपस्थित रहने के लिए सदन के पीठासीन अधिकारी को लिखित आवेदन देना पड़ता है. लोकसभा सांसद लोकसभा स्पीकर को और राज्यसभा सांसद उपराष्ट्रपति यानी राज्यसभा चेयरमैन को अर्जी देते हैं. विधायक अपनी विधानसभा स्पीकर या विधान परिषद चेयरमैन को आवेदन देते हैं.
सांसद को छुट्टी कैसे मिलती है?
लोकसभा में सांसद स्पीकर को और राज्यसभा में चेयरमैन को छुट्टी के लिए लिखित अर्जी देते हैं. अगर कोई सांसद लगातार 60 दिनों तक बिना अनुमति अनुपस्थित रहता है तो उसका पद खाली घोषित हो सकता है. छुट्टी की अर्जी पहले अवकाश समिति जांचती है और फिर सदन की सहमति से मंजूर होती है. ये नियम भारतीय संविधान और सदन की प्रक्रिया के तहत चलते हैं.
विधायक छुट्टी के लिए किसे आवेदन देते हैं?
विधायक विधानसभा स्पीकर को और विधान परिषद सदस्य विधान परिषद चेयरमैन को लिखित छुट्टी की अर्जी देते हैं. राज्य विधानसभाओं में भी यही नियम है कि 60 दिनों से ज्यादा अनुपस्थित रहने पर अनुमति जरूरी है. बिना अनुमति के 60 दिन से ज्यादा अनुपस्थित रहने पर विधानसभा संकल्प पारित करके पद खाली घोषित कर सकती है. ये प्रक्रिया सांसदों जैसी ही है.
क्यों जरूरी है छुट्टी की अनुमति?
सांसद और विधायक जनता के चुने हुए प्रतिनिधि होते हैं इसलिए सदन की बैठकों में उपस्थित होना उनका कर्तव्य है. बिना अनुमति के लंबे समय तक अनुपस्थित रहना गैर-जिम्मेदारी माना जाता है. इसलिए संविधान और सदन नियमों में 60 दिन की सीमा तय की गई है. अनुमति न लेने पर पद खाली होने का प्रावधान रखा गया है ताकि जनता का प्रतिनिधित्व सही तरीके से हो.
MP और MLA को छुट्टी किससे मांगनी पड़ती है-
लोकसभा सांसद लोकसभा स्पीकर को छुट्टी की अर्जी देते हैं.
राज्यसभा सांसद राज्यसभा चेयरमैन यानी उपराष्ट्रपति को आवेदन देते हैं.
विधायक विधानसभा स्पीकर या विधान परिषद चेयरमैन को छुट्टी मांगते हैं.
60 दिनों से ज्यादा अनुपस्थित रहने पर अनुमति जरूरी है वरना पद खाली हो सकता है.
छुट्टी की अर्जी पहले समिति जांचती है फिर सदन की सहमति से मंजूर होती है.
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