Haryana Assembly Election 2024: उचाना कलां विधानसभा सीट इस बार चुनावी हलचल का केंद्र बनी हुई है. यहां पूर्व डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला, कांग्रेस के बृजेंद्र सिंह, भाजपा के देवेंद्र अत्री और निर्दलीय वीरेंद्र घोघड़ियां जैसे प्रमुख उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं. किसान आंदोलन के कारण दुष्यंत के प्रति किसानों में नाराजगी है, जिससे उनकी स्थिति कमजोर हो रही है. जाट वोटों का बंटवारा चुनाव के नतीजों को प्रभावित कर सकता है, जिससे इस बार की चुनावी लड़ाई दिलचस्प बन गई है.
उचाना कलां सीट इस बार हॉट सीट बन गई है. यहां दुष्यंत चौटाला, जो जननायक जनता पार्टी (JJP) के उम्मीदवार हैं, चुनाव लड़ रहे हैं. उन्होंने 2019 में इस सीट पर बड़ी जीत हासिल की थी.
इस बार दुष्यंत को मुश्किलें आ रही हैं. कांग्रेस से बृजेंद्र सिंह चुनाव लड़ रहे हैं. बृजेंद्र सिंह, पूर्व केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह के बेटे हैं. भाजपा ने देवेंद्र अत्री को अपना उम्मीदवार बनाया है. आम आदमी पार्टी (AAP) ने पवन फौजी को उतारा है. इनेलो-बसपा का उम्मीदवार विनोद पाल सिंह है.
उचाना में लगभग 2.17 लाख वोटर हैं. इनमें से 1.7 लाख जाट वोटर हैं. दुष्यंत और बृजेंद्र के बीच मुकाबला जाट वोटरों के लिए है. लोग कहते हैं कि इस बार दुष्यंत को वोट नहीं मिलेंगे.
किसान आंदोलन के कारण दुष्यंत के प्रति किसानों में नाराजगी है. बहुत से लोग मानते हैं कि इस बार उनकी जमानत भी जब्त हो सकती है. पिछले चुनाव में दुष्यंत ने बहुत अच्छे वोट लिए थे, लेकिन इस बार उनका सामना कड़ी चुनौती से है.
कांग्रेस को इस बार किसानों का साथ मिल सकता है. अगर जाट वोट बंटे, तो इसका फायदा भाजपा को हो सकता है. निर्दलीय उम्मीदवार वीरेंद्र घोघड़ियां भी इस बार चर्चा में हैं. उनके नाम पर भी वोटर सोच रहे हैं.
उचाना में ब्राह्मण, ओबीसी, और अनुसूचित जाति के वोट भी हैं. अगर जाट वोट बंटते हैं, तो भाजपा और कांग्रेस दोनों को नुकसान होगा. किसान परिवारों के करीब 1.25 लाख वोट हैं. पिछले चुनाव में ये वोट जजपा को गए थे. लेकिन इस बार ये कांग्रेस की तरफ बढ़ सकते हैं.
दुष्यंत चौटाला अपने कार्यकाल की उपलब्धियाँ बता रहे हैं. वह कहते हैं कि उनके समय में किसानों की फसल की पेमेंट जल्दी होती थी. उन्होंने पेंशन बढ़ाने का भी वादा किया है.
बृजेंद्र सिंह लोगों से कह रहे हैं कि दुष्यंत ने उनकी उम्मीदों पर खरा नहीं उतरे. वह रोजगार और पेंशन का मुद्दा उठा रहे हैं.
भाजपा के देवेंद्र अत्री भी अपना प्रचार कर रहे हैं. वह नहरी पानी और महिला कॉलेज की बात कर रहे हैं.
वीरेंद्र घोघड़ियां, जो निर्दलीय उम्मीदवार हैं, भी अपनी ताकत दिखा रहे हैं. उन्होंने कांग्रेस से टिकट नहीं मिलने पर निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया.
लोगों का कहना है कि दुष्यंत ने कोई काम नहीं किया. पिछले चुनाव में जिन लोगों ने उन्हें वोट दिया, वे अब नाराज हैं. कांग्रेस और भाजपा के बीच मुख्य टक्कर है.
गौरतलब है कि उचाना कलां में चुनावी माहौल बदल रहा है. इस बार लोगों की सोच में बदलाव आया है. सभी उम्मीदवार अपने-अपने मुद्दों पर जोर दे रहे हैं. अब देखना है कि जनता किसे चुनती है. चुनाव के नतीजे इस सीट के भविष्य का फैसला करेंगे.
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