अहमदाबाद: गुजरात के अहमदाबाद में राशन की दुकानों से सब्सिडी पर दिए जाने वाले अनाज के विक्रय में धांधली करने के आरोप में आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया है. पुलिस ने बताया कि आरोपी, राशन की दुकान से अनाज नहीं लेने वाले लोगों के नाम पर फर्जी बिल बनाते थे.Also Read - तीस्ता सीतलवाड़ अहमदाबाद में मेडिकल चेकअप के बाद बोली- मेरे हाथ पर बड़ा घाव, एटीएस ने मेरे साथ यही किया

ऐसे लोगों की सूची उन्हें लाभार्थियों की जानकारी देने वाले सॉफ्टवेयर से मिलती थी. अहमदाबाद अपराध शाखा के एक अधिकारी ने बताया कि पुलिस का दावा है कि यह राज्य भर में फैला गिरोह है और इसमें करोड़ों रुपये का घोटाला हो सकता है. उन्होंने कहा कि राशन की दुकान के मालिक और बिचौलिए सॉफ्टवेयर बनाने वालों से सांठगांठ कर के सब्सिडी पर दिए जाने वाले अनाज को खुले बाजार में बेचते थे. अधिकारी ने कहा कि इस संबंध में और लोगों को गिरफ्तार किया जा सकता है. Also Read - गुजरातः गरीब बच्चों में शिक्षा की अलख जगा रहा यह सिविल इंजीनियर, फुटपाथ पर बच्चे कर रहे मुफ्त में पढ़ाई

उन्होंने बताया कि आरोपी, राशन की दुकान के मालिकों द्वारा प्रयोग किए जाने वाले सॉफ्टवेयर के यूजरनेम और पासवर्ड, लाभार्थियों के नाम, उनकी आधार कार्ड संख्या, राशन कार्ड संख्या और बायोमेट्रिक विवरण एकत्र करने के लिए दो सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करते थे. Also Read - गुजरात ATS ने तीस्ता सीतलवाड़ को हिरासत में लिया, मुंबई के सांताक्रूज पुलिस स्टेशन ले जाया गया

उन्होंने कहा कि आरोपी, महीने का राशन नहीं लेने वाले लाभार्थियों का विवरण एकत्र करते थे और उनके नाम पर फर्जी बिल बनाते थे. निरीक्षक (अपराध शाखा) अशरफ बलोच ने कहा, “आरोपियों द्वारा बनाया गया सॉफ्टवेयर लाभार्थियों के आंकड़ें एकत्र करने में मदद करता था. इसका इस्तेमाल उनका बिल बनाने के लिए किया जाता था जो महीने का राशन नहीं लेते थे. इस प्रकार वह दिखाते थे कि राशन लाभार्थियों को बेचा गया है लेकिन असल में वह खुले बाजार में बेच दिया जाता था.” अधिकारी ने बताया कि गोपनीय सूचना के आधार पर, पुलिस ने पहले अल्पेश ठक्कर नामक एक व्यक्ति को पकड़ा जो राशन की दुकान के मालिकों से संपर्क कर उन लाभार्थियों का विवरण हासिल करता था जो महीने का राशन नहीं लेते थे.

अपराध शाखा की ओर से जारी विज्ञप्ति में बताया गया कि पुलिस को ठक्कर के मोबाइल फोन में एक्सेल शीट मिली जिसमें ऐसे लाभार्थियों के विवरण, राशन की दुकान के मालिकों के यूजरनेम और पासवर्ड तथा दुकान के कोड मौजूद थे. आगे की जांच में रफीकभाई मनेसिया, जावेद रंगरेज, लतीफ मनेसिया और मुस्तफा मनेसिया का भेद खुला जिन्होंने कथित तौर पर राशन की दुकान के मालिकों को दो सॉफ्टवेयर दिए थे जिससे राशन कार्ड धारकों के आंकड़े मिल सकते थे.

पुलिस ने ‘गेमस्कैन’ नामक सॉफ्टवेयर के निर्माताओं कौशिक जोशी और दीपक ठाकोर तथा ‘सेवडेटा’ सॉफ्टवेयर के आपूर्तिकर्ता हितेश चौधरी को गिरफ्तार किया है. यह सभी बनासकांठा जिले के निवासी हैं. पुलिस के अनुसार, इसी तरह का घोटाला साबरकांठा, मेहसाणा, बनासकांठा, राजकोट, भावनगर और सूरत जिले में भी हुआ है. पुलिस ने कहा कि यह करोड़ों रुपये का घोटाला हो सकता है और दो साल से चल रहा है.