गुजरात: कोरोना वायरस की मार दुनिया भर में टूरिज्म इंडस्ट्री पर पड़ी है. अपने लग्जरियस स्टाइल और रखरखाव के कारण कई बड़े क्रूज कबाड़ में तब्दील होते जा रहे हैं. दुनिया के सबसे पुराने जहाजों में से एक ब्रिटेन का ‘मार्को पोलो’ क्रूज भी कबाड़ में तब्दील होने के लिए गुजरात रवाना हो चुका है.Also Read - ... तो इन राज्यों में होता है सबसे आसानी से काम, वित्तमंत्री ने जारी की सबसे सफल प्रदेशों की सूची

55 साल पुराना ‘मार्को पोलो’ दुनिया के सबसे पुराने क्रूज में से एक है और इसका रखरखाव और इंश्योरेंस इतना ज़्यादा महंगा पड़ता है कि कंपनी अब इसे बेच रही है. आपको बता दें कि हाल ही में कई क्रूज गुजरात के अलंग शिपयार्ड पहुंच चुके हैं. अब इन क्रूज के साथ ब्रिटेन के ‘मार्को पोलो’ क्रूज का नाम भी जुड़ गया है. Also Read - 1424 वर्ग किमी में फैला है गिर नेशनल पार्क, इस बार करिये यहां की सैर

मंदी की मार नहीं झेल पाया ‘मार्को पोलो’ Also Read - गुजरात में आप की चुनावी तैयारी से हलचल: अरविंद केजरीवाल के 'दिल्ली मॉडल' पर मंथन करेगी बीजेपी

दुनियाभर की अर्थव्यवस्था पर कोरोना वायरस की बड़ी मार के चलते, विश्वभर में मंदी का दौर चल रहा है, ऐसे में मंदी की चपेट में आने के चलते अब ‘मार्को पोलो’ को बेचने का फैसला किया गया है. बता दें, ‘मार्को पोलो’ दुनिया का सबसे पुराने क्रूज में से एक है और अब इसके रखरखाव के लिए होने वाले भारी भरकम खरच कंपनमी नहीं उठा सकती थी. जिसके चलते कंपनी अब इसे बेचकर कबाड़ में बदलने वाली है.

अपने घर से निकल चुका है ‘मार्को पोलो’

कबाड़ में तब्दील होने के लिए दुनिया के सबसे पुराने क्रूज में से एक क्रूज मार्को पोलो अपने घर से निकल चुका है. इसके गुजरात पहुँचने में जनवरी के आखिरी तक का समय लग सकता है. भारत पहुचने के बाद क्रूज की नीलामी की जाएगी, यहाँ खरीदने के लिए गुजरात की कई कंपनियों में होड़ लगी हुई है.

पहले से खड़े क्रूज हो जाएंगे कबाड़

कबाड़ में तब्दील होने पहुंचे क्रूज फरवरी के मध्य तक कबाड़ में तब्दील हो जाएंगे. भारत में पहला प्रीमियम क्रूज नवंबर में अलंग पहुंचा था. इसके बाद ओशियन ड्रीम, ग्रांड सेलिब्रेशन, सतोशी (पेसिफिक डॉन) पहुँचा और अब मार्को पोलो भी जनवरी के आखिरी सप्ताह में पहुँच जाएगा.